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नवांगाव वार्ड में हिंदू युवती व मुस्लिम युवक के प्रेम-प्रसंग वाला मामला गरमाया…

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हिंदू संगठन व पारिवारिक जनों का
समझाइश भी नहीं आया काम
युवती ने ठानी अपने प्रेमी के साथ रहने की जिद

राजनांदगांव (दावा)। शहर के पटरी पार स्थित वार्ड बजरंग पुर नवांगांव में हिंदू युवती व मुस्लिम युवक के बीच का प्रेम-प्रसंग का मामला गरमाया हुआ है। इसे लव-जिहाद के रूप में देखते हुए मामला चौकी चिखली पुलिस तक पहुंच जाने से वहां लोगों का हुजूम लग गया और परिवार वाले सहित हिंदू संगठन के लोगों द्वारा साहू समाज की उक्त युवती को समझाने -बुझाने के भी प्रयास किए गए लेकिन युवती टस से मस होने का नाम नहीं ले रही हैं और अपने प्रेमी के साथ रहने की जिद में हैं। इससे उसे सभी प्रकार के समझाने-बुझाने के प्रयास नाकाम सिद्ध हो रहा है।

युवक और युवती दोनों है बालिग
बताया जाता है कि नवागांव निवासी साहू समाज की बालिग युवती का मोतीपुर के मुस्लिम युवक के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था। दोनों युवक युवती ने शादी के लिए कोर्ट में आवेदन भी दे रखे है। ईश्तहार में दजऱ् युवक-युवती के परिजनों से बातचीत भी जारी है। इस मामले को लेकर जिला साहू समाज के अध्यक्ष भागवत साहू युवती को समझाने-बुझाने का हरसंभव प्रयास कर चुके हैं। इसी तरह विश्व हिन्दू परिषद व बंजरग दल के अरुण गुप्ता (लोक अभियोजक व अधिवक्ता) नंदूराम साहू, अनूप श्रीवास, त्रिगुण सादानी, प्रशांत दुबे आदि ने मामले को लेकर अपना विरोध जताया और पुलिस से इस घटना को रोके नहीं जाने पर माहौल बिगड़ गया।

शादी के लिए कोर्ट में दिया आवेदन
घटना के संबंध में चौकी चिखली प्रभारी कैलाश चंद्र मरई ने बताया कि युवक-युवती दोनों एक साथ रहने के लिए कोर्ट सहित कलेक्टर एसडीएम के समक्ष आवेदन दे रखे है। इस पर कानून भी कुछ नहीं कर सकता। बता दें कि हिंदू युवती और मुस्लिम युवक के प्रेम-प्रसंग वाले मामले को लेकर युवती के परिवार वालों सहित हिंदू संगठन के द्वारा समझाइश को लेकर अपना-अपना जोर लगाए हुए हैं। संगठन व परिवार वालों के थाने पहुंचने पर उन्हें पता चलता है कि युवक और युवती दोनों बाहर चले गए हैं और वे किसी की बात सुनना नहीं चाहते। मामले को लेकर विहिप व बजरंग दल के लोगों द्वारा लगातार परिवार वालों की सहायता करते हुए दबाव बनाए हुए हैं कि ऐसा नहीं होना चाहिए। युवती को अपने समाज के युवक से शादी करने की समझाइश भी दी गई, लेकिन वह न तो हिंदू संगठन के लोगों की बात सुनने राजी है और न अपने परिवार वालों के साथ रायशुमारी करना चाहती है। युवती को अन्यत्र ले जाने पर वहां भी जाकर उसे समझाने का प्रयास किया गया लेकिन वह किसी का भी बात सुनने राजी नहीं है। अब यह स्थिति मियां बीवी राजी तो, क्या करेगी काजी जैसी हो गई है।

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