जनजाति समाज द्वारा डी-लिस्टिंग को लेकर दिल्ली में किया जाएगा महा गर्जना रैली
राजनांदगांव (दावा)। शहर के पाटीदार भवन में आयोजित जन – जातीय सुरक्षा मंच की तीन दिवसीय कार्यशाला में आदिवासी नेताओं ने आदिवासी समाज से मुस्लिम एवं इसाई धर्म ग्रहण किए धर्मांतरित लोगों को जन-जातीय समाज का मिलने वाले आरक्षण का लाभ के विरोध में जमकर गरजे और कहा कि जन जातीय सुरक्षा मंच इस संबंध में डी- लिस्टिंग को लेकर दिल्ली में गर्जना रैली करने जा रहा है। आदिवासी जन- जातीय समाज के राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम भगत ने प्रेस वार्ता में मुस्लिम समाज व ईसाई समाज में धर्मांतरित हुए लोगों को जन- जातीय समाज के मिलने वाले आरक्षण के लाभ को नाम सहित प्रस्तुत किया। उनका कहना था कि हम आदिवासी जन- जातीय समाज इस आरक्षण का लाभ लेने में पिछड़ गए हैं लेकिन उक्त आरक्षण का सबसे ज्यादा लाभ मुस्लिम व ईसाई धर्म में गए लोग उठा रहे हैं। इसका आदिवासी जन- जातीय समाज घोर विरोध करता है और केंद्र सरकार से दिल्ली में गर्जना रैली के माध्यम से यह मांग करने जा रहे हैं कि जो भी जन- जातीय समाज के लोग मुस्लिम एवं इसाई धर्म ग्रहण करते हैं तो उसे आदिवासी जन- जातीय समाज के आरक्षण का लाभ कतई न दिया जाए। उन्होंने कहा कि मुस्लिम धर्म व ईसाई धर्म वाले अपने अल्पसंख्यक होने का लाभ शासन से लेते ही हैं और आदिवासी जन- जातीय समाज के भोले-भाले लोगों को धर्मांतरित कर उनसे आदिवासी जन-जातीय के आरक्षण के लाभ सहित अल्पसंख्यक होने का भी लाभ लिया जाता है। यह दोहरे लाभ का खेल बंद होना चाहिए। इसे लेकर ही वे गर्जना रैली करने दिल्ली जा रहे हैं।
जन-जातीय समाज की विशेष संस्कृति परंपरा एवं रीति-रिवाज
प्रेस वार्ता में आदिवासी जन-जातीय समाज के राष्ट्रीय सह-संयोजक डॉ राजकिशोर हंसदा ने बताया कि आदिवासी जन-जातीय समाज की एक विशेष संस्कृति है, पऱंपरा है रीति-रिवाज है लेकिन जिस तरह से मुस्लिम व ईसाई मिशनरियों द्वारा उन्हें कई प्रकार के प्रलोभन देकर व बरगला कर धड़ल्ले से धर्मांतरित किया जा रहा है, इससे आदिवासी जन- जातीय समाज घट रहा है। जो लाभ आरक्षण का आदिवासी जन- जातीय समाज के लोगों को मिलना चाहिए उक्त आरक्षण का लाभ धर्मांतरित लोग उठा रहे हैं जो लाभ लेने के पात्र नहीं हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में 10 लाख लोगों को लेकर गर्जना रैली करने दिल्ली जा रहे हैं। आदिवासी जन- जातीय समाज के केंद्रीय टोली के सदस्य रामनाथ कश्यपव प्रकाश उईके ने बताया कि हमारा संगठन देश के 12 करोड़ से अधिक आदिवासी जन- जातीय समाज को जोडऩे का काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जन- जातीय संगठित नहीं है इसलिए इसका लाभ दूसर धर्म के लोग उठा रहे हैं। उनका कहना है कि जो उनकी संस्कृति परंपरा और रीति-रिवाज छोड़ कर दूसरे धर्म अपना लिए है ऐसे लोगों को आरक्षण बंद कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आदिवासी जन- जातीय संगठन के माध्यम से सभी को संगठित किया जा रहा है। इस संबंध में जनजाति सुरक्षा मंच की अखिल भारतीय कार्यशाला में निर्णय लिए जाने की बात उन्होंने बताई।
