Home छत्तीसगढ़ डोंगरगढ: मां बमलेश्वरी की महिमा और डोंगरगढ़ का इतिहास…

डोंगरगढ: मां बमलेश्वरी की महिमा और डोंगरगढ़ का इतिहास…

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एंकर – विश्व प्रसिद्ध मां बमलेश्वरी धाम डोंगरगढ़ में प्रत्येक नवरात्र लाखों की संख्या में माता के भक्त माता के दर्शन लाभ लेने दूर दूर से पहुंचते हैं। पूर्व वर्षों की भाती चैत क्वांर नवरात्र पर्व में भी माता के भक्तों का जनसैलाब उमड़ रहा है।जिसको ध्यान में रखते हुए मंदिर ट्रस्ट और प्रशासन के द्वारा व्यापक तैयारी की गई है।

माता के मंदिर का इतिहास – धर्म नगरी डोंगरगढ़ स्थित 1000 फिट ऊंचे पहाड़ी में विराजमान मां बम्लेश्वरी देवी के इतिहास के बारे में इतिहासविदो व मन्दिर के पुजारियों का कहना हैं की 2200 वर्ष पुराना हैं मन्दिर का इतिहास।

जानकारी के अनुसार डोंगरगढ़ शहर पहले कामावती नगरी के नाम से जाना जाता था। महाराज काम सेन यहां के शासक थे, महाराज कामसेन मां बगला मुखी के बहुत बड़े उपासक थे और अपने तपोबल से मां बगलामुखी को प्रसन्न कर पहाड़ों में विराज मान होने की विनती की और मां बगलामुखी, मां बम्लेश्वरी के स्वरूप में विराजमान हुई । अत्यधिक जंगल एवम् दुर्गम रास्ता होने के कारण भक्तों का माता के दर्शन करने पहुंचना अति दुर्लभ था। घना जंगल एवम् दुर्गम रास्ता साथ ही जंगली जानवरों का भय होने के कारण भक्त दर्शन लाभ नही पा रहे थे।
राजा कामसेन प्रजा के कल्याण करने पुनः माता से विनती करते हुए पहाड़ों के नीचे विराजमान होने के लिए प्रार्थना किया। मां बम्लेश्वरी राजा कामसेन की भक्ति और प्रजा के प्रति चिन्ता को देख प्रसन्न हो पहाड़ों से नीचे छोटी मां बम्लेश्वरी एवम् मंझली मां रणचंडी के स्वरूप में जागृत अवस्था में विराजमान हुई।आज भी दोनों माताएं भक्तों के कल्याण करने जागृत अवस्था में विराज मान हैं। वही दूसरी ओर कुछ इतिहासकारों की माने तो मां बम्लेश्वरी का इतिहास उज्जैन से भी जुड़ा हुआ हैं । राजा विक्रमादित्य भी महाराज कामसेन से युद्ध कर कामावती नगरी में अपना जीत का परचम लहराया था । राजा विक्रमादित्य भी मां बगलामुखी के बड़े उपासक रहे हैं।

मां बम्लेश्वरी देवी के दर्शन हेतु सुगम पहुंच मार्ग –

मुंबई – हावड़ा मुख्य रेल लाइन पर स्थित डोंगरगढ़ स्थित मां बमलेश्वरी के दर्शनार्थियो के लिए माता के दर्शन लाभ हेतु सबसे आसान मार्ग रेल मार्ग हैं। जो रेलवे स्टेशन से आधा किलो मीटर की दूरी पर हैं। माता का दरबार रेलवे स्टेशन से आटो रिक्शा से या पैदल चलकर माता के दरबार तक पहुंचा जा सकता है। यह मार्ग बहुत ही सुगम और आसान है। अपने स्वयं के वाहन से आने वाले दर्शनार्थियों को के लिए भी बहुत सुगम रास्ता है डोंगरगढ़ पहुंचने का मार्ग नेशनल हाईवे से जुड़ा हुआ है।

मां बम्लेश्वरी देवी की महिमा –
मां के दरबार में भक्तों ने सच्चे मन से जो भी मांगा है उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी हुई हैं। यही कारण हैं की देश – विदेश से भी लोग डोंगरगढ़ मां बम्लेश्वरी देवी के दर्शन को आते हैं। भक्तजनों का कहना हैं की जिन्हे बच्चें नही होते या जिनके जीवन में कोई भी परेशानी आती हैं तो लोग पूरे सच्चे मन से माता के दरबार में मन्नते मांगते हैं वो पूरी होती हैं । माता के भक्तों में आस्था व्यक्त करने का तरीका भी भिन्न दिखलाई पड़ता हैं। कुछ भक्त मन्नते पूरी होने पर अपने निवास स्थान से पैदल चल कर मां के दर्शन को आते हैं। तो कई भक्त घुटनों के बल से ऊपर पहाड़ी में विराजमान मां के दर्शन हेतु जाते हैं । तो कई भक्त जस गीत गाते बाजे गाजे के साथ आते हैं। लोगों का मानना हैं की सच्चे मन से मां से मांगी गई सारी इच्छाएं पूरी होती है। कुछ भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने पर ज्योति कलश की स्थापना भी करवाते हैं।

