इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्याालय में दीक्षारम्भ एवं एनईपी 2020 पर व्याख्यान माला का हुआ आयोजन
00प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थियों को एनईपी के बारे में विस्तारपूर्वक समझाया गया,

(यतेंद्र जीत सिंह “छोटू”) खैरागढ़ : इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ में गुरूवार 21 अगस्त को नवप्रवेशी विद्यार्थियों का दीक्षारम्भ एवं एनईपी 2020 पर व्याख्यान माला का आयोजन किया गया। राज्यपाल एवं कुलाधिपति के निर्देशानुसार तथा कुलपति प्रो.(डॉ.) लवली शर्मा के संरक्षण में आयोजित उक्त कार्यक्रम की अध्यक्षता अधिष्ठाता कला संकाय प्रो.डॉ. मृदुला शुक्ल ने की। साथ ही अधिष्ठाता नृत्य संकाय प्रो.डॉ. नीता गहरवार व अधिष्ठाता संगीत संकाय प्रो.डॉ. नमन दत्त उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरूआत मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर की गई। सर्वप्रथम दीक्षारम्भ कार्यक्रम के तहत सहायक प्राध्यापक डॉ. कौस्तुुभ रंजन के द्वारा नवप्रवेशी विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की विस्तृत जानकारी दी गई। विश्वविद्यालय में अध्ययन-अध्यापन के साथ ही विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं के संबंध में बताया गया। इसके पश्चात संकाय अध्यक्षों एवं शिक्षकों ने अपने-अपने संकाय में संचालित विभागों की जानकारी प्रदान की। संगीत संकाय की अधिष्ठाता प्रो.नीता गहरवार ने प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश लेने वाले नवप्रवेशी विद्यार्थियों को नृत्य संकाय में संचालित विभागों की जानकारी देते हुये, कहा कि अपना संस्कार एवं अपनी सभ्यता संस्था के भीतर तथा बाहर दोनों जगह बनाये बनाये रखें। सहायक प्राध्यापक डॉ. लिकेश्वर वर्मा ने संगीत संकाय में संचालित विभागों की जानकारी देते हुये कहा कि यहां आज भी गुरू-शिष्य परंपरा जीवित है। उन्होंने विद्यार्थियों को असामाजिक गतिविधियों एवं नशापान से दूर रहने की सलाह दी। रबी नारायण गुप्ता ने दृश्यकला संकाय में संचालित विभागों की जानकारी देते हुये विद्यार्थियों से कहा कि आप किसी भी जगह जायें शालीनता बनाये रखें। उन्होंने विद्यार्थियों को सभी से कुछ न कुछ सीखने की प्रवृत्ति पैदा करने की बात कही। डॉ. दीपशिखा पटेल ने लोक संगीत विभाग एवं संकाय के स्थापना आदि के साथ ही यहां पढ़ाये जाने वाले विषयों की जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुये अधिष्ठाता कला संकाय प्रो.डॉ. मृदुला शुक्ल ने कहा कि दीक्षारंभ की परंपरा बहुत ही प्राचीन है जिसमें शिष्य अपने गुरू के यहां रहकर ही शिक्षा ग्रहण करते थे। आज नवप्रवेशी विद्यार्थियों का दीक्षारंभ है और शिक्षकों के द्वारा सभी विद्यार्थियों को उनके मूल उदृदेश्य से संबंधित जानकारी दी गई है। उन्होंने कहा कि आप सभी अपने दायित्वों को अच्छे से निभायें जिससे हम अपनी नई पीढ़ी तक इसे हस्तांतरित कर सकें। कबीर दास जी के दोहे के माध्यम से विद्यार्थियों को अपने दायित्वों का पालन करने तथा गुरू का अनुसरण करने की बात कही।। विद्यार्थियों से कहा कि आपका यह समय कीमती है, इसका सदुपयोग करें। इसके पश्चात अधिष्ठाता संगीत संकाय प्रो.डॉ. नमन दत्त ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुये कहा कि यह संस्था अन्य संस्थाओं से अलग है, यहां पढ़ाई के साथ जीवन जीने की शैली भी सिखाई जाती है। कलाकार बनने से पहले हमें बेहतर इंसान बनना जरूरी है, यही हमारा विश्वविद्यालय सिखाता है। उन्होंने कहा कि बेहतर की उम्मीद लेकर चलिए और कड़ी मेहनत कीजिए। नामी नहीं बल्कि गुणी कलाकार बनने की इच्छा लेकर पढ़ाई करें तभी आप अपने जीवन में सफल हो पायेंगे।।कार्यक्रम का सफल संचालन छात्रकल्याण अधिष्ठाता डॉ. देवमाईत मिंज ने किया।
नवप्रवेशी विद्यार्थियों को एनईपी के संबंध में दी गई विस्तृत जानकारी
विश्वविद्यालय में प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश लेने वाले नवप्रवेशी विद्यार्थियों के लिये राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत व्याख्यान माला का आयोजन किया गया जहां विद्यार्थियों को एनईपी के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की गई।।इस दौरान बी.व्होक के संबंध में सहायक प्राध्यापक वेंकट आर गुड़े, बी.पी.ए. के संबंध में सहायक प्राध्यापक डॉ. एस. मेदिनी होम्बल, बी.एफ.ए. के संबंध में सहायक प्राध्यापक डॉ. छगेन्द्र उसेण्डी एवं बी.ए. के संबंध में सहायक प्राध्यापक डॉ. कौस्तुभ रंजन ने विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की। उन्होंने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को बताया कि किस तरह एनईपी के तहत विद्यार्थी अपनी इच्छानुसार अलग-अलग विषयों की पढ़ाई कर सकते हैं। किस तरह कोर्स पूरा करना है और परीक्षा में सम्मिलित होना है यह भी बताया गया इस दौरान एनईपी के तहत डी.एस.सी., डी.एस.ई., जी.ई., एस.ई.सी., व्ही.ए.सी. तथा ए.ई.सी. के कोर्स के संबंध में जानकारी दी गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षकगण सहित विद्यार्थीगण उपस्थित थे।



