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आज होगी जीएसटी काउंसिल की मीटिंग, हो सकते हैं कौन-कौन से बदलाव, आप भी जान लीजिए

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वस्तु एवं सेवा कर (GST) काउंसिल की मीटिंग आज, 8 अक्‍टूबर को होगी. बैठक में जीएसटी दरों में किसी बड़े बदलाव का प्रस्ताव नहीं है. लेकिन, गुड्स डिलिवरी सर्विस, निर्यातकों और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स को जीएसटी राहत मिलने की उम्‍मीद है. बैठक में जीएसटी व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, सरल और कारोबार-अनुकूल बनाने की दिशा में कई बड़े फैसले लिए जा सकते हैं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 5 अक्‍टूबर को लिंक्‍डइन पर एक पोस्‍ट कर बताया था कि परिषद की इस उच्चस्तरीय बैठक में रजिस्ट्रेशन, रिटर्न, रिफंड, कानूनी विवादों के निपटारे और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के निर्बाध प्रवाह से जुड़े अहम प्रस्तावों पर विचार होगा.
मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि जीएसटी काउंसिल के एजेंडे में सबसे ऊपर टैक्स अपराधों का डिक्रिमिनलाइजेशन (Decriminalisation) है. वर्तमान में CGST Act के Section 69 के तहत कमिश्नर को गंभीर अपराधों जैसे फर्जी बिल, इनपुट टैक्स क्रेडिट में धोखाधड़ी या टैक्स चोरी के संदेह में किसी भी कारोबारी को सीधे गिरफ्तार करने का अधिकार है. GST काउंसिल की लॉ कमेटी ने अरेस्‍ट प्राविजन्‍स को खत्‍म करने की सिफारिश की है. जीएसटी परिषद की बैठक में इस सिफारिश पर मुहर लग सकती है.
बहुराष्ट्रीय कंपनियों की भारत स्थित इकाइयां विदेशी कंपनियों के लिए प्रोडक्ट डेवलपमेंट, टेस्टिंग और इंजीनियरिंग का काम करती हैं और भुगतान विदेशी मुद्रा में लेती हैं. लेकिन मौजूदा ‘प्लेस ऑफ सप्लाई’ नियमों के कारण यदि काम भारत में भेजे गए किसी कंपोनेंट पर हुआ है, तो इसे घरेलू सेवा मानकर 18% GST लगाया जाता है. जीएसटी काउंसिल बैठक में ऐसी सेवाओं को एक्‍सपोर्ट्स के रूप में मान्यता देने की अनुमति दी जा सकती है.

रिफंड का नया ऑटोमैटिक सिस्टम

सितंबर 2025 में पात्र रिफंड का 90% हिस्सा 7 दिनों के भीतर जारी करने का नियम तो बना था, लेकिन यह फैसला टैक्स अधिकारी के विवेक पर निर्भर था कि कारोबारी ‘लो-रिस्क’ श्रेणी में है या नहीं. अब ‘रिस्‍क स्‍कोर’ आधारित ऑटोमेशन लाया जा सकता है. यह सिस्‍टम टैक्सपेयर के पिछले रिकॉर्ड और फाइल किए गए रिटर्न्स का डेटा से मिलान करेगा. डेटा मैच होते ही रिफंड बिना किसी बाबू या दफ्तर के चक्कर काटे सीधे 7 दिन में बैंक खाते में ऑटो-रिलीज हो जाएगा.

ई-कॉमर्स क्षेत्र को मिल सकता है तोहफा

ई-कॉमर्स क्षेत्र के लिए हर राज्य में अलग-अलग जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराने की परेशानी खत्म करने का प्रस्ताव है. गुड्स डिलिवरी सर्विस पर जीएसटी 18 फीसदी से घटकर 5 फीसदी हो सकती है. इसके अलावा लेट फीस माफ करने और पेनाल्टी कम करने पर फैसला संभव है.

इंडस्ट्री के लिए ITC का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव

इंडस्ट्री के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करने का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव है. प्लांट-मशीनरी और टावर-पाइपलाइन लगाने पर भी आईटीसी क्लेम मिलने का प्रस्ताव है. खराब हो चुके और अवधि समाप्त हो चुके सामान पर भी इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करने की छूट का प्रस्ताव है.
सप्लायर की गलती से नहीं अटकेगा खरीदार का रिफंड
रिफंड को लेकर भी बड़ा फैसला हो सकता है. अगर विक्रेता अपना रिटर्न दाखिल नहीं करता है, तो खरीदार का रिफंड नहीं अटकेगा. यानी सप्लायर की गलती का खामियाजा खरीदार को नहीं भुगतना पड़ेगा.

रिफंड प्रक्रिया आसान करने का प्रस्ताव

ट्रेडर्स के लिए 10 दिनों में रिफंड की मंजूरी और 17 दिनों के भीतर रिफंड देने का प्रस्ताव है. रिटर्न में मिसमैच के कारण आने वाले जीएसटी शो कॉज नोटिस से भी राहत मिलने की उम्मीद है.

ग्रुप इंश्‍योरेंस पर आईटीसी संभव

सरकार कंपनियों को कर्मचारियों के लिए खरीदे गए ग्रुप इंश्योरेंस के प्रीमियम पर इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC देने की अनुमति देने पर विचार कर रही है.अभी कंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए ग्रुप हेल्थ या ग्रुप लाइफ इंश्योरेंस लेती हैं तो उस प्रीमियम पर आम तौर पर 18% GST लगता है. इस GST का ITC लेने की सुविधा नहीं है. अब सरकार इसमें बदलाव पर विचार कर रही है.