(यतेन्द्र जीत सिंह ‘छोटू’ ब्यूरो चीफ)
खैरागढ़/छुईखदान (दावा)। अंचल के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल रानी रश्मि देवी जलाशय (छिंदारी बांध) में बुधवार दोपहर एक बेहद दर्दनाक हादसा हो गया। बांध में नहाने उतरे तीन नाबालिग दोस्तों में से एक 16 वर्षीय बालक गहरे पानी में डूब गया, जिससे उसकी मौत हो गई। मृतक अपने माता-पिता का इकलौता पुत्र था। इस हृदयविदारक घटना के बाद से भाटापारा छुईखदान सहित पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
तैरना नहीं आता था, गहरे पानी में जाने से बिगड़ा संतुलन
प्राप्त जानकारी के अनुसार, छुईखदान के भाटापारा निवासी तीन दोस्त बुधवार दोपहर करीब 1२ बजे घूमने के लिए छिंदारी डेम पहुंचे थे। कुछ देर बाद तीनों जलाशय में नहाने के लिए उतरे। बताया जा रहा है कि तीनों ही बालकों को तैरना नहीं आता था। इसके बावजूद वे नहाते-नहाते लापरवाही वश गहरे पानी की ओर चले गए। इसी बीच अचानक उनका संतुलन बिगड़ गया और वे डूबने लगे। इस दौरान दो बालक किसी तरह संघर्ष करके पानी से बाहर निकल आए, लेकिन उनका साथी लक्ष्य पाल (उम्र 16 वर्ष), पिता संजय पाल (शिक्षक, विवेकानंद स्कूल), गहरे पानी में समा गया।
दोस्त बाहर आए तो मची चीख-पुकार, दुर्ग से बुलाई गई एसडीआरएफ की टीम
पानी से बाहर निकले दोनों युवकों ने बदहवास हालत में आसपास मौजूद राहगीरों और स्थानीय लोगों से मदद मांगी। राहगीरों की सूचना पर छुईखदान पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। पुलिस ने पहले स्थानीय गोताखोरों की मदद से जलाशय में खोजबीन शुरू कराई, लेकिन सफलता नहीं मिली। जलाशय की अत्यधिक गहराई को देखते हुए तत्काल दुर्ग से एसडीआरएफ की विशेष टीम को बुलाया गया। शाम करीब 6 बजे मौके पर पहुंची एसडीआरएफ की गोताखोर टीम ने आधुनिक उपकरणों के साथ पानी में उतरकर महज 10 मिनट के भीतर डूबे हुए बालक लक्ष्य पाल के शव को ढूंढ निकाला।
हादसों का गढ़ बन रहा छिंदारी डेम, नहीं चेत रहे लोग
उल्लेखनीय है कि छिंदारी डेम में डूबने की यह कोई पहली घटना नहीं है। इसके पूर्व भी इसी निश्चित स्थान पर कई जानलेवा हादसे हो चुके हैं। प्रशासन और पुलिस द्वारा लगातार चेतावनी बोर्ड लगाने और सावधानी बरतने की अपील के बावजूद विशेषकर युवा और बच्चे गहरे पानी में उतरने का जोखिम उठा रहे हैं। जिससे बार-बार ऐसे दुखद हादसे सामने आ रहे हैं।
अस्पताल प्रबंधन की संवेदनहीनता- ई-रिक्शा में लानी पड़ी इकलौते बेटे की लाश
इस दर्दनाक हादसे के बाद स्वास्थ्य विभाग की एक बड़ी प्रशासनिक नाकामी और संवेदनहीनता भी उजागर हुई। जिस पाल परिवार के इकलौते कुल का चिराग बुझ गया। उसकी डेड बॉडी को पोस्टमार्टम और अस्पताल ले जाने के लिए कोई शव वाहन (मुक्तांजलि) नसीब नहीं हुआ। परिजनों को मजबूरन बालक के शव को एक ई-रिक्शा में रखकर छिंदारी डेम से छुईखदान अस्पताल लाना पड़ा। इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद हर आंख नम हो गई और लोगों ने स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश व्यक्त करते हुए पूछा कि क्या छुईखदान स्वास्थ्य विभाग के पास एक मुक्तांजलि वाहन तक उपलब्ध नहीं है?



