Home छत्तीसगढ़ शिलान्यास पत्थर में महापौर मधु का नाम नहीं होने से मामला गरमाया…

शिलान्यास पत्थर में महापौर मधु का नाम नहीं होने से मामला गरमाया…

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राजनांदगांव (दावा)। श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर्व के दिन शहर में भाजपा नेताओं के हूजूम के बीच अटल परिसर का लोकार्पण किया गया। लेकिन लोकार्पण के उक्त शिलान्यास पत्थर में नगर के प्रथम व्यक्ति महापौर मधुसूदन यादव का नाम अंकित नहीं होने से मामला गरमा गया है। जननायक माने जाने वाले महापौर मधुसूदन यादव के चाहने वाले शिलान्यास पत्थर में उनके नाम नहीं होने से काफी भडक़े हुए हैं।

बता दें कि यह तो सर्वविदित है कि मधुसूदन यादव काफी लोकप्रिय नेता हैं। वे अभी नगर निगम के निर्वाचित जनप्रतिनिधि है, किन्तु बताते है कि निगम के अधिकारी उनकी बात नहीं मानते। और जब नगर निगम द्वारा ही उक्त अटल परिसर लोकार्पण की संयोजना की है, तब कैसे माना जा सकता है कि उक्त शिलान्यास पत्थर में निगम के महापौर मधुसूदन यादव का नाम न हो। यही नहीं उक्त शिलान्यास पत्थर में न तो नगर निगम सभापति पारस वर्मा का नाम है और न नेता प्रतिपक्ष संतोष पिल्ले का नाम है। जबकि निगम के पूर्व नेता प्रतिपक्ष किसुन यदु का नाम है।

कुछ भाजपाई पार्षद यह भी कह रहे हैं कि इस शिलान्यास पत्थर में भाजपा मंडल के लोगों के नाम का कोई औचित्य ही नहीं है। जबकि निगम से कार्यक्रम हो रहा है, तब भाजपाई पार्षदों का नाम होना चाहिए था। यदि पार्षदों का नाम नहीं है तो सदन के नेता महापौर मधुसूदन यादव का नाम तो होना ही चाहिए था। लेकिन ऐसा न किया जाकर उनका नाम ही काट दिया गया और विपक्षियों के हाथों एक मुद्दा दे दिया गया है, जो किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। इससे लोग आरोप लगा रहे हैं कि नगर निगम को महापौर मधुसूदन यादव नहीं चला रहा बल्कि स्थानीय भाजपा पार्टी चला रही है।

बताते चलें कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन भारतरत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की पुण्यतिथि के अवसर पर बाजपेयी जी की प्रतिमा का लोकार्पण विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के हाथों किया गया। राज्य शासन द्वारा वहां पर लगभग 50 लाख की लागत से अटल परिसर बनाया जाना है। इसके लिए वहां स्थापित की गई शिलान्यास पत्थर में महापौर मधुसूदन यादव का नाम ही गायब है। जबकि इसका लोकार्पण ही नगर निगम के तत्वावधान में किया गया है। इसे गंभीर त्रुटि नहीं बल्कि सुनियोजित षडय़ंत्र माना जा रहा है। इसलिए इसके विरोध में स्वर बुलंद होने लगे हैं। लोगों का कहना है कि मधुसूदन यादव ने केवल नगर निगम का दो-दो बार का महापौर है, पूर्व सांसद भी हैं। ऐसे वरिष्ठ और जन-जन के चहेते नेता का नाम बगैर सुनियोजित साजिश के शिलान्यास पत्थर से गायब कैसे हो सकता है। उपरोक्त परिस्थितियों को देखते हुए लोगों ने आवाज उठाने से नहीं हिचक रहे हैं कि नगर निगम को महापौर मधुसूदन यादव नहीं बल्कि स्थानीय भाजपा पार्टी के लोगों द्वारा चलाया जा रहा है जो कि जनप्रतिनिधियों के हक पर कुठाराघात करने वाला है।

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