संविधान के अनुच्छेद 442 में बदलाव की मांग
बता दें कि भगवान बिरसा मुंडा की 150 वी जन्म जयंती के अवसर पर जनजाति सुरक्षा मंच के तत्वावधान में पूरे देश के 755 अनुसूचित जनजाति समुत्पय के 10 लाख प्रबुद्ध व्यक्ति संविधान के आर्टिकल 342 में बदलाव को लेकर मई 2026 में नई दिल्ली में विशाल सांस्कृतिक समागम कर जनजाति गर्जना रैली करने जा रहे हैं। प्रेस वार्ता में बताया गया कि वर्तमान में देश के संविधान में अनुसूचित जाति समुदाय के लिए सवैधानिक प्रावधान यह है कि यदि कोई भी अनुसूचित जाति समुदाय का व्यक्ति हिन्दू, बौद्ध एवं सिख धर्म को छोड़ कर अन्य धर्म ग्रहण करता है तो उसे अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा सकता। किन्तु आर्टिकल 342 जो अनुसूचित जनजाति समुदाय से संबंधित है उसमें इस प्रकार का कोई प्रावधान नहीं होने से लाखों की संख्या में धर्मातरण के बावजूद भी अनुसूचित जनजाति समुदाय के व्यक्ति अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र प्राप्त कर लाभ उठा रहे हैं, जो संविधान निर्माताओं की मूल भावना के विरुद्ध है। अनुसूचित जनजाति समुदाय को उसकी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान रूहि रीति रिवाज परम्परा आस्था, विश्वास, एवं भौगोलिक अलगाव, सामुदायिक अलगाव, आदिग चारित्रिक विशेषता के कारण भारतीय संविधान में आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
धर्म बदलने से सांस्कृतिक पहचान समाप्त
प्रेस वार्ता में बताया गया है कि धर्म बदलने से जनजाति की यह विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान समाप्त हो जाती हैं। किन्तु आर्टिकल 342 की आड़ में आज भी 75 वर्षों से धर्मातरित लोग इसका असंवैधानिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं। सरकार द्वारा जनजाति समुदाय की सांस्कृतिक पहचान को बचाए रखने के लिए इस आशय का संशोधन आर्टिकल 342 में समाहित करना चाहिए कि जिन भी व्यक्तियों द्वारा ईसाई एवं मुस्लिम धर्म अपना लिया गया है, उन्हें अनुसूचित जनजाति समुदाय का लाम नहीं दिया जाए। पाटीदार भवन में आयोजित इस तीन दिवसीय कार्यशाला में जनजाति सुरक्षा मंच के अखिल भारतीय अधिकारी, केंद्रीय टोली सदस्य, प्रांत संयोजक, प्रांत सहसंयोजक, सहित पूरे देश से विभिन्न जनजाति समुदाय के 200 प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। इस कार्यशाला में निर्णय लिया गया कि डीलिस्टिंग की मांग को लेकर भारत का जनजाति समाज मई 2026 में दिल्ली में विराट जनजाति गर्जना रैली करेगा। दिल्ली कूच की तैयारी हेतु पूरे देश में जनजाति समुदाय के बीच जा कर बड़ी संख्या में लोगों को आमंत्रित करेंगे एवं पूरे देश का जनजाति समाज महा गर्जना रैली के रूप में दिल्ली कूच करेगा, ताकि जनजाति समुदाय के साथ हुए इस ऐतिहासिक अन्याय को समाप्त किया जा सकेगा। इस अवसर पर वनवासी विकास समिति के बसंत पाटिल, एम.के. देशमुख, संदीप जैन, डॉ. शिवाजी निमजे राजेश खांडेकर, मनीष, सुरेश नायर मूलचंद भंसाली, रवि सिन्हा, विजय मानिकपुरी सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।



