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उत्तराखंड के भीमताल में आयोजित भारतीय विश्वविद्यालय संघ के संगोष्ठी कार्यक्रम में इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो (डॉ) लवली शर्मा हुई शामिल…

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00 शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं के योगदान पर हुई विशेष चर्चा,
00 विभिन्न विषयों पर चर्चा कर यू.जी.सी. को भेजा गया प्रतिवेदन,
00 महिलाओं को जागरूक कर शिक्षित करने पर भी हुई चर्चा,
00 संगीत विश्वविद्यालय की विशेषताओं से कुलपति ने कराया अवगत
(यतेंद्र जीत सिंह “छोटू”)

खैरागढ़ : उत्तराखंड के भीमताल में भारतीय विश्वविद्यालय संघ एवं राय विश्वविद्यालय झारखंड के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी कार्यक्रम में इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो.(डॉ.) लवली शर्मा शामिल हुई। इस दौरान देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विशेष रूप से शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं के योगदान को लेकर विशेष चर्चा की गई। बताया गया कि वर्तमान में देश के 1073 कुलपति के पद में केवल 120 महिला कुलपति कार्यरत हैं, जो केवल 11.18 प्रतिशत ही हैं।। बीते वर्षों की अपेक्षा इस वर्ष महिला कुलपतियों की संख्या में वृद्धि हुई है। इस आंकड़े पर गौर करते हुये चर्चा हुई कि विश्वविद्यालयीन स्तर पर महिलाओं द्वारा प्रतिनिधित्व किया जाना चाहिये।

सर्च कमेटी में महिलाओं को रखे जाने पर हुई चर्चा
इस दौरान सर्च कमेटी में महिला कुलपतियों को भी शामिल करने की बात रखी गई।। उक्त कमेटी में सामान्यतः पुरूष ही होते हैं, जिसके कारण पुरूषों को ही चुना जाता है परंतु कम से कम एक महिला कुलपति को रखे जाने पर चर्चा की गई।।यह भी बताया किया कि कुलपतियों को यह भी ध्यान देना चाहिये कि जो जूनियर एवं योग्य महिलाएं हैं, उन्हें यथा समय, यथा संभव बेहतर अवसर या अच्छे पदों के लिये नामांकित किया जाये ताकि वें शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर कार्य कर सके। एक महिला में कई गुण होते हैं जिनका शैक्षणिक स्तर पर लाभ लिया जाना सरल होता है। कुलपति प्रो.(डॉ.) लवली शर्मा ने अपना पक्ष रखते हुये कहा कि एक महिला जब कुलपति बनती है, तो उसके अंदर वात्सल्य एवं मातृत्व की भावना होती है,उसका लाभ विश्वविद्यालय को मिलता है। उसी मातृत्व भाव से वह विश्वविद्यालय को चलाती है,जैसे परिवार को चलाती हैं। इस दौरान जेंडर अनुपात को ध्यान में रखते हुये थर्ड जेंडर को भी महत्व दिये जाने पर विशेष चर्चा हुई,कि किस तरह उन्हें मुख्य धारा में लाने का प्रयास किया जाना चाहिये। कुलपति प्रो (डॉ) लवली शर्मा ने बताया कि किस तरह हमारे विश्वविद्यालय में गर्भवती महिलाओं के प्रसव हेतु बेहतर वातावरण तैयार किया जा रहा है।सभी कुलपतियों ने इसकी प्रशंसा की।

गोद ग्रामों में संगीत शिक्षा को बढ़ावा देने हो रहे विभिन्न आयोजन
कुलपति प्रो (डॉ) लवली शर्मा ने कार्यक्रम में यह भी बताया कि हमने 5 गांवों को गोद लिया है, जहां के लोगों को संगीत तथा कला के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिये कार्यशाला एवं विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर उन्हें प्रेरित कर रहे हैं।। उक्त कार्य से सभी लोग उत्साहित हुये और कुलपति द्वारा किये जा रहे कार्यों की सराहना की गई।। भविष्य में इस तरह के कार्य किये जाने पर भी सभी ने निर्णय लिया। सभी कुलपतियों ने इस दौरान अपने विचार एवं अनुभव साझा किये और महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।

टेक्नोलॉजी के जमाने में महिलाओं को करें शिक्षित
कुलपति प्रो डॉ लवली शर्मा ने संगोष्ठी में अपने विचार रखते हुये यह भी कहा कि ए.आई. जैसे महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी के जमाने में मशीन से काम लेना चाहिये और लड़कियों तथा महिलाओं को साफ-सफाई जैसे कार्य से मुक्त कर बेहतर शिक्षा अर्जित करने प्रोत्साहित करना चाहिये। इससे वें अपनी क्षमता के अनुरूप कार्य कर पायेंगी।। किस तरह अपने देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लेकर जाना है,इसके लिये कमजोर पक्ष को मजबूत किये जाने को लेकर कुलपति ने अपनी बात रखी।। कुलपति प्रो (डॉ) लवली शर्मा का उद्देश्य रहता है,कि कमजोर पक्ष को मुख्य धारा से जोड़ा जाये।। इस विषय पर भी गंभीरता से मंथन किया गया और यह निर्णय लिया गया,कि बेहतर राष्ट्र निर्माण में कुलपति के पद में रहते हुए हमारी अहम भूमि है।। अंत में कुलपति पद का नाम विशिष्ट लिंगभेद को दर्शाता है, ऐसे में इसका नाम बदलकर कुलगुरू जैसे शब्दों का प्रयोग किये जाने पर भी चर्चा की गई।। दो दिवसीय उक्त संगोष्ठी समारोह में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से पहुंचे कुलपतियों के द्वारा विभिन्न विषयों पर क्रियान्वयन को लेकर चर्चा कर अनुमोदन हेतु विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को प्रतिवेदन भेजा गया।

सांस्कृतिक संध्या में संगीतमय कार्यक्रमों का लिया आनंद
कार्यक्रम के पहले दिन गुरुवार 21 अगस्त की शाम संगीतमय सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया जहां सभी कुलपतियों ने विशेषकर महिला कुलपतियों ने इसका भरपूर आनंद लिया। संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति होने के कारण प्रो.(डॉ.) लवली शर्मा ने सभी कुलपतियों को अपने साथ गाना गाने के साथ ही नृत्य में भी शामिल किया।। सभी कुलपतियों ने नृत्य संगीत में हिस्सा लेकर कार्यक्रम का आनंद लिया। सभी ने अपने साथ एक यादगार पल तथा विशेष जानकारी साथ लेकर गए,जिसमें इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की जानकारी भी शामिल है।

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