मानपुर क्षेत्र के विस्थापित परिवारों का वर्षों पुराना इंतजार खत्म, धीरेंद्र बबला साहू बोले- यह सिर्फ मकान नहीं, हमारे संघर्ष की जीत है
डोंगरगढ़ (दावा)। राजनांदगांव और अविभाजित मानपुर जिले में वर्षों तक नक्सल हिंसा, भय और विस्थापन का दंश झेलने वाले परिवारों के जीवन में आखिरकार खुशहाली की नई किरण आई है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह की विशेष पहल पर शासन ने प्रथम चरण में 26 नक्सल पीडि़त परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान स्वीकृत किए हैं।
उल्लेखनीय है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस मुखबिर होने के संदेह में परिजनों की हत्या, धमकियों और निरंतर डर के कारण कई परिवारों को अपना घर-गांव छोडक़र पलायन करना पड़ा था। ये परिवार लंबे समय से असुरक्षा और अनिश्चितता के बीच जीवन यापन करते हुए शासन से पुनर्वास और पक्के आवास की मांग कर रहे थे। नक्सल पीडि़त परिवारों के हक की लड़ाई लड़ रहे नेतृत्वकर्ता धीरेन्द्र बबला साहू ने बताया कि मानपुर जिले में लगभग 100 ऐसे पीडि़त परिवार हैं, जो पुनर्वास की राह देख रहे थे। उन्होंने कहा कि हमने डॉ. रमन सिंह से मिलकर पुनर्वास नीति के तहत उचित कार्रवाई की मांग रखी थी। उनकी विशेष रुचि और पहल के फलस्वरूप आज 26 परिवारों को पक्के आवास का लाभ मिलने लगा है।
सम्मान के साथ जीने का मिला अधिकार
पीडि़त परिवारों ने इस निर्णय पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह सिर्फ ईंट-पत्थरों का मकान नहीं है, बल्कि यह उनके वर्षों के संघर्ष और उपेक्षा के बाद मिले सम्मान की जीत है। अब वे एक सुरक्षित छत के नीचे भयमुक्त जीवन की नई शुरुआत कर सकेंगे। धीरेन्द्र बबला साहू ने इस सफलता के लिए शासन और विधानसभा अध्यक्ष का आभार व्यक्त किया है और शेष परिवारों के लिए भी जल्द आवास मिलने की उम्मीद जताई है।



