सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के नए आंकड़ों और उन्हें तैयार करने की मेथोडोलॉजी पर उठ रहे सवालों का सरकार ने जवाब दिया है. सरकार की ओर से कहा गया है कि आंकड़ों पर आपत्ति है तो उसके पीछे ठोस आधार भी बताया जाना चाहिए. सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव सौरभ गर्ग ने GDP के आंकड़ों का बचाव करते हुए कहा कि इन्हें अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक तैयार किया गया है और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता रखी गई है. उन्होंने कहा कि आलू और टमाटर की तुलना नहीं की जा सकती.
पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग की ओर से GDP मेथोडोलॉजी को लेकर उठाई गई आपत्तियों के बीच सौरभ गर्ग ने कहा कि आंकड़ों से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक है. मंत्रालय ने 64 टेबल भी पब्लिक डोमेन में जारी की हैं. ऐसे में अगर किसी को लगता है कि 7.8% की GDP ग्रोथ ज्यादा या कम है तो उसे यह बताना चाहिए कि किस आंकड़े के आधार पर ऐसा कहा जा रहा है.
सौरभ गर्ग ने कहा कि अलग अलग बेस ईयर पर तैयार किए गए GDP आंकड़ों की सीधे तुलना करना सही नहीं है. उन्होंने इसे समझाने के लिए कहा कि आलू और टमाटर का कंपैरिजन नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि GDP का बेस ईयर रिवाइज किया गया है. इसलिए पुराने बेस ईयर के नंबरों को मौजूदा कीमतों या नई मेथोडोलॉजी से निकले आंकड़ों के साथ सीधे मिलाकर देखना सही तरीका नहीं है. उनके मुताबिक दुनिया में GDP निकालने के लिए जिन बुनियादी और अंतरराष्ट्रीय मानकों का इस्तेमाल किया जाता है, भारत में भी उसी के मुताबिक आंकड़े तैयार किए जाते हैं
सौरभ गर्ग ने कहा कि अगर पिछले 3 साल के आंकड़ों को देखा जाए तो भारत की GDP ग्रोथ लगातार 7% से ज्यादा रही है. उनके मुताबिक भारत लगातार तेज रफ्तार से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है. उन्होंने यह भी कहा कि GDP के आंकड़े तैयार करने में इस्तेमाल होने वाला पूरा डेटा पब्लिक डोमेन में रखा जाता है. नई मेथोडोलॉजी में पुराने GDP नंबरों में मौजूद खामियों को ठीक करने की कोशिश की गई है.
खामी मिले तो मंत्रालय सुधार के लिए तैयार
सौरभ गर्ग ने कहा कि पिछले करीब 6 महीने से मेथोडोलॉजी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. उनका कहना है कि अगर किसी को मेथोडोलॉजी में कोई खामी नजर आती है या उसमें सुधार का सुझाव है तो मंत्रालय उसका स्वागत करेगा. उन्होंने कहा कि GDP के आंकड़ों पर आपत्ति सिर्फ धारणा के आधार पर नहीं होनी चाहिए. अगर आंकड़ों पर सवाल उठाया जाता है तो उसके पीछे ठोस तथ्य, डेटा और स्पष्ट आधार होना जरूरी है.