आस्था की ज्योति

प्रत्येक वर्ष चैत्र और क्वार नवरात्र में लगभग 10 हजार ज्योति कलश प्रज्वलित किए जाते है। जिसमें 61 ज्योति कलश शीतला माता मंदिर, 901 ज्योति कलश नीचे मां बमलेश्वरी मंदिर और 7,500 से 8000 तक की ज्योति कलश ऊपर पहाड़ पर विराजित माता के मंदिर में प्रज्वलित किए जाते हैं जिसमें देश के कोने-कोने के भक्तों के साथ-साथ विदेश के अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, नामीबिया जैसे अन्य देशों के भक्त भी अपने ज्योति कलश की स्थापना करवाते हैं। भक्तों का माता के प्रति आस्था देश के साथ-साथ विदेश में भी विराजमान है। इसके अलावा प्रदेश सहित देश के विभिन्न प्रांतो के राजनेताओं के नाम से भी ज्योति कलश प्रज्वलित की जाती है।

वर्ष में दो मर्तबा मनाया जाता है नवरात्र पर्व –

धर्म नगरी डोंगरगढ़ में प्रत्येक वर्ष चैत्र और क्वार नवरात्र का पर्व मनाया जाता हैं । दोनों नवरात्र में मां के दरबार में ज्योति कलश प्रज्वलित किया जाता है। पूरे नवरात्रि पर्व पर मां बम्लेश्वरी ट्रस्ट समिति के द्वारा दर्शनर्थियों को माता के दर्शन एवम् प्रज्वलित ज्योति कलश के दर्शन करने सुरक्षित उड़नखटोला की व्यवस्था , दर्शनार्थियों के लिए एयर कंडीशन युक्त विश्राम गृह की व्यवस्था एवम् सीढ़ियों से दर्शन करने वाले दर्शनार्थियों के लिए जगह जगह पर ठंडे पानी एवं आराम करने के लिए बहुत बड़ा हॉल व्यवस्था की गई है। पूरे मन्दिर परिसर में ऊपर पहाड़ से लेकर नीचे तक सुरक्षा की दृष्टि से सी सी टी वी कैमरा लगा रखे हैं।
नवरात्र के दौरान दर्शनर्थियो की मदद करने ट्रस्ट मंडल के कर्मचारी सेवा देते हैं। नवरात्र पर्व में प्रशासन पूरे विभागों के साथ अपनी सेवा प्रदान करते हैं। नवरात्री पर्व में बाहर से आए दर्शनार्थियो के मनोरंजन एवम् खाने पीने के लिए पर डोंगरगढ़ में प्रशासन द्वारा मेला का भी आयोजन किया जाता हैं । जिसमें बच्चों के मनोरंजन के लिए झूला, कपड़े, खाने पीने की सामग्री , मिनाबाजार इत्यादि होता हैं।

नवरात्र पर्व के दौरान ,प्रशासनिक तन्त्र 24 घण्टे रहते हैं सेवा देने तैयार –
जिला प्रशासन द्वारा नवरात्र पर्व के दौरान लाखों की संख्या में पहुंचने वाले भक्तों की सुविधा के लिए हजारों की संख्या में पुलिस के जवान सभी प्रमुख स्थान पर सेवा करने तैयार मिलते हैं। ताकि भक्ति जन सुविधा से दर्शन लाभ कर सुरक्षित वापस लौट सके और अपने गंतव्य की ओर रवाना हो सके। घटना दुर्घटना को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग की ओर से सभी प्रमुख स्थानों पर मेडिकल की टीम 24 घंटे सेवा के लिए तैयार रहती है। इसके अलावा पदयात्रा वाले मार्ग में सभी प्रमुख स्थानों पर मेडिकल की टीम के साथ प्रशासन द्वारा कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाती है। ताकि पद यात्रियों की समुचित सेवा की जा सके।

 

नवरात्रि के दौरान पूजन व्यवस्था –

नवरात्रि पर्व में माता जी के नौ रूपों की पूजा अर्चना पंडितो द्वारा वैदिक कर्मो एवम् मंत्रों से किया जाता हैं। विशेष पूजा कालरात्रि सप्तमी को किया जाता हैं। ऊपर पहाड़ों में प्रज्वलित ज्योति कलश में एक माई ज्योत को ऊपर कुण्ड में सुबह 4 बजे प्रज्वलित किया जाता हैं बाकि के ज्योति कलश में कुण्ड के पानी का छीटा देकर शान्त किया जाता हैं। नीचे मां बमलेश्वरी मंदिर में प्रज्वलित सभी ज्योति कलश को माताओं बहनों द्वारा शोभा यात्रा के रूप में निकालते हुए माता शीतला मन्दिर पहुंचते हैं और दोनों मंदिरों के माई ज्योत का आपस में मिलन होता हैं उसके उपरान्त प्राचीन महावीर तालाब में सभी ज्योति कलश को विसर्जित किया जाता हैं। दोनों ही माता के मंदिर नीचे और ऊपर पहाड़ में मौजूद मां बमलेश्वरी के गर्भ गृह को आकर्षक रूप से सजाया जा रहा है साथ ही मंदिर ट्रस्ट के द्वारा दूर दूर से आने वाले भक्तों के लिए विशाल पार्किंग की व्यवस्था छिरपानी पार्किंग के रूप में की गई है जिससे भक्तों सुविधा होगी ।

रोपवे सुविधा

प्रतिदिन चलने वाला रोपवे,पूरे नवरात्र में सुबह 7 बजे से रात्रि 12 बजे तक चलाया जाता है। बीच में समय को देखते हुए जब दर्शनार्थी की संख्या कम होगी 1 घण्टे मेंटेन्स के लिए बन्द रखा जाएगा। उत्तम भोजन के लिए कैंटीन की व्यवस्था रोपवे मे भीड़ की दृष्टि से एयर कंडीशनर वेटिंग हॉल की व्यवस्था ट्रस्ट द्वारा की गई है।

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