जब कोई देश बिना अपनी एक भी मशीन, रॉकेट या टेक्नोलॉजी के अंतरिक्ष की सैर पर निकलता है, तो उसे क्या कहा जाता है? इसे कूटनीति और स्पेस साइंस की भाषा में ‘उधारी की सवारी’ ही कहेंगे! चीन की मदद से अंतरिक्ष का सपना देख रहे पाकिस्तान का ‘स्पेस मिशन’ मजाक बनकर रह गया है. चीन की स्पेस एजेंसी CMSA ने अपने आने वाले Shenzhou-24 मिशन के लिए एक पाकिस्तानी एस्ट्रोनॉट को सिलेक्ट किया है. इसके साथ ही ये एस्ट्रोनॉट चीन के स्पेस स्टेशन ‘तिआंगोंग’ का दौरा करने वाला दुनिया का पहला विदेशी नागरिक बनने जा रहा है. पाकिस्तान इसे ‘अंतरिक्ष क्रांति’ बताकर प्रमोट कर रहा है, लेकिन जब इसके पीछे की जमीनी सच्चाई देखें, तो हंसी छूट जाएगी.
‘टिकट’ चीन का, ‘ड्राइवर’ चीन का, पाकिस्तान बस ‘पैसेंजर’!
सबसे पहले तो ये समझ लीजिए कि पाकिस्तान की अपनी स्पेस एजेंसी ‘सुपारको’ का इस पूरे मिशन में योगदान उतना ही है, जितना किसी लग्जरी कार में पीछे बैठी सवारी का होता है. यानी गाड़ी, ईंधन, ड्राइवर और पूरा नेविगेशन चीन का है, पाकिस्तान को तो बस पीछे की सीट पर बैठाकर स्पेस घुमाया जा रहा है!
कौन जाएगा अंतरिक्ष? पाकिस्तान की ओर से दो पायलटों, जीशान अली और खुर्रम दाऊद को बीजिंग के एस्ट्रोनॉट रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर में महीनों तक कड़ी ट्रेनिंग दी गई है. इनमें से कोई एक मुख्य यात्री बनकर ‘शेनझोउ-24’ से ऊपर जाएगा और दूसरा बैकअप के तौर पर नीचे जमीन पर बैठकर इंतजार करेगा!
क्या काम करेगा पाकिस्तानी एस्ट्रोनॉट? उसे ‘पेलोड स्पेशलिस्ट’ बनाया गया है. आसान भाषा में कहें तो रॉकेट उड़ाने या स्पेस स्टेशन को नेविगेट करने की जिम्मेदारी उसकी बिल्कुल नहीं होगी. वो एक साइंटिफिक पैसेंजर है, जिसका काम सिर्फ चीनी वैज्ञानिकों द्वारा तय किए गए बायो-टेक्नोलॉजी से जुड़े प्रयोगों को संभालना और उनकी देखभाल करना होगा.
चीनी भाषा की पढ़ाई अनिवार्य: अब चूंकि पूरा स्पेस स्टेशन तिआंगोंग चीन का है और वहां सारे कंट्रोल सिस्टम, स्क्रीन और बटन चाइनीज भाषा में हैं, इसलिए बेचारे पाकिस्तानी पायलटों को अंतरिक्ष की ट्रेनिंग से ज्यादा मेहनत ‘मंदारिन’ सीखने में करनी पड़ी है! अगर इमरजेंसी में गलती से गलत बटन दब गया, तो अंतरिक्ष में चाइनीज का अनुवाद करने वाला गूगल ट्रांसलेटर भी काम नहीं करेगा.
जाने के लिए ‘शेनझोउ-24’ और वापसी में ‘शेनझोउ-23’: अनोखी टैक्सी राइड!
चीन ने अपने इस नए पड़ोसी दोस्त के लिए जो ‘ड्रॉप एंड पिक’ का प्लान बनाया है, वो भी बड़ा दिलचस्प है. ये किसी शेयरिंग टैक्सी सर्विस से कम नहीं लग रहा है.
अलग-अलग स्पेसक्राफ्ट से आना-जाना: पाकिस्तानी यात्री ‘शेनझोउ-24’ स्पेसक्राफ्ट से चीन के स्पेस स्टेशन तिआंगोंग पहुंचेगा. वहां करीब एक हफ्ते की छोटी सी मेहमाननवाजी का लुत्फ उठाएगा और फिर पहले से वहां मौजूद ‘शेनझोउ-23’ कैप्सूल के जरिए वापस धरती पर लौट आएगा.
जमीन पर कंगाली, ध्यान आसमान पर: पाकिस्तान में नीचे भले ही बिजली और गैस का संकट गहराया हो, महंगाई का पारा आसमान छू रहा हो और अर्थव्यवस्था IMF की किश्तों पर टिकी हो, लेकिन चीन ने अपने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत पाकिस्तान को अंतरिक्ष की ‘फ्री राइड’ देकर अपना मास्टरस्ट्रोक खेल दिया है.
चांद पर ‘जिन्ना-1’ की तैयारी: बात सिर्फ स्पेस स्टेशन तक सीमित नहीं है, चीन पाकिस्तान का पहला लूनर रोवर ‘जिन्ना-1’ भी चांद पर उतारने की तैयारी कर रहा है. 35 किलो के इस छोटे से रोवर का काम चांद की मिट्टी, प्लाज्मा और रेडिएशन की जांच करना होगा
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तारीख तय नहीं, लेकिन ढिंढोरा पूरा!
अक्सर पाकिस्तानी मंत्रियों की आदत होती है कि काम पूरा होने से पहले ही ढोल बजाने लगते हैं. पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसान इकबाल ने कुछ समय पहले ही सार्वजनिक बयान दे दिया था कि 25 नवंबर को उनका बंदा अंतरिक्ष में उड़ जाएगा!
हालांकि, चीन की स्पेस एजेंसी CMSA ने इस मिशन पर मुहर तो लगा दी, लेकिन न तो लॉन्च की कोई पक्की तारीख दी है और न ही अभी तक दोनों में से उस मुख्य एस्ट्रोनॉट के नाम का ऐलान किया है.
‘ड्रैगन’ का नया मोहरा और पाकिस्तान की खुशी
कूटनीतिक रूप से देखा जाए तो चीन अंतरिक्ष की दौड़ में अमेरिका और रूस को पछाड़ने के लिए हर दांव आजमा रहा है. अमेरिका और रूस जहां 2030 तक चांद पर न्यूक्लियर रिएक्टर बनाने की रेस में हैं, वहीं चीन अपने ‘तिआंगोंग’ स्पेस स्टेशन को इंटरनेशनल हब बनाकर अमेरिका के प्रभाव को चुनौती दे रहा है.
इस पूरी सुपरपावर्स की जंग में पाकिस्तान को बस इतना फायदा मिल गया है कि वो दुनिया के सामने कह सकेगा, ‘हमारा बंदा भी स्पेस घूम आया!’ भले ही वो बंदा चीनी भाषा सीखकर, चीनी रॉकेट में बैठकर और चीनी वैज्ञानिकों के इशारे पर एक हफ्ते की हाजिरी लगाकर वापस क्यों न आया हो!




