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कोहलाकसा वन क्षेत्र में अवैध रेत खनन बेखौफ, चारभाठा-फत्तेगंज में जमा हो रहे पुराने-नए ढेर; जांच से बच रहे जिम्मेदार…

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डोंगरगढ़/राजनांदगांव (दावा)। दक्षिण बोरतलाव वन परिक्षेत्र अंतर्गत कोहलाकसा के जंगलों से रेत का अवैध उत्खनन रुकने का नाम नहीं ले रहा है। बीते दिनों रेत परिवहन करते वाहन पकड़े जाने के बाद भी यह अवैध कारोबार बदस्तूर जारी है। कोहलाकसा जंगल से सटे ग्राम चारभाठा, फत्तेगंज सहित आसपास के गांवों में रेत के पुराने और नए स्टॉक साफ देखे जा सकते हैं। इस रेत को ऐसी जगहों पर छिपाकर डंप किया जा रहा है, ताकि आम नजरों से बचाया जा सके।

जंगल के रास्तों से हो रहा अवैध परिवहन
सूत्रों के अनुसार, चारभाठा और फत्तेगंज से जंगल के भीतर जाने वाले कच्चे रास्तों का उपयोग रेत की अवैध निकासी के लिए किया जा रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि गांवों में भारी मात्रा में जमा की जा रही इस रेत का स्रोत क्या है? यदि वन संपदा का दोहन कर रेत का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है, तो यह वन विभाग की गश्त व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है।
मटेरियल सप्लायरों के स्टॉक में खपाने की चर्चा
मामले में स्थानीय मटेरियल सप्लायरों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। चर्चा है कि जंगलों से निकाली जा रही रेत को सीधे सप्लायरों के ठिकानों पर पहुंचाकर उनके वैध स्टॉक में मिला दिया जाता है, जिससे इसे बाजार में खपाना आसान हो जाता है।

अधिकारी काट रहे फोन, ग्रामीणों में नाराजगी
मामले की वास्तविकता जानने के लिए जब संबंधित वन अधिकारियों से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन उठाना तक मुनासिब नहीं समझा। ग्रामीणों का कहना है कि रेत के अवैध धंधे को लेकर पूर्व में भी कई खबरें सामने आ चुकी हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई कभी नहीं हुई। उल्टे पूर्व में संबंधित अमले ने मीडिया रिपोर्टों को भ्रामक बताकर पल्ला झाड़ लिया था, जबकि धरातल पर आज भी रेत के पुराने और नए ढेर मौजूद हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वन संपदा की इस खुली लूट को रोकने के लिए अब वन विभाग, खनिज विभाग और जिला प्रशासन को संयुक्त रूप से स्वत: संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच व सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

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