देश की राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में निर्माण और ध्वस्तीकरण (construction and demolition) पर लॉकडाउन लगने वाला है. 5 नवंबर से 20 नवंबर 2026 तक दिल्ली-एनसीआर में कंस्ट्रक्शन और डेमोलिशन पर कंप्लीट बैन रहेगा. इसका मतलब हुआ कंस्ट्रक्शन और डेमोलिशन से जुड़ी एक्टिविटीज पर लॉकडाउन. विंटर एक्शन प्लान के तहत यह फैसला लिया गया है. बता दें कि सर्दियों का मौसम आते ही दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण की स्थिति काफी खराब हो जाती है.
दरअसल, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में बढ़ते वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने 5 नवंबर से 20 नवंबर तक निर्माण और तोड़फोड़ (सीएंडडी) गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है. केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने यह जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि दिल्ली सरकार के गैर-दिल्ली रजिस्टर्ड BS-IV और इससे नीचे के वाहनों के राजधानी में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के फैसले में कोई ढील नहीं दी जाएगी. भूपेंद्र यादव दिल्ली में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के नवनिर्मित पवन एकीकृत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (PAVAN-I3C) का दौरा कर रहे थे. उन्होंने कहा कि नए निगरानी मंच के माध्यम से नियमों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों, प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों और यातायात जाम वाले स्थानों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई की जाएगी. यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब दिल्ली 1 नवंबर से स्थायी शीतकालीन प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था लागू करने जा रही है. इस व्यवस्था के तहत एक नवंबर से 28 फरवरी तक हर साल लागू होने वाले नियमों में विभिन्न मौसमी प्रतिबंधों को एक साथ शामिल किया गया है.
1 नवंबर 2026 से लागू होने जा रहे विंटर एक्शन प्लान के तहत दिल्ली में बीएस-VI से नीचे के मानकों वाले दिल्ली से बाहर के वाहनों के प्रवेश पर रोक, ईंधन खरीदने के लिए वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) अनिवार्य करना, कार्यालय कर्मचारियों के लिए 50 प्रतिशत घर से काम करने की व्यवस्था और धूल पैदा करने वाली निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध शामिल हैं. सर्दियों के दौरान अधिकृत पार्किंग स्थलों पर शुल्क भी दोगुना किया जाएगा. स्थायी व्यवस्था के अनुसार, 1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल पैदा करने वाली निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों पर प्रतिबंध रहेगा. वहीं, 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक अधिकांश निर्माण कार्य पूरी तरह बंद रहेंगे. हालांकि, आवश्यक सार्वजनिक बुनियादी ढांचा और आपातकालीन परियोजनाओं को छूट दी जाएगी. इस अवधि में निर्माण सामग्री लेकर आने वाले वाहनों के राजधानी में प्रवेश पर भी रोक रहेगी.
ग्रैप के तहत एक्शन
पिछली सर्दियों में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के विभिन्न चरणों के तहत कई बार निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया गया था. अंतिम प्रतिबंध 16 से 22 जनवरी 2026 तक लागू रहा था. संशोधित ग्रैप के अनुसार, वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 401 से 450 के बीच होने पर चरण-तीन के तहत निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियां प्रतिबंधित होती हैं. हालांकि, रैखिक सार्वजनिक परियोजनाओं को छूट मिल सकती है. चरण-चार में एक्यूआई 450 से अधिक होने पर राजमार्ग, सड़क, फ्लाईओवर, पुल, बिजली पारेषण, पाइपलाइन और दूरसंचार जैसी परियोजनाओं पर भी प्रतिबंध लागू होता है. नियमों के उल्लंघन पर एनजीटी के दिशानिर्देशों के अनुसार पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाई जाएगी. केंद्र सरकार का एनसीआर में निर्माण बंद करने का नया फैसला प्रदूषण नियंत्रण के लिए अतिरिक्त कदम है.
दिल्ली-एनसीआर में निर्माण और तोड़फोड़ कार्यों पर कब से प्रतिबंध रहेगा?
दिल्ली-एनसीआर में 5 नवंबर से 20 नवंबर 2026 तक निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा।
सर्दियों के प्रदूषण से निपटने के लिए विंटर एक्शन प्लान के तहत क्या उपाय किए गए हैं?
विंटर एक्शन प्लान के तहत बीएस-6 से नीचे के बाहरी वाहनों के प्रवेश पर रोक, वैध पीयूसी प्रमाणपत्र की अनिवार्यता, 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम और पार्किंग फीस को दोगुना करना शामिल है।
पीएवीएएन एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र (PAVAN-I3C) का क्या मुख्य उद्देश्य है?
पीएवीएएन-आई3सी वायु गुणवत्ता, उत्सर्जन, मौसम और उपग्रह डेटा को एक मंच पर लाता है ताकि प्रदूषण के स्रोतों और नियमों का उल्लंघन करने वालों की वास्तविक समय में पहचान करके त्वरित कार्रवाई की जा सके।




