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सीमेंट के दाम 300 के पार, भवन निर्माण कार्य प्रभावित

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ट्रांसपोर्टरों की आड़ में सीमेंट कम्पनियों ने किया दाम में इजाफा

राजनांदगांव(दावा)। डीजल-पेट्रोल के दामों में वृद्धि होने से ट्रांसपोर्टरों ने माल भाड़ा के दाम क्या बढ़ाए कि सीमेंट कम्पनियों की चांदी हो गई। सीमेंट कम्पनियों ने समय का लाभ उठाते हुए सीमेंट के दाम में इतने इजाफा कर दिये कि महंगाई के जमाने में ग्राहकों की कमर टूट रही है। अंबुजा, जे.के. लक्ष्मी, अल्ट्राटेक, बिडला आदि कम्पनियों की जो सीमेंट 240-245 रू. में मिलती थी, उसके दाम 300 रूपये से अधिक बढ़ा दिये हैं। दाम बढऩे से भवन निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे है। साथ ही सीमेंट की कालाबाजारी भी हो रही है।


ज्ञात हो कि माल भाड़े को लेकर ट्रांसपोर्टरों ने 26 फरवरी से हड़ताल कर दी थी। इसके चलते किसी भी सीमेंट कम्पनी से माल का परिवहन नहीं हो रहा था। अभाव की स्थिति बनी रहने से बाजार से सीमेंट पूरी तरह गायब हो गई थी। दूसरे राज्यों से सीमेंट यहां लोकर बेचा जा रहा है। शासन के प्रयासों से ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल समझौते के बाद समाप्त हो गई। इससे दस सीमेन्ट कम्पनी नया भाड़ा देने राजी हुई, लेकिन ट्रांसपोर्टरों द्वारा माल भाड़े के लिए 12 प्रतिशत भाड़ा बढ़ाया गया, उसका पूरा भार अब ग्राहकों पर आ गया है। कम्पनियों ने प्रति बोरी सीमेन्ट के दाम बढ़ा दिये है। ऐसा किये जाने से बाजार में सीमेन्ट के दाम तीन सौ से पार हो गया है।
जानकारों की माने तो इससे पहले 2012 व 2015 में सीमेन्ट की कीमत 300 रूपये तक पहुंच गई थी। शहर में विगत 15 दिनों से सीमेन्ट की आवक ठप होने से सीमेन्ट ब्लैक में बेची जा रही है। 245-250 रू. की सीमेन्ट 300 रूपये में बिक रही है। यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में सीमेंट 350 रूपये में बिकेगी। स्थानीय सीमेन्ट के व्यवसायी बता रहे हैं कि ट्रासपोर्टर 40 प्रतिशत भाड़ा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।


सीमेंट के कारोबार से जुड़े लोगों की माने तो ट्रांसपोर्टरों ने जो भाड़ा बढ़ाया है, वह महज सीमेन्ट उठाने का नहीं, बल्कि प्लांटों में जो कोयला फ्लाई एश, बारदाना और अन्य रॉ-मटेरियल आता है, उस पर भी भाड़ा 12 प्रतिशत बढ़ा है। इस सबका औसत निकाल कर भाड़ा बढ़ाया गया है। कहा जा रहा है कि ट्रासपोर्टरों की हड़ताल के चलते 23 दिनों तक प्लाट में काम न होने के कारण घाटा हुआ है, उसकी भी भरपाई करने के लिए सीमेन्ट की कीमत में इजाफा किया गया है। बहरहाल जिले में सीमेन्ट की आवक नहीं होने से जिले भर में भवन निर्माण का कार्य भी प्रभावित हो रहा है। सीमेन्ट की आपूर्ति ठप होने से छड़ का भी उठाव नहीं हो पा रहा। इससे सीमेन्ट व छड़ के व्यवसायियोंं सहित ग्राहकों को परेशानी उसकी पड़ रही है।

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