सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि कॉलेजियम द्वारा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों के चयन की प्रक्रिया न्यायिक समीक्षा के दायरे में नहीं आती. शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि कॉलेजियम की चयन प्रक्रिया सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत भी नहीं आती और इस पर अदालत हस्तक्षेप नहीं कर सकती.
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की अवकाशकालीन पीठ ने हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी अरविंद मल्होत्रा की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की. मल्होत्रा ने आरोप लगाया था कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट कॉलेजियम ने सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश के बावजूद उनके नाम पर उचित ढंग से विचार नहीं किया और हाईकोर्ट के जज पद के लिए उनकी उम्मीदवारी को नजरअंदाज कर दिया.



