रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के शासकीय सेवकों और कर्मचारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार के मामलों में अभियोजन स्वीकृति देने की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी एवं समयबद्ध बना दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार अब सरकारी विभागों को तय समय-सीमा के भीतर अभियोजन से जुड़े फैसलों का निपटारा करना अनिवार्य होगा। खास बात ये है कि यदि नियुक्तिकर्ता प्राधिकारी को लगता है कि मामला अभियोजन योग्य है, तो उसे आवेदन मिलने की तारीख से 45 दिनों के भीतर स्वीकृति जारी करनी होगी।
इस संबंध में राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने शासन के सभी विभाग, सभी विभागाध्यक्ष सभी संभागीय अपनी असहमति के ठोस कारणों के साथ मामला विधि विभाग को भेजना होगा। इन सभी प्रक्रियाओं को अधिकतम 3 महीने (90 दिन) की समय-सीमा में पूरा करना अनिवार्य कर दिया गया है। अपनी असहमति के ठोस कारणों के साथ मामला विधि विभाग को भेजना होगा। इन सभी प्रक्रियाओं को अधिकतम 3 महीने (90 दिन) की समय-सीमा में पूरा करना अनिवार्य कर दिया गया है।
अखिल भारतीय सेवाओं के लिए विशेष प्रक्रिया
अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के मामलों में विधि विभाग प्रशासकीय विभाग के अभिमत का परीक्षण करेगा और समन्वय के बाद आदेश प्राप्त करेगा। सरकार ने इस आदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों और मानदेय पर काम करने वाले कर्मियों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। चूँकि राज्य सरकार या कोई सरकारी निकाय इनका सीधे ‘नियुक्तिकर्ता प्राधिकारी’ नहीं होता है, इसलिए इन श्रेणियों के कर्मचारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार के मामलों में अभियोजन स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होगी। ऐसे मामलों में सीधे अभियोजन की कार्यवाही की जा सकेगी।
साक्ष्य के लिए बार-बार बुलाने की जरूरत नहीं
नए नियमों के तहत, अभियोजन स्वीकृति के आदेशों को लोक दस्तावेज माना गया है। इसका मतलब यह है कि इसे अदालत में प्रमाणित करने के लिए संबंधित अधिकारी को बार-बार साक्ष्य देने के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, यदि आरोपी आदेश की वैधानिकता या अधिकारी की सक्षमता को चुनौती देता है, तो न्यायालय कानून के प्रावधानों के तहत अधिकारी को तलब कर सकता है।



