1 नवंबर से कई सारे फाइनेंशियल नियमों में बदलाव होने जा रहा है. इसी बीच जीएसटी (GST) को लेकर भी एक बड़ा बदलाव होने वाला है, जिससे कारोबारियों और छोटे व्यापारियों को राहत मिल सकती है. सरकार जीएसटी से जुड़े प्रोसेस को आसान बनाने, टैक्स रिफंड में होने वाली देरी कम करने और कारोबारियों पर कागजी कार्रवाई का बोझ घटाने की तैयारी कर रही है. इन बदलावों का मकसद टैक्स सिस्टम को ज्यादा ट्रांसपरेंट बनाना है.
मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, Central Board of Indirect Taxes and Customs (CBIC) के सदस्य संजय मंगल के मुताबिक, जिन सुधारों के लिए जीएसटी कानून में बदलाव की जरूरत नहीं है, उन्हें 1 नवंबर 2026 से स्टेप-बॉय-स्टेप तरीके से लागू करने का प्लान है. वहीं, जिन बदलावों के लिए कानून में संशोधन जरूरी होगा, उनके लिए 1 अप्रैल 2027 का लक्ष्य रखा गया है. इन सुधारों से छोटे कारोबारियों के लिए रिटर्न भरना आसान हो सकता है, जबकि भविष्य में कुछ टैक्स रिफंड का क्लेम भी तेजी से हो सकेगा.
1 नवंबर से शुरू हो सकते हैं जीएसटी रिफॉर्म
जीएसटी से जुड़े सभी बदलाव एक साथ लागू नहीं होंगे, बल्कि इन्हें अलग-अलग चरणों में लागू किया जाएगा. जिन सुधारों के लिए कानून बदलने की जरूरत नहीं है, उन्हें सिस्टम तैयार होने के बाद लागू किया जाएगा. इनमें कुछ पात्र मामलों में रिफंड को ऑटोमैटिक मंजूरी देने की व्यवस्था भी शामिल है. इसका फायदा भविष्य में दाखिल किए जाने वाले रिफंड क्लेम को मिलेगा. पहले से लंबित रिफंड के मामलों पर यह व्यवस्था लागू नहीं होगी. इससे कारोबारियों को रिफंड के लिए लंबे समय तक इंतजार करने की परेशानी कम करने में मदद मिल सकती है.
जीएसटी काउंसिल ने सालाना 5 करोड़ रुपये से कम टर्नओवर वाले उन कारोबारियों के लिए नई रिटर्न व्यवस्था को मंजूरी दी है, जो केवल ग्राहकों को सीधे सामान या सर्विसेस बेचते हैं. इन्हें B2C सप्लाई कहा जाता है. प्रस्तावित व्यवस्था के तहत पात्र कारोबारियों को साल में एक बार रिटर्न भरना होगा, जबकि टैक्स का भुगतान हर तीन महीने में करना होगा.
इसके अलावा, 5 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाले छोटे कारोबारियों को राहत देने का भी फैसला किया गया है. अगर वे अपनी देय तारीख वाले महीने के भीतर रिटर्न दाखिल कर देते हैं, तो देरी के बावजूद उन पर लेट फीस नहीं लगेगी. हालांकि, नई रिटर्न व्यवस्था और संबंधित प्रावधानों के लागू होने की प्रक्रिया पर ध्यान देना जरूरी होगा.
गिरफ्तारी और नोटिस से जुड़े नियम
जीएसटी के कुछ अहम बदलावों के लिए कानून में संशोधन करना जरूरी है. ऐसे सुधारों के लिए 1 अप्रैल 2027 की तारीख तय की गई है. इनमें गिरफ्तारी से जुड़े कुछ प्रावधानों को हटाना, अभियोजन (प्रॉसिक्यूशन) की लीमिट को रेशनल बनाना और ई-वे बिल के नियमों में बदलाव शामिल हैं. इसके अलावा, कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी करने के लिए 10,000 रुपये की मिनिमम लीमिट तय करने का प्रस्ताव भी है. इन बदलावों का उद्देश्य छोटे मामलों में अनावश्यक कानूनी कार्रवाई कम करना और नियमों को अधिक स्पष्ट बनाना है. हालांकि, पहले से हो चुकी गिरफ्तारियों पर नए नियमों का असर नहीं पड़ेगा. ये बदलाव निर्धारित तारीख से ही लागू होंगे.
फर्जी इनवॉइस पर लगाम
सरकार फर्जी बिलों और गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) लेने के मामलों को रोकने के लिए तकनीक आधारित जांच को मजबूत करने पर भी काम कर रही है. प्रस्तावित बदलावों के तहत सप्लायर की ओर से घोषित टैक्स का भुगतान सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा, ताकि खरीदार को मिलने वाले ITC के दावों में गड़बड़ी की आशंका कम हो.
ध्यान देने वाली बात यह है कि 8 अक्टूबर 2026 को हुई 57वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में टैक्स दरों में बदलाव पर चर्चा नहीं हुई. बैठक का मुख्य फोकस कारोबारियों के लिए अनुपालन आसान करना, ITC से जुड़ी समस्याएं कम करना और रिफंड प्रक्रिया तेज करना था. जीएसटी दरों में बदलाव पर फैसला अगली बैठक में हो सकता है, जिसकी तारीख अभी तय नहीं हुई है.




