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पर्सनल लोन के लिए बैंक कितने साल का इनकम टैक्स रिटर्न मांगते हैं

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लोग पर्सनल लोन के लिए अप्लाई करते हैं. पर्सनल लोन लेने के लिए बैंक आपसे इनकम प्रूफ मांगते हैं, ताकि वे यह सुनिश्चित कर सकें कि आप लोन चुका सकते हैं. नौकरीपेशा लोगों के लिए यह प्रूफ आमतौर पर सैलरी स्लिप और फॉर्म 16 के रूप में होता है, जबकि सेल्फ-एम्प्लॉइड लोगों को इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) जमा करना पड़ता है. लेकिन सवाल यह है कि बैंकों को कितने साल का ITR चाहिए? क्या एक साल का ITR काफी है या दो से तीन साल तक का रिकॉर्ड देना पड़ता है?

सैलरीड कर्मचारियों के लिए
अगर आप किसी कंपनी में काम करते हैं तो आमतौर पर हाल की सैलरी स्लिप्स और फॉर्म 16 ही काफी होते हैं. कुछ बैंकों जैसे SBI को सिर्फ पिछले साल का आईटीआर या फॉर्म 16 चाहिए होता है. अगर आपकी इनकम टैक्स के दायरे में नहीं आती, तो कई बार आईटीआर की जरूरत भी नहीं पड़ती.

सेल्फ-एम्प्लॉयड लोगों के लिए
बैंक आपकी कमाई, बिजनेस की स्थिरता और पेमेंट की क्षमता को आंकने के लिए कम से कम 2 साल के आईटीआर की मांग करते हैं. आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे बैंक अक्सर पिछले 2 सालों के इनकम टैक्स रिटर्न, बैलेंस शीट और ऑडिटेड अकाउंट्स मांगते हैं.

ITR क्यों जरूरी होता है?
बैंक के लिए आईटीआर एक ऐसा दस्तावेज है जो आपकी इनकम, टैक्स भुगतान और फाइनेंशियल स्थिरता को साबित करता है. इससे वे तय करते हैं कि आप लोन की ईएमआई समय पर चुका पाएंगे या नहीं.

क्या सभी बैंक एक जैसे डॉक्युमेंट्स मांगते हैं?
नहीं. हर बैंक की अपनी पॉलिसी होती है और वह लोन के प्रकार और कर्जदार के प्रोफाइल के हिसाब से डॉक्युमेंट्स तय करता है. इसलिए लोन अप्लाई करने से पहले बैंक की गाइडलाइंस जरूर पढ़ें.