18 जनवरी के बाद से नहीं बैठी समिति; अस्पताल प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
दवाईयों की किल्लत और बदहाल सुविधाओं के बीच चर्चा के लिए कोई मंच नहीं, अंचलवासियों में भारी असंतोष
छुरिया (दावा)। ब्लॉक मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) छुरिया में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त रखने और मरीजों की बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए गठित जनभागीदारी समिति ‘जीवनदीप समिति’ की बैठक पिछले आठ महीनों से अधर में लटकी हुई है। अस्पताल में अंतिम बार यह बैठक 18 जनवरी को आयोजित की गई थी, जिसके बाद से अब तक जिम्मेदार अधिकारियों ने दोबारा समीक्षा बैठक बुलाने की सुध नहीं ली है। अंचल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में लगातार आठ माह तक बैठक न होना प्रशासनिक लापरवाही को उजागर कर रहा है, जिससे स्थानीय नागरिकों और मरीजों में गहरा रोष व्याप्त है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा कर अधिकारी बैठक नहीं बुला रहे है।
बदहाल व्यवस्थाओं के बीच
सुध लेने वाला कोई नहीं
छुरिया का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आए दिन किसी न किसी अव्यवस्था को लेकर सुर्खियों में रहता है। अस्पताल में कभी जरूरी जीवनरक्षक दवाइयों की अनुपलब्धता, कभी विशेषज्ञ चिकित्सकों व जांच व्यवस्था की कमी, तो कभी भर्ती मरीजों को मिलने वाले भोजन, स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं। जीवनदीप समिति का मुख्य उद्देश्य अस्पताल के सुचारू संचालन, स्थानीय स्तर पर मिलने वाले राजस्व के सही उपयोग और जनहित से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का त्वरित निराकरण करना है। जब समिति की नियमित बैठक ही नहीं होगी, तो इन अव्यवस्थाओं की निगरानी और अस्पताल के विकास पर निर्णय किस प्रकार लिए जाएंगे?
जनहित से जुड़े वे अहम सवाल, जिनका जवाब मांग रही जनता-
आठ महीने से बैठक क्यों नहीं हुई? प्रशासनिक स्तर पर इस लंबी अनदेखी का जिम्मेदार कौन है? मरीजों की समस्याओं पर चर्चा कहां होगी? जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों के सुझाव साझा करने का एकमात्र आधिकारिक मंच बंद क्यों पड़ा है? निगरानी और फंड का उपयोग कैसे? समिति के माध्यम से होने वाले संधारण और रोगी कल्याण कार्यों की समीक्षा कौन कर रहा है? क्या स्वास्थ्य विभाग लेगा संज्ञान? क्या उच्चाधिकारी इस सुस्ती को तोडक़र व्यवस्था सुधारने की पहल करेंगे? स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्धजनों का स्पष्ट कहना है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दूर-दराज के दर्जनों गांवों की स्वास्थ्य जीवनरेखा है। अस्पताल की बदहाली दूर करने, पारदर्शी व्यवस्था बनाने और मरीजों को सुलभ इलाज मुहैया कराने के लिए जल्द से जल्द जीवनदीप समिति की साधारण सभा आयोजित की जानी चाहिए, ताकि जनहित से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर ठोस निर्णय लिए जा सकें।




