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डोंगरगढ़: दबंगों की दबंगाई के चलते ग्राम मुढिय़ा के ग्रामीण गुलामों की जिंदगी जीने मजबूर – मोरध्वज वर्मा…

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0 सामाजिक बहिष्कार के साथ-साथ गांव से भी बहिष्कृत होकर तीन परिवार जिंदगी जीने मजबूर हैं, ० दबंगों ने 2 लाख का दंड नहीं देने पर परिवार को गांव से बहिष्कृत किया – मधुर वर्मा
0 पुन: शिकायत होते ही एसडीएम ने तहसीलदार को जांच अधिकारी बनाया

डोंगरगढ़ (दावा)। डोंगरगढ़ विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत मुढिय़ा में निवासरत अनेक परिवारों को समाज के साथ-साथ गांव से भी बहिष्कृत करने का मामला प्रकाश में आया है। जिसे लेकर पीड़ीत परिवार वर्ष 2019 से न्याय के लिए शासन प्रशासन से लेकर सामाजिक स्तर पर भी प्रयास कर रहा है, किंतु न तो उन परिवारों को शासन की ओर से न्याय मिल पा रहा है न ही सामाजिक स्तर पर न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। देखा जाय तो सभी समाजों में सामाजिक नियम-कायदों के तहत समाज के पदाधिकारी द्वारा निर्णय लिए जाने की परंपरा चले आ रही है। जिस पर शासन प्रशासन की ओर से भी आपसी सामंजस्य बैठने की कोशिश की जाती रही है, लेकिन पीड़ीत तीनों परिवारों को सामाजिक बहिष्कार के अलावा गांव से भी बहिष्कृत करने पर जरूरत से ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्राम मुढिय़ा लोधी बाहुल्य ग्राम है। यही कारण है कि गांव का प्रतिनिधित्व लोधी समाज के व्यक्तियों के हाथों में रहता आ रहा है। जिसके कारण सामाजिक बहिष्कार के साथ-साथ गांव से भी बहिष्कार कर पीड़ित परिवार पर दबाव बनाने की कोशिश किए जाने की जानकारी प्राप्त हुई है। ताकि पीडि़त परिवार सामाज द्वारा निर्धारित किए गए नियमों के दायरे में रहकर समाज के सभी शर्तों को माने।

वर्ष 2019 से समाज व गांव से बहिष्कृत होकर जीवन यापन कर रहे है ग्राम मुढिय़ा का तीन परिवार रसोईया का कार्य करने वाले किसान मोरध्वज वर्मा ने बताया कि 80 वर्षीय बूढी मां और तीन बच्चों का भरापूरा परिवार के साथ वे जीवन यापन कर रहे हैं। गांव से बहिष्कृत होने के कारण बूढी मां को किसी भी धार्मिक अथवा सामाजिक कार्यक्रम में शामिल नहीं कर पा रहे हैं। जिससे उन्हें इस उम्र में मानसिक आघात पहुंचा है। जिसके कारण उनका स्वास्थ्य लगातार गिरता चले जा रहा है। पत्नी का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। ढाई एकड़ का कृषि कार्य पत्नी के साथ मिलकर कर रहे हैं। गांव से कोई भी मजदूर कृषि कार्य हेतु उपलब्ध नहीं होता। रोजगार गारंटी के कार्य में भी पूर्व सरपंच दिनेश वर्मा के कार्यकाल में कार्य नहीं दिया गया था। बच्चों के साथ खेलकूद करने, बातचीत करने से गांव के बच्चों को मना कर दिया गया है। रसोईया का काम ग्राम स्तर पर नहीं दिया जाता। घर के मवेशी चराने का काम स्वयं करना पड़ रहा है। ग्राम प्रमुखों के अनैतिक निर्देश का पालन नहीं करने वाले ग्रामीणों को ग्राम पटेल आत्माराम, ग्राम प्रमुख हीराराम, रघुनाथ एवं पूर्व सरपंच दिनेश वर्मा द्वारा हर स्तर पर प्रताडि़त किया जा रहा है। समय-समय पर परिजनों की पीड़ा से शासन-प्रशासन को अवगत कराते आ रहे है। किंतु सामाजिक और राजनीतिक दबाव के चलते प्रशासनिक स्तर पर न्याय नहीं मिल पा रहा है।

मां की मृत्यु पर बेटे के स्थान पर चचेरे भाई से दाह संस्कार की विधि कराई

2019 से गांव से बहिष्कृत किए गए मधुर वर्मा के पिता को अपनी मां का अंतिम संस्कार करने का मौका नहीं दिया गया। उसके स्थान पर उनके चचेरे भाई से अंतिम संस्कार की विधि पूर्ण कराई गई। 65 वर्षीय बाबूलाल वर्मा सहित पूरा परिवार प्रताडि़त होकर जीवन जीने मजबूर है। चर्चा के दौरान मधुर वर्मा ने बताया कि ग्राम प्रमुखों के अनैतिक कार्यों का विरोध करने पर हमारे ऊपर 2 लाख रुपए का दंड लगाया गया था। दंड की राशि नहीं जमा करने के कारण 2019 से आज तक हमें गांव से बहिष्कृत रखा गया है।

शासन प्रशासन द्वारा सुनवाई नहीं की जा रही – नरेंद्र वर्मा

ग्राम प्रमुखों द्वारा गांव से बहिष्कृत किए गए पीडि़त परिवार के सदस्य नरेंद्र वर्मा ने बताया कि मुझे ग्राम प्रमुख द्वारा बताया गया कि तुम्हें गांव से बहिष्कृत कर दिया गया है। ग्रामीणों से किसी प्रकार का सहयोग नहीं ले सकते। इसके विरुद्ध मैंने उच्च अधिकारियों से शिकायत की थी, लेकिन शासन प्रशासन द्वारा सुनवाई नहीं की जा रही है। इस प्रकार हमारा परिवार आर्थिक तंगी के साथ-साथ प्रताडि़त होकर जीवन यापन करने मजबूर है।

प्रशासन के हस्तक्षेप से बहाल किए गए परिवार को पुन: बहिष्कृत किया दबंगों ने

पीडि़त परिवार के सदस्य मोरध्वज वर्मा द्वारा एसडीम के न्यायालय में पुन: लगाए गए आवेदन में कहा गया है कि गांव प्रमुखों द्वारा प्रशासन द्वारा बनाई गई व्यवस्था के खिलाफ जाकर हमें फिर से बहिष्कृत कर दिया गया है। जिससे पूरे परिवार को मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हमारे साथ कभी भी कुछ भी हो सकता है। ग्राम प्रमुखो द्वारा हमारा जीना मुश्किल कर दिया गया है। शिकायत की निष्पक्ष जांच कर हमें हर स्तर पर न्याय प्रदान किया जाए।

एसडीएम के आदेश पर मामले की जांच करेंगे तहसीलदार

पीड़ीत परिवार के सदस्य मोरध्वज वर्मा द्वारा एसडीम अभिषेक तिवारी के न्यायालय में पुन: आवेदन लगाकर न्याय की गुहार की गई है। जिस पर एसडीएम द्वारा तहसीलदार को जांच की जिम्मेदारी दी गई है।

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