पटना. एनआरसी (NRC), एनपीआर (NPR) और सीएए (CAA) के
मुद्दों को लेकर तमाम विपक्षी पार्टियां पिछले कुछ महीनों से लागातार विरोध
प्रर्दशन कर रहीं थीं लेकिन सत्ता पक्ष का आरोप है कि अचानक विपक्षी दलों
का विरोध प्रर्दशन (protest) लगभग शांत हो गया है. सत्ता पक्ष का कहना है
कि विपक्षी दलों (Opposition) को शायद इस बात का एहसास हो गया है कि अगर अब
इन मुद्दों को अधिक तूल दिया तो पासा उलटा पड़ सकता है. हालांकि समाज का
एक खास तबका आज भी एनआरसी, एनपीआर और सीएए के विरोध में सड़क पर विरोध दर्ज
करा रहा है. वहीं दूसरी ओर विपक्ष की अपनी अलग ही दलील है. कांग्रेस का
कहना है कि ये कानून केवल संख्या बल की वजह से पास हुआ है, और जहां भी हो
सकता है हम अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं.
JDU BJP ने कसा तंज
एनआरसी एनपीआर और सीएए के मुद्दे पर विपक्षी दलों पर खामोशी का आरोप लगाते
हुए सत्ता पक्ष के लोग तंज कस रहे हैं. सत्ता पक्ष के लोगों का कहना है कि
इन लोगों को इस बात का इल्म होने लगा है कि जो बातें फिलहाल अस्तित्व में
ही नहीं हैं उसको लेकर हल्ला बोलना कहीं उल्टा ना पड़ जाए, इसलिए विपक्षी
पार्टियां एनआरसी, एनपीआर और सीएए को लेकर फिलहाल खामोश हो चुकीं हैं, इधर
जेडीयू के लोग भी कहते हैं कि एनआरसी कोई मुद्दा ही नहीं है, विपक्ष बेवजह
इसे हवा दे रहा था लेकिन अब जब विपक्ष को लगने लगा कि असलियत से जनता रूबरू
हो रही है तो अब अपने कदम पीछे खींचना ही विपक्ष ने मुनासिब समझा.
आरजेडी विधायक ने कही ये बात
विपक्षी
पार्टी में से एक आरजेडी के विधायक विजय प्रकाश का कहना है की चूंकि
दिल्ली में चुनाव है और चुनाव में इन लोगों के शीर्ष नेता व्यस्त हैं इसलिए
फिलहाल इस मुद्दे को टाल दिया गया है. जैसे ही दिल्ली में चुनाव खत्म हो
जायेगा हम लोग फिर से इन मुद्दों को लेकर सड़क से संसद और विधानसभा तक
हल्ला बोलेंगे और सरकार को चैन से नहीं बैठने देंगे.
कांग्रेस की ये है दलील
कांग्रेस इन बातों से इत्तेफाक नहीं रखती. कांग्रेस नेता प्रेमचंद्र मिश्रा
कहते है की संसद में हमारी संख्या कम है इसलिए सीएए जैसा कानून संसद के
पटल से पास हो गया. अगर संख्या बल अधिक होता तो यह सीएए कानून का स्वरूप
कभी नहीं ले पाता और हां आज भी हम लोग उन जगहों पर जाकर अपनी आवाज बुलंद कर
रहे हैं जहां एनआरसी, एनपीआर और सीएए को लेकर विरोध प्रर्दशन हो रहा



