Home छत्तीसगढ़ बदहाली के आंसू रो रहा डोंगरगांव के करोड़ों का उद्यान…

बदहाली के आंसू रो रहा डोंगरगांव के करोड़ों का उद्यान…

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करोड़ों का गार्डन बना नशेडियों का अड्डा, फव्वारे बंद और झाडिय़ों में तब्दील हुई हरियाली, बोर्ड तक नसीब नहीं

डोंगरगांव (दावा)। शहर का एकमात्र गार्डन जहां कुछ दिन पहले तक अपने सगे संबंधी और दोस्तों के साथ टहलने, पिकनिक और बहुत से छोटे बड़े आयोजन के लिए चर्चित हुआ, लेकिन चंद महीनों के बाद ही इस उद्यान की दुर्दशा हो गई है और अब यहां गिने चुने लोग ही पहुंचते हैं। गार्डन में सफाई नहीं, लाइट बंद, फव्वारा बंद, झाडिय़ां उग गई, पेड़ पौधे मर रहे हैं। आगामी गर्मी के मौसम में गार्डन की हालत और भी बदत्तर होने की संभावना जताई जा रही है। उद्यान बनने के बाद उद्घाटन के समय भव्य कार्यक्रम करके जनप्रतिनिधियों ने खूब फोटो खिंचवाया और अपने-अपने नाम के पौधे लगाए। उसके बाद से ज्यादातर नेता यहां झांकने तक नहीं गए। वर्तमान में जहां गार्डन उसी मोहल्ले में एक कांग्रेसी पार्षद का निवास है। बावजूद देखरेख का अभाव है और उद्यान अपनी भव्यता खो रहा है। यह बात इसलिए कहना पड़ रहा है कि विधायक दलेश्वर साहू के पिछले कार्यकाल के दौरान इसे बनाया गया था और उस समय जमकर वाहवाही लूटी गई थी, लेकिन आज गार्डन में भारी अव्यवस्था देखने को मिल रहा है। बड़ी बात यह है कि आज तक उद्यान के नाम का बोर्ड तक नहीं लगाया जा सका है। वहीं वर्तमान नगर पंचायत अध्यक्ष के द्वारा भी इस उद्यान के प्रति कोई रुचि नहीं दिखाई है। यदा कदा नगर पंचायत के कर्मचारियों के साथ मिलकर केवल दिखावे के लिए श्रमदान कर सफाई का फोटोग्राफी जरूर करा लिया जाता है।

प्रसाधन की सफाई नहीं, लाइट बंद
करोड़ों रुपये की लागत से बने इस वृहद उद्यान में केवल एक ही प्रसाधन है और वह भी काफी बुरी स्थिति में है। इसे बनाया भी ऐसा गया है कि महिला और पुरुष को एक ही रास्ते से होकर जाना पड़ता है। जिससे महिलाएं असहज महसूस करती हैं। वहीं ज्यादातर लगी शो लाइट, हाई मास्ट, सोलर लाइट भी बंद है और टाईल्स टूटे पड़े हैं। इससे पहले इस समस्या को पहले भी उठाया गया था, लेकिन अब तक कोई सुधार नहीं हुआ।

आकर्षण हुआ खत्म
गार्डन में लगा सुंदर फव्वारा उद्घाटन के समय एक बार ही चालू हुआ था और अबतक बंद है। वहीं सुंदरता के लिए लगाए लाइट और सजावटी समान या तो खराब हो गए है या टूट गए हैं। उद्यान की सुंदरता खत्म हो रही है और नगरवासियों का आना जाना भी धीरे धीरे कम हो गया है. इधर बेसकीमती घास पूरी तरह बर्बाद हो गई। जहां कभी नगरवासी बैठकर सुकून महसूस करते थे। वहां अब झाड़ी उग गई है और घास सूख गई है। वहीं चारों ओर सफाई के अभाव में जंगली झाड़ी और पेड़ से उद्यान भर गया है। एक ऐसा स्थान जहां पेड़ पौधे को बचाने का प्रतीक चिन्ह लगाया गया है, लेकिन उसके अंदर के पौधे को ही नहीं बचाया जा सका है।

नशा और शराब खोरी आ रही शिकायतें
नगर एकमात्र उद्यान जहाँ सभी वर्ग के लोगों का आना जाना लगा रहता है। वहीं अब नशा और शराबखोरी की भी लगातार शिकायतें आ रही है। उद्यान में पड़ेे डिस्पोजल और चिप्स व फल्ली के पैकेट यह बताने के लिए काफी है। बता दें कि कुछ दिनों पूर्व वहां छेडखानी के मामले में बीच बचाव के चलते गार्ड पर धारदार हथियार से हमला भी हो चुका है। लाईटों को प्रारंभ कराया गया था।

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