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काला तेंदुआ मामले में चिर निद्रा में सोयी साय सरकार और वन विभाग – राहुल तिवारी

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छुरिया :- इलाके में वनक्षेत्र से लगी बस्तियों में इन दिनों काले तेंदुए का खौफ बरपा हुआ है। यह अत्यंत दुर्लभ प्रजाति का वन्यजीव मानव आबादी के आसपास खुलेआम विचरण कर रहा है जो कि दोनों ही के लिए खतरनाक है। कांग्रेस प्रवक्ता राहुल तिवारी ने इन परिस्थितियों के लिए साय सरकार की वन्यप्राणियों के संरक्षण की नीतिगत असफलता और वन विभाग द्वारा अधूरी तैयारियों के बीच खानापूर्ति किए जाने को दोषी बताया है। जिला कांग्रेस प्रवक्ता राहुल तिवारी ने जारी बयान में कहा कि, पिछले हफ्तेभर से काला तेंदुआ लगातार क्षेत्र में नजऱ आ रहा है। इसके वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहे हैं। पिछले ही दिनों इसे नगर पंचायत छुरिया के मां दंतेश्वरी पहाड़ पर देखा गया। लोगों की भीड़ इसे देखने जुट रही है। गाहे-बेगाहे बसाहट वाले इलाकों में पहाड़ और जंगल में इसकी धमक बनी हुई है। अति दुलर्भ वन्य जीव के संरक्षण और उसे बसाहट से दूर रखने के मामले में असफल वनविभाग अब तक इस तेंदुआ का रेस्क्यू नहीं कर पाया है।

उन्होंने कहा कि, सरकार की नीतियां भी मानव जीवन खतरे में डाल रही है। छुरिया क्षेत्र वन्य प्राणियों की मौजूदगी के लिए आज से नहीं बल्कि दशकों से जाना जाता है। ये वही क्षेत्र हैं जहां ग्राम पंडरापानी में ग्रामीणों ने इलाके में मौजूद बाघिन की लाठी-डंडों से पीटकर हत्या कर दी थी। 14 वर्ष पुरानी इस घटना के वक्त भी भाजपा की ही सरकार थी। ऐसे संवेदनशील इलाके में अब तक वन्यजीवों को बसाहटों से दूर रखने कोई सार्थक प्रयास नहीं किए गए हैं। लगभग प्रतिवर्ष यहां जंगली सुअर के हमले की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि, काले तेंदुए की बसाहटों के पास मौजूदगी और वन विभाग के इन परिस्थितियों को संभाल न पाने के चलते जो खतरे पैदा हुए हैं वह बेहद खतरनाक हैं। एक ओर भाजपा की साय सरकार हसदेव अरण्य को उजाडऩे में तूली हुई है और दूसरी दुर्लभ वन्य प्राणियों की सुरक्षा, संरक्षण को लेकर भी उनकी नीतियां चरमराई हुई हैं।

आलम यह है कि भाजपा सरकार में वन विभाग के नुमाईंदे भी गैरपेशेवर की तरह बस तेंदुआ के पंजों के निशान छान रहे हैं। विभाग अधिकारियों ने गांवों में मुनादी करवाकर ही इलाके को सुरक्षित किया जाना मान लिया है जो कि असल में नकारापन है। तिवारी ने कहा कि, जरुरत है कि सरकार इस मामले में गंभीरता से काम करे। काला तेंदुआ जैसा दुर्लभ वनप्राणी के संरक्षण की भी महती आवश्यकता है। इस लिए जल्द से जल्द स्पेशल टीम तैयार कर बसाहट के इलाके से उसे बाहर लाकर उसका रेस्क्यू किया जाना बेहद जरुरी है। लोगों की सुरक्षा के लिहाज से भी इसे बेहतर योजना के साथ क्रियान्वित करने की जरुरत है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो नि:संदेह आने वाले दिनों में इन परिस्थितियों में किसी की जान जा सकती है।

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