भारत-अमेरिका ट्रेड डील किस मोड़ पर है? पेच कहां फंसा हुआ है? और कितना वक्त लगेगा? इन सभी सवालों का जवाब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने दिया है. Network18 के एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी से एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील का ऐलान होने में अब कितना वक्त बाकी है, तो मार्को रूबियो ने साफ-साफ कहा कि कुछ टेक्निकल चीजों पर काम हो रहा है. महीनों नहीं, बल्कि हफ्तों में इसका ऐलान हो जाएगा.
मार्को रूबियो ने कहा कि ऐसे समझौतों में यह जरूरी होता है कि घोषणा करने से पहले उसके हर पहलू पर दोनों देशों के बीच पूरी सहमति बन जाए. उन्होंने कहा, आप इस स्तर के बड़े रिश्ते को इस तरह खतरे में नहीं डाल सकते कि किसी समझौते की घोषणा कर दी जाए और बाद में पता चले कि उसे अंतिम रूप ही नहीं दिया गया था.
कुछ टेक्निकल पहलुओं पर काम बाकी
मार्को रूबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील बेहद करीब है. अब कुछ तकनीकी पहलुओं पर काम किया जाना बाकी है. उन्होंने कहा, तकनीकी पहलू भी मायने रखते हैं, क्योंकि समझौते में सहमति होना जरूरी है और दोनों पक्षों को इस बात पर सहमत होना चाहिए कि उसमें लिखी गई भाषा का अर्थ दोनों के लिए एक ही है. अब बातचीत इसी स्तर पर पहुंच गई है. हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि वे कौन-से तकनीकी पहलू हैं, जिन पर दोनों देशों के बीच सहमति बननी बाकी है. उन्होंने यह भी नहीं बताया कि समझौते की घोषणा किस तारीख को होगी.
महीनों नहीं, कुछ हफ्तों में डील की उम्मीद
मार्को रूबियो ने साफ किया कि वह खुद इस ट्रेड डील पर बातचीत नहीं कर रहे हैं. अमेरिका के ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव इसे डील कर रहे हैं. हालांकि, उन्होंने कहा कि वह इस पूरी प्रक्रिया पर करीब से नजर रख रहे हैं. रूबियो ने कहा, मुझे पता है और मैं इस पूरी प्रक्रिया पर करीब से नजर रखता रहा हूं. हमें उम्मीद है कि यह समझौता महीनों में नहीं, बल्कि कुछ ही हफ्तों में सामने आ जाएगा. उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच बातचीत अंतिम चरण के करीब है. हालांकि, समझौते की घोषणा से पहले सभी तकनीकी पहलुओं पर सहमति बनना जरूरी है.
दोनों देशों के लिए फायदेमंद होनी चाहिए डील
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि भारत के साथ व्यापार समझौते को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने के लिए जरूरी है कि वह दोनों देशों के हित में हो. उन्होंने यह भी माना कि समझौते की हर बात किसी एक पक्ष को पसंद आए, यह जरूरी नहीं है. इस समझौते में कुछ ऐसी बातें भी होंगी, जो आपको पसंद नहीं आएंगी. लेकिन समझौते का बड़ा हिस्सा आपके लिए फायदेमंद होगा. हमारा लक्ष्य भी यही हासिल करना है.उन्होंने कहा कि वह इस समझौते के पूरा होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि भारत और अमेरिका के पास मिलकर काम करने के कई अवसर हैं.
क्या भारत को दूसरे देशों से बेहतर ट्रेड रेट मिलेंगे?
इंटरव्यू के दौरान राहुल जोशी ने रूबियो से यह भी पूछा कि क्या भारत को दूसरे देशों के मुकाबले बेहतर ट्रेड रेट मिलने की उम्मीद है? इस पर अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि किसी भी व्यापार समझौते का मकसद मौजूदा दरों से बेहतर दरें हासिल करना होता है. लेकिन उनके मुताबिक, इससे भी ज्यादा जरूरी यह है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्ता लंबे समय तक टिकाऊ बना रहे.
मार्को रूबियो ने कहा, जाहिर है, समझौता करने का मकसद ही यही होता है कि आपको मौजूदा दरों से बेहतर दरें मिलें. लेकिन इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण यह सुनिश्चित करना है कि हमारा व्यापारिक रिश्ता टिकाऊ तरीके से आगे बढ़े. हालांकि, रूबियो ने यह स्पष्ट नहीं किया कि भारत को किन उत्पादों पर कितनी दरों का फायदा मिल सकता है. उन्होंने दूसरे देशों की तुलना में भारत को मिलने वाली संभावित रियायतों का कोई आंकड़ा भी नहीं दिया.
भारत और अमेरिका, दोनों अपने हितों के लिए लड़ेंगे




