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CTET-STET देने का मौका मिलेगा या नहीं? NCTE ने शुरू की नियम बदलने की तैयारी

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12वीं के बाद चार साल का इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम (ITEP) चुनने वाले छात्रों के लिए शिक्षक बनने की राह आसान हो सकती है. नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) ने इस कोर्स से ग्रेजुएशन करने वाले उम्मीदवारों को सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (CTET) और स्टेट टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (STET) में शामिल करने की पात्रता पर काम शुरू कर दिया है. इसके लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाई गई है जो मौजूदा टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) के नियमों की समीक्षा करेगी और उनमें जरूरी बदलाव सुझाएगी.

यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि ITEP का पहला बैच 2027-28 के शैक्षणिक सत्र में कोर्स पूरा करेगा. NCTE इस कोर्स को शिक्षक शिक्षा की मान्यता प्राप्त योग्यता मानता है, लेकिन मौजूदा TET गाइडलाइंस में ITEP का नाम स्पष्ट रूप से पात्रता के रास्ते के तौर पर शामिल नहीं है. ऐसे में इस कोर्स को पूरा करने वाले छात्रों के सामने यह सवाल था कि क्या वे CTET और अलग-अलग राज्यों की STET परीक्षाओं में बैठ सकेंगे. अब NCTE ने इस कमी को दूर करने के लिए नियमों की समीक्षा की प्रक्रिया शुरू की है.
ITEP करने वाले छात्रों के लिए क्या बदलने की तैयारी है?
NCTE ने अपने नोटिस में कहा है कि TET परीक्षाओं में शामिल होने की पात्रता के लिए ITEP को भी एक विकल्प के रूप में शामिल करना जरूरी है. इसी उद्देश्य से मौजूदा दिशानिर्देशों में संशोधन की जरूरत पर विचार किया जा रहा है. इसके लिए गठित विशेषज्ञ समिति मौजूदा पात्रता शर्तों का अध्ययन करेगी और यह सुझाव देगी कि चार साल का ITEP पूरा करने वाले योग्य उम्मीदवारों को CTET और STET में शामिल होने का रास्ता कैसे दिया जाए.

समिति का मुख्य काम यह देखना होगा कि ITEP से ग्रेजुएशन करने वाले उम्मीदवारों को TET की पात्रता सूची में किस तरह शामिल किया जा सकता है. इसके साथ ही वह CTET और STET से जुड़े मौजूदा प्रावधानों की भी समीक्षा करेगी. परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारियों से जुड़े नियमों को भी देखा जाएगा. जहां बदलाव की जरूरत होगी, वहां समिति संशोधन की सिफारिश करेगी.
किसकी अध्यक्षता में बनी है विशेषज्ञ समिति?

ITEP छात्रों की CTET और STET पात्रता से जुड़े नियमों की समीक्षा के लिए बनाई गई समिति की अध्यक्षता दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन (CIE) के पूर्व प्रमुख प्रोफेसर चांद किरण सलूजा करेंगे. समिति में शिक्षा और शिक्षक प्रशिक्षण से जुड़े कई प्रमुख संस्थानों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है. इसमें नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT), केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS), शिक्षा मंत्रालय, NCTE और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के प्रतिनिधि शामिल हैं. CBSE की ओर से CTET के निदेशक भी इस समिति का हिस्सा होंगे. समिति मौजूदा नियमों का अध्ययन करने के बाद NCTE को जरूरी संशोधनों की सिफारिश करेगी.
क्या अभी ITEP वाले छात्र CTET-STET दे सकते हैं?
यहां छात्रों के लिए एक जरूरी बात समझना जरूरी है. विशेषज्ञ समिति का गठन होने का मतलब यह नहीं है कि ITEP करने वाले उम्मीदवारों को अभी से CTET या STET में बैठने की पात्रता मिल गई है. फिलहाल NCTE ने नियमों में बदलाव की प्रक्रिया शुरू की है. समिति अपनी सिफारिशें देगी और इसके बाद मौजूदा दिशानिर्देशों में संशोधन किया जाएगा इसलिए ITEP ग्रेजुएट्स की TET पात्रता का अंतिम फैसला संशोधित नियमों के बाद ही स्पष्ट होगा.CTET का आयोजन CBSE करता है जबकि STET परीक्षाएं संबंधित राज्य की अथॉरिटी आयोजित करती हैं. स्कूलों में उन शिक्षण पदों पर नियुक्ति के लिए संबंधित TET पास करना जरूरी होता है जिन पर लागू भर्ती नियमों में इसकी शर्त रखी गई है. इस वजह से ITEP छात्रों के लिए TET की पात्रता तय होना उनके शिक्षक बनने के रास्ते में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

क्या है ITEP, जिसे 12वीं के बाद कर सकते हैं?
इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम यानी ITEP चार साल का एकीकृत शिक्षक शिक्षा कोर्स है. इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत शुरू किया गया है. इस कोर्स में छात्रों को 12वीं के बाद ही दाखिला लेकर चार साल में विषय से जुड़ी पढ़ाई के साथ शिक्षक बनने की प्रोफेशनल ट्रेनिंग भी दी जाती है.पारंपरिक व्यवस्था में छात्र पहले किसी विषय में तीन साल की ग्रेजुएशन करते हैं और उसके बाद दो साल का बीएड कोर्स पूरा करते हैं यानी शिक्षक बनने की इस राह में आमतौर पर कुल पांच साल लगते हैं. इसके मुकाबले ITEP में विषय की पढ़ाई और शिक्षक प्रशिक्षण को एक ही चार साल के कोर्स में शामिल किया गया है. इसका मकसद ऐसे शिक्षक तैयार करना है जिन्हें अपने विषय की जानकारी के साथ पढ़ाने का जरूरी प्रशिक्षण भी मिले.

स्कूल शिक्षा के चारों स्तरों के लिए तैयार किए जाएंगे शिक्षक
ITEP को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्कूल शिक्षा के 5+3+3+4 ढांचे को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. इस व्यवस्था में स्कूल शिक्षा को चार चरणों में बांटा गया है. इनमें फाउंडेशनल, प्रिपरेटरी, मिडिल और सेकेंडरी स्तर शामिल हैं. ITEP का उद्देश्य इन अलग-अलग चरणों की जरूरतों के मुताबिक प्रशिक्षित शिक्षक तैयार करना है.इस कोर्स के जरिए छात्रों को केवल विषय की जानकारी ही नहीं दी जाती, बल्कि उन्हें स्कूलों में पढ़ाने के लिए जरूरी पेशेवर प्रशिक्षण भी दिया जाता है. यही वजह है कि इसके ग्रेजुएट्स को शिक्षक भर्ती और TET की पात्रता से जोड़ने के लिए नियमों में बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही है.

देश के 409 संस्थानों में चल रहा है ITEP
NCTE के नोटिस के मुताबिक फिलहाल देश के 409 हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस (HEIs) को ITEP चलाने की मान्यता मिली हुई है. इन संस्थानों में कुल 777 यूनिट के जरिए 38,850 छात्रों के दाखिले की क्षमता है. ऐसे में इस कोर्स से पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए CTET और STET की पात्रता तय होना आने वाले समय में काफी अहम होगा.पहला बैच 2027-28 के शैक्षणिक सत्र में कोर्स पूरा करेगा. इससे पहले NCTE पात्रता से जुड़े नियमों को संशोधित करने की तैयारी कर रहा है, ताकि कोर्स पूरा करने के बाद छात्रों को शिक्षक बनने की प्रक्रिया में किसी तरह की नियम संबंधी उलझन का सामना न करना पड़े.