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सिविल लाइंस, करोल बाग, केशव पुरम… दिल्‍ली में 56 भवनों की हिल चुकी नींव,

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राजधानी दिल्ली में पढ़ाई और नौकरी के सिलसिले में घर-परिवार छोड़कर आने वाले युवाओं के लिए एक बेहद डराने वाली खबर सामने आई है. जिस PG को आप अपना सेफ ज़ोन समझकर महीनों गुजार देते हैं, कहीं वही इमारत आपके लिए डेंजर ज़ोन तो नहीं बन चुकी? दिल्ली में PG भवनों की सुरक्षा को लेकर किए गए एक विस्तृत सर्वेक्षण में बेहद चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आई हैं. राजधानी के कुल 2,453 PG भवनों की जांच की गई, जिसमें से 4 इमारतें सीधे तौर पर अत्यंत खतरनाक पाई गई हैं. इन 4 जर्जर इमारतों में 89 लोगों की जान सीधे जोखिम में है. यही नहीं, 85 इमारतें ऐसी मिली हैं जो संभावित रूप से बेहद कमजोर हैं. सिविल लाइंस, करोल बाग, केशव पुरम और नजफगढ़ में भी कमजोर इमारतें मिली. अगर आप भी साउथ दिल्ली या सिविल लाइंस में PG में रह रहे हैं, तो यह रिपोर्ट आपके रोंगटे खड़े करने के लिए काफी है.
56 भवनों की नींव ही हिल चुकी
सर्वे में सबसे ज्यादा खौफनाक और चिंताजनक आंकड़े दक्षिण जोन (South Zone) से सामने आए हैं. यहाँ के EE/B/II/SZ डिवीजन के अंतर्गत आने वाले सभी 56 PG भवन G+4 से ज्यादा ऊंची इमारतों की श्रेणी में आते हैं और इन सभी को ‘संभावित कमजोर’ (Vulnerable) घोषित किया गया है. अकेले इन 56 इमारतों के भीतर 2,162 छात्र और वर्किंग प्रोफेशनल्स अपनी जान हथेली पर रखकर रह रहे हैं. इसके अलावा, सर्वे में जिन 4 अति-खतरनाक भवनों की पहचान की गई है, उनमें से 3 अकेले दक्षिण जोन में ही हैं, जहाँ 69 लोग हर पल खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं.

121 भवनों को तुरंत मरम्मत की जरूरत

छात्रों के सबसे बड़े हब माने जाने वाले सिविल लाइंस (Civil Lines Zone) की स्थिति भी बेहद नाजुक बनी हुई है. यहाँ जांच किए गए 608 PG भवनों में से अकेले 64 इमारतों की हालत खस्ता पाई गई है. इनमें 38 इमारतों को मामूली, तो 26 इमारतों को ‘बड़ी मरम्मत’ (Major Repair) की सख्त जरूरत है.
कमोबेश यही हाल करोल बाग, केशव पुरम और नजफगढ़ जैसे इलाकों का भी है:
• करोल बाग: 365 में से 6 भवनों में मरम्मत की दरकार है और 6 इमारतें कमजोर पाई गई हैं.
• केशव पुरम: 321 भवनों के सर्वे में 1 इमारत अत्यंत खतरनाक पाई गई, जिसमें 20 लोग रह रहे हैं.
• नजफगढ़: 106 में से 12 भवनों में तुरंत मरम्मत कार्य की जरूरत पाई गई है.
85 इमारतों पर एक्शन होना तय
हालाँकि राहत की बात यह है कि कुल 2,453 में से करीब 95.5% यानी 2,342 PG भवन विजुअल जांच में सुरक्षित पाए गए हैं. रोहिणी और सेंट्रल जोन जैसे क्षेत्रों में स्थिति काफी बेहतर मिली है. लेकिन जिन 85 इमारतों को संभावित कमजोर श्रेणी में रखा गया है, वे आने वाले दिनों में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं. प्रशासन अब सबसे पहले उन 4 खतरनाक इमारतों में रहने वाले 89 लोगों की सुरक्षा के लिए अस्थायी शिफ्टिंग (Temporary Relocation) और सख्त कदम उठाने की तैयारी में है. इसके बाद सभी 85 कमजोर इमारतों की विस्तृत तकनीकी और इंजीनियरिंग जांच (Detailed Engineering Audit) कराई जाएगी.