कुछ घंटों पहले ही ऐसी खबरें आई थीं कि कतर ने ईरान को मना लिया है और अब अमेरिका के साथ जल्द ही पीस डील हो सकती है. इस खबर के वायरल होते ही अमेरिका ने नया कांड कर दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के स्टेट डिपार्टमेंट ने ‘मुन्नाभाई’ वाला फरमान जारी किया है. अब US ईरान के ‘खजाने’ का पता बताने को ईनाम का लालच दे रहा है. सिर्फ कैश प्राइज ही नहीं अमेरिका ने रीलोकेशन का भी फ्री ऑफर जारी कर दिया है. ये नई चाल ईरान के अधिकारियों और वैज्ञानिकों को देशद्रोह के लिए उकसाने की साजिश है.
ईरान की जासूसी के लिए क्या ईनाम देगा अमेरिका?
ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े गुप्त खजाने, उसके बंकरों और वैज्ञानिकों का राज उगलने वालों के लिए अमेरिका ने अपनी तिजोरी का दरवाजा पूरी तरह खोल दिया है. वॉशिंगटन ने ऐलान किया है कि जो भी व्यक्ति ईरान के न्यूक्लियर नेटवर्क की सटीक जानकारी देगा, उसे लगभग 188 करोड़ रुपए का भारी-भरकम इनाम दिया जाएगा. इतना ही नहीं, अमेरिका ने ये भी लालच दिया है कि जानकारी देने वाले और उसके परिवार को किसी सुरक्षित देश में बसाया जाएगा और नई पहचान के साथ फ्री रीलोकेशन का पूरा इंतजाम होगा.
क्या है अमेरिकी विदेश विभाग का पूरा प्लान?
अमेरिका का ये नया ऐलान सीधे तौर पर उसकी पुरानी आदत का सबूत करता है, जहां वो कूटनीति में नाकाम होने के बाद पैसा लुटाकर जंग जीतने की कोशिश करता है. अमेरिका हार जाने के बाद मुखबिरी और इनाम के दम पर अपना काम साधने की कोशिश करता है.
रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस’ का बड़ा ऑफर: अमेरिकी विदेश विभाग के आधिकारिक ‘रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस’ प्रोग्राम ने इस इनाम का आधिकारिक पोस्टर जारी किया है.
सेंटकॉम ने सोशल मीडिया पर किया शेयर: अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने 6 नवंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस घोषणा को आधिकारिक रूप से साझा करते हुए दुनिया भर के मुखबिरों को आकर्षित करने की कोशिश की.
किन-किन जानकारियों पर मिलेगा इनाम: अमेरिका को सिर्फ ईरान की इमारतों का पता नहीं चाहिए, बल्कि उसकी नजर ईरान के परमाणु ठिकानों, अत्याधुनिक उपकरणों, वहां काम करने वाले वैज्ञानिकों की पहचान और न्यूक्लियर मटीरियल की पल-पल की आवाजाही पर है.
सुरक्षित ठिकाने की गारंटी: अमेरिका जानता है कि ईरान के इस सबसे संवेदनशील राज को उजागर करने वाले की जान को कितना बड़ा खतरा हो सकता है. इसी वजह से इनाम की राशि के साथ-साथ मुखबिरों को दूसरे देश में सुरक्षित रीलोकेशन और नई जिंदगी देने का वादा किया गया है.
यूरेनियम संवर्धन और 60% शुद्धता: क्यों उड़े हुए हैं वॉशिंगटन के होश?
आखिर अमेरिका अचानक इतना आक्रामक क्यों हो गया है और उसे ईरान से इतना डर क्यों लग रहा है? इस पूरी बेचैनी की जड़ में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की वह रिपोर्ट है, जिसने अमेरिका और पश्चिमी देशों की नींद उड़ा रखी है.
60% तक यूरेनियम संवर्धन: IAEA की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान इस समय यूरेनियम को 60 प्रतिशत शुद्धता तक इनरिच कर रहा है. सामान्य नागरिक या नागरिक ऊर्जा जरूरतों के लिए 3 से 5 प्रतिशत संवर्धन ही काफी होता है, जबकि हथियार ग्रेड यूरेनियम के लिए 90 प्रतिशत शुद्धता की जरूरत होती है.
