तहसील कार्यालय में किसानों की लगी लंबी कतारें, नाम दर्ज कराने लगी होड़
राजनांदगांव (दावा)। जिले के किसानों से समर्थन मूल्य में धान खरीदी का कार्य 15 नवंबर से चालू हो चुका है। सहकारी समिति कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त होते ही उनके काम पर लौटते ही धान खरीदी की रफ्तार बढ़ गई है, लेकिन ज्यादातर किसानों को अपनी धान बेचने के लिए टोकन नहीं मिलने से उन्हें भटकना पड़ रहा है।
मंगलवार को बड़ी संख्या में किसान टोकन के लिए अपना नाम दर्ज करवाने तहसील कार्यालय में उमड़ पड़े। इससे वहां हो-हल्ले की स्थिति निर्मित रही। किसानों का कहना है कि टोकन लेने के लिए पोर्टल में उनका नाम नजर नहीं आ रहा।
बता दें कि जब तक किसानों को टोकन नहीं मिल जाता धान नहीं बेंच पाएंगे। पिछले तींन-चार दिनों से अपना नाम दर्ज करवाने की होड़ में परेशान किसान मंगलवार को तहसील कार्यालय में धावा बोल दिया। वहां टोकन पाने के लिए नाम दर्ज करवाने किसान देर तक डटे रहे। तहसील कार्यालय पहुंचे किसानों ने बताया कि टोकन प्राप्त करने के लिए उन्हें काफी परेशान होना पड़ रहा है। खेतों में धान कटाई, मिंजाई करने और सोसायटी में बेचने के दिनों में उन्हें सब काम छोडक़र तहसील कार्यालय एग्रीटेक पोर्टल में पंजीयन कराने आना पड़ रहा है।
रकबे की कटौती ने किसानों को डाला परेशानी में
तहसील कार्यालय में लाइन लगाए एक किसान ने बताया कि उनका पंजीयन नहीं होने से टोकन कटने में परेशानी हो रही है। बताया जाता है कि टोकन नहीं कटने का एक कारण गिरदावरी के चलते रकबे में कटौती है। जिससे किसानों की परेशानी बढ़ी हुई है। हालात यह है कि सुधार संशोधन के लिए राज्य शासन ने 25 नवंबर तक का समय निर्धारित किया था किंतु सुधार की संशोधन की संभावना सोमवार तक नही हो पाई। इससे किसानों को यह सोसायटी से लेकर पटवारी और तहसील कार्यालय का चक्कर काटना पड़ रहा है। सबसे बड़ी समस्या छोटे किसानों की है। जिनका रकबा दो एकड़ से कम है और जिन्हें एक ही टोकन जारी किया जाना है। ऐसे में सुधार संशोधन के बाद दूसरे टोकन की संभावना ही नहीं है। नतीजा यह है कि ऐसे पीडि़त किसान टोकन भी नहीं कटवा पा रहे हैं। बताया जा रहा है कि तहसील कार्यालय में सुधार के संशोधन का कार्य जारी है। यही वजह है कि शहर के पुराना कचहरी तहसील कार्यालय में टोकन पाने के लिए अपना नाम दर्ज करवाने किसानों की भीड़ उमड़ी रही।


