Home samachar शादी का झांसा देकर नाबालिग से दुष्कर्म: हाईकोर्ट ने खारिज की आरोपी...

शादी का झांसा देकर नाबालिग से दुष्कर्म: हाईकोर्ट ने खारिज की आरोपी की अपील, पॉक्सो कोर्ट की सजा यथावत…

13

बिलासपुर। नाबालिग को बहला-फुसलाकर भगाने और बार-बार दुष्कर्म करने के मामले में हाईकोर्ट ने दोषी की अपील खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि घटना के समय पीड़िता की उम्र 17 साल 6 महीने थी। ऐसे में यदि वह संबंधों के लिए सहमत भी थी, तब भी उसकी सहमति का कानूनी महत्व नहीं है। जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी की सिंगल बेंच ने अंबिकापुर की विशेष पॉक्सो अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए दोषसिद्धि और सजा बरकरार रखी।

दरअसल, आरोपी पीड़िता का दूर का रिश्तेदार था, जो कुछ समय तक उसके परिवार के घर में रहा था। आरोप है कि इसी दौरान उसने पीड़िता को बहलाकर उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए। परिवार को इसकी जानकारी होने पर उसे घर से निकाल दिया गया। इसके बाद भी वह पीड़िता से मोबाइल फोन पर संपर्क में रहा। 17 जनवरी 2017 को आरोपी पीड़िता को शादी का झांसा देकर अपने साथ ले गया। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज किया। बाद में 29 जनवरी 2017 को पुलिस ने पीड़िता को आरोपी के कब्जे से बरामद किया। पीड़िता ने बयान में आरोप लगाया कि आरोपी उसे अलग-अलग स्थानों पर ले गया और इस दौरान उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया। विरोध करने पर मारपीट और जान से मारने की धमकी भी दी।

आरोपी की ओर से अपील में कहा गया कि जिस स्कूल में पीड़िता ने पहले पढ़ाई की थी, वहां का मूल रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया। आरोपी ने यह भी दावा किया कि दोनों के बीच संबंध सहमति से थे और गवाहों के बयानों में विरोधाभास है। हाईकोर्ट ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने पाया कि पीड़िता के पिता ने स्कूल में दाखिला कराया था और जन्मतिथि 1 जुलाई 1999 दर्ज कराई थी। पांचवीं कक्षा के स्कूल रिकॉर्ड के साथ दसवीं की अंकसूची में भी यही जन्मतिथि दर्ज थी। दसवीं की अंकसूची छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल रायपुर की ओर से जारी की गई थी। कोर्ट ने इसे उम्र साबित करने के लिए विश्वसनीय दस्तावेज माना।

हाईकोर्ट ने कहा कि पीड़िता के बयान की उसके माता-पिता, चाचा और जांच अधिकारी के बयानों से पुष्टि होती है। बचाव पक्ष की जिरह में ऐसा कोई महत्वपूर्ण विरोधाभास सामने नहीं आया, जिससे पीड़िता की गवाही पर संदेह किया जा सके। कोर्ट ने यह भी माना कि आरोपी को पीड़िता की उम्र की जानकारी थी। अंबिकापुर की विशेष पॉक्सो अदालत ने 3 अगस्त 2022 को आरोपी को आईपीसी की धारा 363 के तहत 3 साल, धारा 366 के तहत 5 साल और धारा 376 (2) (n) के 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। साथ ही जुर्माना भी लगाया गया था। सभी सजाएं एक साथ चलाने का आदेश दिया गया था। मामले में हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए आरोपी की अपील खारिज कर दी। आरोपी पहले से जेल में है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here