खैरागढ़ (दावा)। संडी क्षेत्र में प्रस्तावित चूना पत्थर खनन एवं सीमेंट फैक्ट्री के विरोध में आयोजित किसान महापंचायत के बाद आंदोलन निर्णायक और संगठित चरण में प्रवेश कर गया है। पंडरिया–बिचारपुर भाठा में हुई महापंचायत में 55 गांवों से पहुंचे करीब 5 से 6 हजार किसानों व ग्रामीणों ने भाग लिया, जिनमें लगभग 2 हजार महिलाएं शामिल रहीं। महापंचायत के दौरान जनाक्रोश चरम पर दिखाई दिया और किसानों ने स्पष्ट संदेश दिया कि किसी भी कीमत पर खनन परियोजना स्वीकार नहीं की जाएगी। किसानों ने कहा कि यह लड़ाई अब केवल विरोध तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अधिकारों की निर्णायक जंग के रूप में आगे बढ़ेगी।

रक्तदान से दिया सामाजिक संदेश, 47 किसानों ने किया रक्तदान
महापंचायत के साथ सामाजिक सरोकार भी केंद्र में रहे। बैठक स्थल पर आयोजित रक्तदान शिविर में 47 किसानों ने स्वेच्छा से रक्तदान कर सिकलिन और थैलेसीमिया जैसे गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों के लिए सहयोग दिया। किसानों ने इसे आंदोलन की मानवीय और सामाजिक जिम्मेदारी बताया।
‘किसान अधिकार संघर्ष समिति’ का गठन, आंदोलन को मिली स्थायी नेतृत्व संरचना
आंदोलन को मजबूती देने के लिए महापंचायत में ‘किसान अधिकार संघर्ष समिति’ के गठन का निर्णय लिया गया। समिति में संरक्षक के रूप में गिरंवर जंघेल और मोतीलाल जंघेल को जिम्मेदारी दी गई, संयोजक सुधीर गोलछा बनाए गए। अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी लुकेश्वरी जंघेल को सौंपी गई, जबकि सचिव प्रियंका जंघेल और सह सचिव मुकेश पटेल नियुक्त किए गए। उपाध्यक्ष के रूप में कामदेव जंघेल, प्रमोद सिंह और राजकुमार जंघेल को शामिल किया गया।
आंदोलन स्थल के रूप में पंडरिया भाठा चिन्हित, दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर निर्माण का निर्णय
महापंचायत में यह भी तय किया गया कि पंडरिया भाठा को आंदोलन के स्थायी केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके तहत दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर के निर्माण का निर्णय लिया गया, ताकि यह स्थल किसान एकता और संघर्ष का प्रतीक बन सके। किसानों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि जब तक खनन और सीमेंट फैक्ट्री परियोजना पूरी तरह निरस्त नहीं हो जाती, तब तक हर माह किसान पंचायत की नियमित बैठक आयोजित की जाएगी। इससे आंदोलन को निरंतरता और संगठित दिशा मिलेगी।
कंपनी, समर्थक अधिकारी और नेताओं के गांव में प्रवेश पर प्रतिबंध का फैसला
महापंचायत में एक अहम फैसला लेते हुए किसानों ने तय किया कि खदान और सीमेंट फैक्ट्री से जुड़े कंपनी कर्मचारियों, समर्थक अधिकारियों और नेताओं को गांवों में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। किसानों ने इसे अपने गांव, जमीन और सामाजिक ताने-बाने की रक्षा का कदम बताया।
सभी समाजों ने दिया समर्थन, किसान नेताओं का सम्मान कर जताई एकजुटता
महापंचायत के दौरान विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों ने आंदोलन को खुला समर्थन दिया। साहू, लोधी, कोसरिया यादव सहित अन्य समाजों के जिला और प्रदेश स्तरीय प्रतिनिधियों को श्रीफल और किसानी पटका भेंट कर सम्मानित किया गया। सभी समाजों ने एक स्वर में किसानों के हक और जमीन की लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर साथ देने का संकल्प लिया।
जनाक्रोश चरम पर, किसानों का ऐलान—जमीन बचाने की लड़ाई अंतिम सांस तक
महापंचायत के फैसलों से स्पष्ट है कि परियोजना के खिलाफ आंदोलन अब और अधिक व्यापक, संगठित और निर्णायक हो चुका है। किसानों ने साफ कहा कि यह संघर्ष केवल जमीन का नहीं, बल्कि उनके अस्तित्व, सम्मान और आने वाली पीढिय़ों के भविष्य का सवाल है, और जब तक परियोजना रद्द नहीं होती, तब तक आंदोलन लगातार जारी रहेगा।



