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रूस से रोजाना 28.62 करोड़ लीटर तेल खरीदेगा भारत, एक खेप से दिल्ली में 40 दिन चलेगा ईंधन

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूसी तेल की खरीद पर लागू प्रतिबंधों में ढील दिए जाने से भारत की सबसे बड़े टेंशन खत्म हो गई. अनुमान है कि इस ढील का फायदा उठाने के लिए रूस से रोजाना 18 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदने की तैयारी है. इसे लीटर में देखा जाए तो यह करीब 28.62 करोड़ लीटर तेल होगा. इस एक खेप से दिल्ली जैसे सबसे बड़ी आबादी वाले शहर में ईंधन की जरूरतों को 40 दिनों तक पूरा किया जा सकेगा.
एक बैरल में करीब 159 लीटर तेल होता है और भारत अभी रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है. ट्रंप ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट’ के तहत आने वाली पाबंदियों और शुल्क को खत्म कर दिया है. वैसे तो यह छूट केवल भारत के लिए नहीं है और इससे चीन को भी लाभ मिल सकता है, लेकिन भारत अभी रूसी तेल का सबसे बड़ा आयातक देश है तो उसे इस छूट का सबसे ज्यादा लाभ मिल सकता है.
कितना तेल खरीदता है भारत
जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाले आंकड़ों से पता चलता है कि भारत इस साल औसतन 18 लाख बैरल प्रतिदिन (बीपीडी) के साथ समुद्री मार्ग से रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक रहा है, जो चीन (12 लाख बीपीडी) से अधिक है. इसके बाद इटली, तुर्किये और नीदरलैंड जैसे देश आते हैं. ऊर्जा शोध संस्था केपलर को उम्मीद है कि अक्टूबर में आयात 18-19 लाख बीपीडी के आसपास बना रहेगा. हालांकि, यह मात्रा साल के मध्य के उच्चतम स्तरों से काफी कम है. भारत ने जून में रूस से 26 लाख बीपीडी और जुलाई में 25.7 लाख बीपीडी का रिकॉर्ड तेल आयात किया था.
भारतीय रिफाइनरियों को बड़ा फायदा
एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की मुख्य अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा ने कहा कि अमेरिका के नए विधेयक के तहत भारत को 100 फीसदी तक के संभावित शुल्कों का सामना करना पड़ रहा था, क्योंकि वह रूसी तेल के शीर्ष पांच वैश्विक खरीदारों में शामिल है. लेकिन, इस छूट के साथ तेल रिफाइनरी कंपनियों द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद जारी रखने की संभावना और बढ़ेगी. हालांकि, अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद ट्रंप का रुख बदल सकता है. लिहाजा भारतीय रिफाइनरी कंपनियां अपनी इन्वेंटरी बढ़ाने पर जोर दे सकती हैं.
एक खेप में कितने दिन का खर्चा
दिल्ली में ईंधन की खपत रोजाना करीब 72 लाख लीटर है और भारत का एक दिन का रूस से आयात 28.62 करोड़ लीटर के आसपास है. इस लिहाज से एक दिन की खेप से दिल्ली जैसे शहर की 40 दिन की ईंधन जरूरतों को पूरा किया जा सकता है. अनुमान है कि दिल्ली में रोजाना करीब 34.7 लाख लीटर पेट्रोल की और 37.7 लाख लीटर डीजल की खपत होती है. अगर भारतीय कंपनियां अपना आयात बढ़ाती हैं तो रूस से आने वाले तेल से देश के पास बड़ा भंडार बनाया जा सकेगा.