इलेक्शन कमीशन ने 6 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में वोटर लिस्ट के स्पेशल समरी रिवीजन यानी एसएसआर की घोषणा कर दी है. इस रिवीजन के तहत अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव, मिजोरम, ओडिशा और सिक्किम की वोटर लिस्ट को अपडेट किया जाएगा. इस रिवीजन का मकसद एलिजिबल वोटर्स के नाम वोटर लिस्ट में शामिल करना है. खास तौर पर यंग वोटर्स और पहली बार वोट देने वाले लोगों को लिस्ट में जोड़ने पर फोकस रहेगा. इसके साथ ही ऐसे लोगों को एडवांस एप्लीकेशन की सुविधा भी मिलेगी, जो 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर 2027 को वोटर बनने के लिए एलिजिबल होंगे.
30 नवंबर को आएगी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट: इलेक्शन कमीशन के अनुसार,, इस प्रोसेस के तहत वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट 30 नवंबर को पब्लिश किया जाएगा. इसके बाद लोग अपने नाम और दूसरी डिटेल्स को चेक कर सकेंगे. जरूरत पड़ने पर क्लेम या ऑब्जेक्शन दाखिल किया जा सकेगा. पूरी प्रोसेस के बाद 21 जनवरी 2027 को फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश की जाएगी.
डुप्लीकेट नाम हटाने से पहले होगा फील्ड वेरिफिकेशन: इलेक्शन कमीशन ने वोटर लिस्ट से नाम हटाने के मामलों में भी सख्त नियम तय किए हैं. अगर किसी वोटर का नाम डुप्लीकेट है या एक से ज्यादा जगह दर्ज है, तो नाम हटाने के लिए फील्ड वेरिफिकेशन जरूरी होगा. आयोग ने साफ किया है कि किसी पोलिंग स्टेशन की कुल वोटर संख्या के 2 प्रतिशत से ज्यादा नाम हटाने का प्रपोजल आता है, तो इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स को खुद मौके पर जाकर जांच करनी होगी. इसके अलावा अगर एक ही ऑब्जेक्टर की तरफ से 5 से ज्यादा ऑब्जेक्शंस दाखिल किए जाते हैं, तब भी इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स को पर्सनली वेरिफिकेशन करना होगा.
आधार नहीं देने पर नहीं कटेगा नाम: इलेक्शन कमीशन ने आधार को लेकर भी बड़ा क्लैरिफिकेशन दिया है. फॉर्म 6 और 8 में आधार की डिटेल देना पूरी तरह वॉलंटरी रहेगा. अगर कोई व्यक्ति अपना आधार डिटेल नहीं देता है, तो सिर्फ इसी वजह से उसका वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने का एप्लीकेशन रिजेक्ट नहीं किया जा सकेगा. पहले से वोटर लिस्ट में दर्ज किसी व्यक्ति का नाम भी सिर्फ आधार डिटेल नहीं देने के कारण डिलीट नहीं किया जाएगा.
पहले 17 राज्यों में किया गया था ऐलान: इलेक्शन कमीशन ने इससे पहले 15 अक्टूबर को 17 राज्यों में वोटर लिस्ट के स्पेशल समरी रिवीजन का ऐलान किया था. इनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर, गोवा और पंजाब जैसे इलेक्शन वाले राज्य भी शामिल हैं. उस समय आयोग ने एक अहम बदलाव भी किया था. पहली बार पॉलिटिकल पार्टियों को वोटर लिस्ट इमेज वाली फाइलों के बजाय ‘रीडेबल पीडीएफ फॉर्मेट’ में उपलब्ध कराने का फैसला किया गया था. इससे पॉलिटिकल पार्टियों के लिए वोटर लिस्ट को पढ़ना और उसमें मौजूद डिटेल्स को चेक करना आसान होगा.
राज्यों को पर्याप्त स्टाफ और रिसोर्सेज जुटाने के निर्देश
इलेक्शन कमीशन ने संबंधित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के चीफ सेक्रेटरीज को भी निर्देश दिए हैं. आयोग ने कहा है कि वोटर लिस्ट के इस पूरे रिवीजन के लिए पर्याप्त स्टाफ और जरूरी रिसोर्सेज उपलब्ध कराए जाएं. इस पूरी एक्सरसाइज का मकसद वोटर लिस्ट को अपडेट करना, नए एलिजिबल वोटर्स को जोड़ना और डुप्लीकेट या गलत एंट्रीज को नियमों के अनुसार हटाना है. इस प्रोसेस के बाद 21 जनवरी 2027 को इन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश की जाएगी.
वोटर लिस्ट के स्पेशल रिवीजन के लिए चुनाव आयोग ने किन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का चयन किया है?
चुनाव आयोग ने अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव, मिजोरम, ओडिशा और सिक्किम में वोटर लिस्ट के स्पेशल समरी रिवीजन की घोषणा की है।
वोटर लिस्ट की ड्राफ्ट कॉपी कब प्रकाशित होगी और फाइनल लिस्ट कब आएगी?
इस प्रक्रिया के तहत वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट 30 नवंबर को प्रकाशित किया जाएगा और सभी जरूरी प्रक्रियाओं के बाद 21 जनवरी 2027 को फाइनल वोटर लिस्ट जारी की जाएगी।
क्या वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने या हटाने के लिए आधार कार्ड देना अनिवार्य है?
नहीं, फॉर्म 6 और 8 में आधार विवरण देना पूरी तरह से स्वैच्छिक है और केवल आधार न देने के कारण किसी का आवेदन खारिज या नाम हटाया नहीं जाएगा।




