(यतेंद्र जीत सिंह,”छोटू ”) खैरागढ़ : ग्राम भोथी में एक मासूम बछड़े की जान चली गई ,जिसे प्रशासनिक लापरवाही बताया जा रहा है। ग्राम के प्राथमिक शाला से लगकर पशुओं को रखने के लिए अस्थाई रूप से बाडा बनाया गया है। लेकिन उन बेजूबान जानवरों के लिए न तो छत है, न ही कोईथ देखभाल करने वाला। ,न ही कोई जिम्मेदारी। जिसके कारण रविवार को भिषण गर्मी और चारा पानी के आभाव से बछड़े की तड़फ तडफ कर जान चली गई। इस हादसे से स्थानीय प्रशासन की संवेदनहीनता पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। बेजूबान जानवरों के लिए पशुबाडा बन रहा यातना गृह अस्थाई पशु बाड़े में रखें गये जानवर खुले आसमान के निचे भूख प्यास और बारिश,धुप से बेहाल रहते है। ग्रामीणों का कहना है कि किसी तरह की भी चारे-पानी,छाया का इंतजाम तक नहीं है। उसका नतीजा यह हुआ कि मासूम बछड़े की बेबसी में जान चली गई। बचे हुए भी जानवर पर भी मौत का साया
मंडरा रहा है।
नन्हे मुन्ने स्कूल के बच्चों पर भी मंडरा रहा खतरा
प्राथमिक विद्यालय से लगा हुआ है पशुबाडा, जहां पर बछड़े की जान गई है। मामला केवल पशु कल्याण तक सीमित नहीं है। गंदगी और बदबू से स्कूल का वातावरण दूषित हो गया है। वहीं पशुओं की आवाजाही ने बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं अभिभावक सवाल उठा रहे हैं कि क्या बच्चों को हादसो और लक्ष्य ययं बिमारियों के हवाले छोड़ दिया जाए । प्रशासनिक अव्यवस्था के बिच ग्रामीण में पनप रहा आक्रोश बेजूबान बछड़े की असमय मौत के बाद ग्रामीणों ने कडी नाराजगी जताते हुए मांग की है कि इन इस अस्थाई पशु बाड़े को पशु चिकित्सा विभाग के अधिन लाया जाए, नहीं तो हटाया जाए और बछड़े की मौत के लिए, जिम्मेदार अधीकारी के उपर कडी से कडी कार्यवाही की मांग उठाई जा रही है। जिससे व्यवस्था सुधर सके।



