0 भक्तिमय वातावरण के मध्य मां बम्लेश्वरी और आंगा देव का हुआ मिलन
0 राज परिवार के वरिष्ठ सदस्य राजकुमार भवानी बहादुर सिंह सपरिवार पहुंचे आदिवासी समाज के साथ
डोंगरगढ़ (दावा)। छत्तीसगढ़ प्रदेश की प्रसिद्ध धार्मिक नगरी डोंगरगढ़ में मां बम्लेश्वरी मंदिर की पंचमी भेंट इस बार आस्था, आदिवासी परंपरा और आपसी एकता की मिसाल बनकर सामने आई. बस्तर से 15 आंगादेव और डांग लेकर पहुंचे आदिवासी समाज ने पूरे पारंपरिक विधि-विधान के साथ पंचमी भेंट की रस्म निभाई। इस बार मां बम्लेश्वरी के नाम की नई डांग भी तैयार की गई थी, जो यात्रा का विशेष आकर्षण रही। आग़ा देव के साथ आदिवासी समाज का नेतृत्व कर रहे राज परिवार के सदस्य राजकुमार भवानी बहादुर सिंह सपरिवार पत्नी व युवराज को लेकर माता के दरबार में पहुंचे थे।
राज परिवार के वरिष्ठ सदस्य राजकुमार भवानी बहादुर सिंह के कुशल नेतृत्व में गोंड समाज और मां बम्लेश्वरी मंदिर ट्रस्ट समिति के मध्य जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में नवरात्र प्रारंभ होने के पूर्व आपसी सहयोग व धार्मिक सद्भाव बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। जो पंचमी भेंट के दौरान देखने को मिला। जिला प्रशासन और पुलिस की निगरानी में पूरा कार्यक्रम बिना किसी विवाद के संपन्न हुआ. पिछले आयोजनों में पूजा पद्धति और मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश को लेकर सामने आए मतभेदों के बीच इस बार की पंचमी भेंट का शांतिपूर्वक संपन्न होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लाल निवास से शुरू हुई पूजा-अर्चना
पंचमी भेंट कार्यक्रम की शुरुआत दोपहर करीब तीन बजे खैरागढ़ राजपरिवार के डोंगरगढ़ स्थित राजमहल लाल निवास से हुई। आदिवासी समाज ने अपनी परंपरा के अनुसार विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके बाद शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में स्थित देवी-देवताओं के स्थानों पर पहुंचकर पूजा की गई।इस दौरान बस्तर से आए आंगादेव का भी स्वागत किया गया. पूजा-अर्चना की रस्में पूरी होने के बाद पंचमी भेंट यात्रा शुरू हुई।पारंपरिक वेशभूषा, धार्मिक आस्था और समाज की रीति-रिवाजों के साथ निकली इस यात्रा ने शहर में उत्सव का माहौल बना दिया। यात्रा में शामिल लोगों के साथ स्थानीय नागरिकों और माता के दरबार में बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भी इस पारंपरिक आयोजन को देखा और उसका आनंद लिया।
बूढ़ादेव गुफा से मां बम्लेश्वरी मंदिर तक पहुंची यात्रा
पंचमी भेंट यात्रा सबसे पहले छीरपानी स्थित प्राचीन बूढ़ादेव गुफा पहुंची. यहां पूजा-अर्चना के बाद यात्रा आगे बढ़ी. इसके बाद मेला ग्राउंड होते हुए यात्रा नीचे स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर प्रांगण पहुंची, जहां मंदिर ट्रस्ट समिति ने यात्रा का स्वागत किया। बस्तर से 15 आंगादेव का पहुंचना इस बार के आयोजन की प्रमुख विशेषताओं में शामिल रहा। इसके साथ मां बम्लेश्वरी के नाम की नई डांग भी तैयार की गई थी।(आदिवासी परंपरा का प्रतीक चिन्ह/दंड) आदिवासी समाज की धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक पूजा पद्धति से जुड़ी इस यात्रा में आंगादेव और डांग की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष स्वरूप दिया. गोंड समाज के लिए पंचमी भेंट सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि पूर्वजों से चली आ रही परंपरा को आगे बढ़ाने का अवसर भी है. इस आयोजन के जरिए समाज अपनी मान्यताओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाता है.
मां बमलेश्वरी मंदिर ट्रस्ट समिति के अध्यक्ष बोले- पारंपरिक यात्रा का स्वागत करते रहेंगे
मां बम्लेश्वरी मंदिर ट्रस्ट समिति के अध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने पंचमी भेंट यात्रा के स्वागत और आयोजन पर प्रसन्नता जताई. उन्होंने कहा कि पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे आदिवासी समाज के लोगों की यात्रा का सभी ने उत्साह के साथ आनंद लिया. हजारों लोगों की मौजूदगी ने इस पर्व की रौनक बढ़ाई,मनोज अग्रवाल ने कहा कि देवी के भक्तों और पारंपरिक आयोजनों का स्वागत किया जाता रहा है और आगे भी किया जाता रहेगा. उनके मुताबिक, इस तरह के आयोजन धार्मिक आस्था के साथ समाज की संस्कृति को भी सामने लाते हैं।
राजकुमार भवानी बहादुर सिंह ने सभी पक्षों को दिया श्रेय
खैरागढ़ राजपरिवार के वरिष्ठ सदस्य राजकुमार भवानी बहादुर सिंह ने आयोजन को सफल बनाने के लिए गोंड समाज, मंदिर ट्रस्ट समिति और जिला प्रशासन के सहयोग की सराहना की. उन्होंने कहा कि उनका परिवार सभी समाजों को साथ लेकर चलने में विश्वास करता है. पिछले आयोजनों के दौरान जो बातें विवाद का कारण बनीं, उन्हें आगे बढ़ाने के बजाय आपसी बातचीत और सहयोग से समाधान निकालना जरूरी है,भवानी बहादुर सिंह ने मंदिर ट्रस्ट समिति के अध्यक्ष मनोज अग्रवाल और ट्रस्ट के सदस्यों का धन्यवाद दिया।उन्होंने गोंड समाज के लोगों और संतोष पडोती के सहयोग की भी सराहना की।उन्होंने कहा कि इस आयोजन से यह संदेश गया है कि सभी समाज मिलकर अपनी धार्मिक परंपराओं का निर्वहन कर सकते हैं और आपसी मतभेदों को बातचीत से दूर किया जा सकता है। श्री सिंह ने कहा कि मां की नजर में सभी बराबर हैं और समाज के लोगों को भी इसी भावना के साथ आगे बढऩा चाहिए. डोंगरगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में आपसी भाईचारा और सौहार्द बना रहे, यही उनकी कामना है.
पंचमी भेंट यात्रा को निर्विवाद तरीके से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन पहले से सतर्क था. राजपरिवार, गोंड समाज और मंदिर ट्रस्ट समिति के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए कार्ययोजना बनाई गई थी. पुलिस प्रशासन ने भी शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैयारी की थी. राजनांदगांव के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर ने बताया कि जिला प्रशासन और पुलिस ने पहले से आयोजन को लेकर तैयारी की थी. सभी पक्षों के सहयोग से मां बम्लेश्वरी की पूजा शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और आपसी सामंजस्य के साथ संपन्न हुई. उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में भी इसी तरह मिल-जुलकर पूजा और धार्मिक आयोजन होते रहेंगे।