दुनिया का एकमात्र गैर-परमाणु देश: अमेरिकी नोटिस में इस बात पर गहरा तनाव जताया गया है कि ईरान दुनिया का एकमात्र ऐसा गैर-परमाणु हथियार संपन्न देश है, जो इतने हाई-लेवल पर यूरेनियम इनरिच कर रहा है.
कई परमाणु बम बनाने की क्षमता: एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान के पास जमा यूरेनियम का मौजूदा भंडार अगर थोड़ा और संवर्धित कर दिया जाए, तो उससे एक-दो नहीं बल्कि कई परमाणु हथियार आसानी से बनाए जा सकते हैं.
सेंट्रीफ्यूज और गुम होता हिसाब: आईएईए भी बेबस
अमेरिका का दावा है कि ईरान अब अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों और आईएईए के सुरक्षा नियमों को ठेंगा दिखा रहा है. दोनों देशों के बीच जारी तनातनी की वजह से निगरानी व्यवस्था लगभग ठप पड़ चुकी है.
इंफॉर्मेशन फ्लो का खत्म होना: अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, आईएईए के पास अब इस बात का कोई पुख्ता हिसाब-किताब नहीं बचा है कि ईरान के पास कुल कितने सेंट्रीफ्यूज यानी यूरेनियम संवर्धित करने वाली मशीनें हैं और वो कहां बनाए जा रहे हैं.
अंडरग्राउंड बंकरों का राज: ईरान ने अपने कई प्रमुख न्यूक्लियर प्लांट बेहद गहराई में पहाड़ों को काटकर भूमिगत बंकरों में शिफ्ट कर दिए हैं. यही वजह है कि सैटेलाइट और दूरगामी जासूसी के बावजूद अमेरिका इन गुप्त ठिकानों का सटीक विवरण हासिल नहीं कर पा रहा है और अब उसे मुखबिरों की शरण में जाना पड़ रहा है.
अमेरिका की पुरानी आदत: जब-जब नाकाम हुआ, तब-तब रखी ‘सुपारी’!
ईरान के खिलाफ इनामों की ऐसी ‘सुपारी’ का ये कोई पहला मामला नहीं है. वॉशिंगटन लंबे समय से वित्तीय लालच देकर अपने दुश्मनों के नेटवर्क को तोड़ने की रणनीति पर चलता आ रहा है.
2019 में 140 करोड़ का दांव: साल 2019 में अमेरिकी विदेश विभाग ने ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) और उसकी कुद्स फोर्स के वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए 15 मिलियन डॉलर यानी लगभग 140 करोड़ रुपए के इनाम का ऐलान किया था. उस वक्त गैर-कानूनी तेल बिक्री और प्रतिबंधों से बचने वाली शेल कंपनियों की खबरें लीक करने वालों को ये इनाम दिया जाना था.
2024 में पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की सुरक्षा पर इनाम: साल 2024 में अमेरिका ने IRGC सदस्य शाहराम पौरसफी की गिरफ्तारी या सजा कराने वाली जानकारी पर 20 मिलियन डॉलर का इनाम रखा था, जिस पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन की हत्या की साजिश रचने का आरोप था.
ईरान का सीक्रेट खजाना और अमेरिका का नया पैंतरा
ये 188 करोड़ रुपए का इनाम सिर्फ एक आर्थिक घोषणा नहीं है, बल्कि ये इस बात का सबूत है कि अमेरिका अब जासूसी के पारंपरिक तरीकों में पिछड़ रहा है. ईरान का परमाणु कार्यक्रम एक ऐसे मोड़ पर पहुंच चुका है जहां से वो कभी भी परमाणु क्षमता संपन्न राष्ट्र घोषित हो सकता है.
अब देखना ये होगा कि क्या अमेरिका का ये 188 करोड़ रुपए और फ्री रीलोकेशन का ‘सुपारी पैंतरा’ काम कर पाएगा या फिर ईरान अपने सबसे सीक्रेट खजाने और वैज्ञानिकों की सुरक्षा को और तगड़ा बनाकर वॉशिंगटन के इन मनसूबों पर पानी फेर देगा.




