चुनाव में हारने पर कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं पर उठाती है सवाल, लोकतंत्र में भरोसा रखना चाहिए – पारख
राजनांदगांव (दावा)। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री खूबचंद पारख ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस जिस राज्य में चुनाव जीतती है, वहां उसे कोई परेशानी नहीं होती, लेकिन जहां हार का सामना करना पड़ता है, वहां वह चुनाव आयोग को कठघरे में खड़ा करने लगती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हार-जीत स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन अपनी पराजय स्वीकार करने के बजाय संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
श्री पारख ने कहा कि बैलेट पेपर की वापसी की मांग करने वाली कांग्रेस को अपने राजनीतिक इतिहास पर भी नजर डालनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के माध्यम से चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने का प्रयास किया गया है। चुनाव परिणामों को लेकर निराधार आरोप लगाने के बजाय कांग्रेस को जनादेश का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने असम के चुनाव में बैलेट पेपर के माध्यम से कांग्रेस को मिली पराजय का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस को इससे सबक लेना चाहिए और अनर्गल आरोपों की राजनीति से बचना चाहिए।
खूबचंद पारख ने कहा की कुछ माह पूर्व जंतर मंतर में कॉकरोच जनता पार्टी के माध्यम से युवाओं ने अपनी बेचैनी को सार्वजनिक प्रश्न बनाया और सत्ता से जवाबदेही की मांग की। लेकिन इसके समानांतर कुछ वीडियो और नारों में व्यक्तिगत, अश्लील तथा अपमानजनक भाषा के प्रयोग की शिकायतें भी सामने आई युवाओं की मांग पर सरकार ने एक्शन लिया और केन्द्रिय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाया गया, पंरतु बाद मे प्रदर्शन में शामिल इजारो युवाओं का क्रिमिनल रिकार्ड के पाए जाने पर सरकार के कान खडे हो गए। श्री पारख ने कहा कि लोकतंत्र में युवाओं को अपनी बात रखने, सरकार से सवाल पूछने और अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने का पूरा अधिकार है। परन्तु विदेशी ताकतो से प्रभावित होकर देश को अस्थिर करने की साजिश के तहत किए गए आंदोलन पर सरकार का कडा रुख अपनाना समय की मर्यादा है।
श्री पारख ने कहा कि किसी भी आंदोलन की सफलता उसकी सोशल मीडिया लोकप्रियता या वायरल वीडियो से नहीं, बल्कि इस बात से तय होनी चाहिए कि वह जनहित के सवालों पर कितना ठोस बदलाव ला पाया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा के बाद छात्रों के जीवन में बदलाव आया या नहीं परंतु चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की अनर्गल मांग उठाने से यह स्पष्ट हो गया कि विपक्ष विदेशी शक्तियां और कॉकरोच जनता पार्टी एक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं । और सब मिलकर देश को अस्थिर करना चाहते है। श्री पारख ने आरोप लगाया कि कांग्रेस लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का विश्वास जीतने के बजाय विरोध-प्रदर्शन और सडक़ की राजनीति के माध्यम से राजनीतिक लाभ हासिल करना चाहती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए संवैधानिक संस्थाओं के प्रति सम्मान और जनादेश के प्रति स्वीकार्यता आवश्यक है। उन्होंने आगे कहा कि देश की स्थिरता, लोकतांत्रिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर राजनीतिक दलों को जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करना चाहिए। किसी भी आंदोलन या विरोध-प्रदर्शन के पीछे विदेशी हस्तक्षेप अथवा आर्थिक सहायता से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। ऐसे गंभीर आरोपों पर तथ्यों और आधिकारिक जांच के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए। श्री पारख ने कहा कि यदि राजनीतिक दल संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर लगातार सवाल उठाते रहेंगे, तो इससे जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा होगी। लोकतंत्र में असहमति का अधिकार सभी को है, लेकिन असहमति के नाम पर संस्थाओं की विश्वसनीयता को कमजोर करने का प्रयास नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज जनता के बीच अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के बजाय संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बना रही है। जनता का विश्वास हासिल करने का रास्ता लोकतांत्रिक प्रक्रिया, जनसेवा और सकारात्मक राजनीति से होकर जाता है, न कि दबाव की राजनीति से। श्री पारख ने कहा कि भारत का लोकतंत्र मजबूत है और देश की एकता, अखंडता तथा संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोई भी कोशिश सफल नहीं होगी। देश की जनता लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखती है और ऐसे किसी भी प्रयास का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देगी।




