पैकेजिंग फूड सैंपल लेकर जांच हेतु भेजे गए राजस्थान लैब कृषि विभाग भी कृषि केंद्रों में दे रहे दबिश
राजनांदगांव (दावा)। शहर सहित जिले भर में इन दिनों खाद्य सुरक्षा विभाग व कृषि विभाग की सक्रियता देखते ही बन रही है। खाद्य विभाग जहां जिले भर के अलग-अलग जगहों में घूम- घूम कर दुकानों से पैकेजिंग फूड के सैंपल लिए जा रहा हैं वहीं कृषि विभाग के अधिकारी शहर सहित जिले भर के कृषि केंद्रो में दबिश देकर बिना लायसेंस कीट नाशक दवा बेचते पाए जाने पर सीधे उनकी दुकानें सील सील कर दे रहे है। इससे दुकानदारों में हडक़ंप मचा हुआ है।
बता दें कि जिले में स्थानीय स्तर पर बनने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता ही नहीं बल्कि उनके पैकेजिंग में रहने के बाद उक्त खाद्य सामग्री में पडऩे वाले असर को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग विशेष अभियान चला रहा है। इस अभियान के तहत भर के दुकानें, प्रोविजन स्टोर्स आदि से उक्त पैकेजिंग फूड के सैंपल एकत्रित किए हैं और उसकी जांच के लिए राजस्थान स्थित लैब में भेजे जा रहे हैं।
खाद्य अधिकारियों का इस संबंध में कहना है कि लोकल स्तर पर होने वाले उत्पाद (मैन्युफैक्चरिंग) जैसे परफ्यूम, बाटल, कैंप पैकेजिंग के लिए विशेष तौर पर पैकेजिंग लैब भेजे जा रहे हैं ताकि यह देखा जा सके कि वर्तमान में इन खाद्य सामग्रियों पर पैकेजिंग के बाद क्या प्रभाव पड़ता है।
बिना लायसेंस दवा बेचने वाले कृषि केंद्र सील
इधर कृषि विभाग के अधिकारियों की कीटनाशक दवाईयां बेचने वाले कृषि केंद्रों पर वक्र दृष्टि बनी हुई है। अफसर जिले भर के कृषि केंद्रो में दबिश देकर दवाईयों की जांच कर रहे हैं और अनियमितता व बिना लायसेंस दवाईयां बेचने जाने पर कार्रवाई करते हुए सीधे दुकानें सील कर दी जा रही है। अधिकारियों ने इस कार्रवाई के तहत बिना लायसेंस 14 प्रकार की दवा बेच रहे कृषि केंद्रो को सील किया है।
बता दें कि कृषि विभाग शासन के द्वारा निर्धारित मूल्य पर कृषि सामग्री, बीज, उर्वरक एवं कीट नाशकों की किसानों को उपलब्धता तय की जा रही है। नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित कृषि केंद्र एवं फर्म के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार शहर के बसंतपुर स्थित सुजल कृषि कृषि केंद्र में लायसेंस अधिनियम का उल्लंघन करते पाए जाने पर कार्रवाई की गई। कृषि विभाग के उप- संचालक नागेश्वर लाल पांडे के अनुसार उक्त दबिश कार्रवाई में 10 प्रकार की दवा बेचने का मामला सामने आया है। जिस पर उनके टीम के अफसरों द्वारा कार्रवाई की गई है।
बताया जाता है कि इन कृषि केंद्रों में निर्धारित दवाओं के अलावा 14 प्रकार की कृषि दवाओं का विक्रय किया जा रहा था जो कि बीज गुण नियंत्रण आदेश 1983, आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा- 3, कीटनाशक अधिनियम 1963 एवं 1971 की धारा -13 में निहित प्रावधानों के तहत नियम विपरीत है। बताते चलें कि मानसून के आगमन के साथ खरीफ 2025 में किसानों द्वारा फसल बोनी का कार्य किया जा रहा है। ज्यादा उत्पादन देने वाली फसल के किस्मों के बीजों की सहकारी एवं निजी संस्थाओं के द्वारा तेजी से विक्रय किया जा रहा है। इस पर नजर रखने व बिना लायसेंस के उक्त दवाएं बेचने वाले कृषि केन्द्रों पर दबिश देकर कार्रवाई की गई है। यह कार्य आगे भी जारी रहेगा।