० बरसात में हादसे की आशंका से सहमे विद्यार्थी और शिक्षक, शासन-प्रशासन की उदासीनता से आक्रोश
० बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा स्कूल, पालकों ने की तत्काल मरम्मत की मांग
प्रशासन को कई बार दी गई सूचना, पर अब तक नतीजा सिफर
स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों का कहना है कि इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार संबंधित विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। शिक्षकों का कहना है कि वे अपनी जिम्मेदारियों का पूरा निर्वहन कर रहे हैं और बच्चे भी पढ़ाई के प्रति उत्साहित हैं, लेकिन सुरक्षा की गारंटी न होने से हर पल डर लगा रहता है। स्थानीय नागरिक एवं अभिभावक ने कहा कि शासन और प्रशासन से हमारी मांग है कि विद्यालय भवन की तत्काल तकनीकी जांच कराकर आवश्यक मरम्मत एवं पुनर्निर्माण कार्य कराया जाए। साथ ही शौचालय की स्थिति को दुरुस्त किया जाए। यदि प्रशासनिक लापरवाही के कारण कोई दुर्घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।
राजनांदगांव। शहर के कन्हारपुरी हायर सेकेंडरी स्कूल की जर्जर हालत नए शिक्षण सत्र 2026-27 के शुरू होते ही चिंता का विषय बन गई है। लगभग 700 छात्र-छात्राओं वाले इस प्रमुख विद्यालय में भवन, शौचालय और मूत्रालय की स्थिति बद से बदतर हो चुकी है। मानसून की दस्तक के बीच छात्र-छात्राएं और शिक्षक भय के साये में अध्ययन-अध्यापन को मजबूर हैं। स्कूल की यह खस्ताहाल व्यवस्था किसी बड़े हादसे को खुला न्योता दे रही है।
दीवारों पर दरारें, छत से झड़ रहा प्लास्टर
नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही स्कूल में नियमित कक्षाएं तो संचालित होने लगी हैं, लेकिन विद्यालय भवन की हालत देखकर छात्र और पालक डरे हुए हैं। जानकारी के अनुसार विद्यालय की कई दीवारों पर गहरी दरारें आ चुकी हैं और छत के हिस्सों से प्लास्टर लगातार झड़ रहा है। बरसात के दिनों में पानी टपकने और सीलन के कारण भवन की मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। किसी भी समय छत या दीवार का कोई हिस्सा गिरने जैसी अप्रिय घटना घटित हो सकती है। जिससे विद्यार्थियों और स्टाफ की सुरक्षा सीधे खतरे में है।
शौचालय बदहाल, छात्राओं को हो रही भारी परेशानी
विद्यालय परिसर में स्थित शौचालय और मूत्रालय की स्थिति भी अत्यंत दयनीय है। साफ-सफाई के अभाव और टूट-फूट के कारण छात्र-छात्राओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विशेष रूप से छात्राओं के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक और मानवाधिकारों के हनन जैसी है। स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं की यह भारी कमी स्कूल के शैक्षणिक वातावरण को भी बुरी तरह प्रभावित कर रही है।


