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किसानों के दबाव के आगे झुका शासन…

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हनईबन चूना पत्थर ब्लॉक की नीलामी निरस्त, संडी जनसुनवाई भी रद्द

आज हनईबन में होगी विशाल किसान महापंचायत
खैरागढ़।

दनिया–अतरिया–उदयपुर–हनईबन परिक्षेत्र में प्रस्तावित चूना पत्थर खनन एवं सीमेंट फैक्टरी परियोजना के खिलाफ लंबे समय से चल रहे किसान आंदोलन को आखिरकार बड़ी सफलता मिल गई है। किसानों के लगातार विरोध, उग्र आंदोलन, ट्रैक्टर रैली और बढ़ते जनआक्रोश के दबाव में शासन को पीछे हटना पड़ा है। शासन ने हनईबन (मरदकठेरा) चूना पत्थर ब्लॉक की नीलामी प्रक्रिया को निरस्त करने के साथ-साथ संडी क्षेत्र में प्रस्तावित जनसुनवाई को भी रद्द कर दिया है।
हालांकि इन निर्णयों से संबंधित आदेश हाल ही में सार्वजनिक किए गए हैं, लेकिन प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार किसानो के 06 दिसम्बर के छुईखदान में हुए प्रदर्शन के बाद शासन ने दोनों फैसले 9 दिसंबर को ही ले लिए थे। किसानों और ग्रामीणों ने इन निर्णयों को अपनी एकजुटता, संघर्ष और लोकतांत्रिक आंदोलन की बड़ी जीत बताया है।

ट्रैक्टर रैली और जनआंदोलन ने बदला शासन का रुख
किसान अधिकार संघर्ष समिति के संरक्षक गिरवर जंघेल एवं अध्यक्ष लुकेश्वरी जंघेल का कहना है कि 6 दिसंबर को छुईखदान में हजारों किसानों द्वारा निकाली गई ऐतिहासिक ट्रैक्टर रैली और विशाल जनप्रदर्शन ने शासन और प्रशासन को स्पष्ट संदेश दे दिया था कि क्षेत्र की जनता किसी भी स्थिति में खनन परियोजना को स्वीकार नहीं करेगी। रैली में शामिल किसानों, महिलाओं, युवाओं और ग्रामीणों ने अपनी जमीन, जंगल, पानी और आजीविका की रक्षा के लिए एकजुट होकर आवाज बुलंद की थी।
किसान संगठनों का आरोप है कि खनन और सीमेंट फैक्टरी परियोजना से क्षेत्र की कृषि भूमि, जल स्रोत, पर्यावरण और ग्रामीण जीवन पूरी तरह प्रभावित हो जाते। इसी जनदबाव और व्यापक विरोध के चलते पहले संडी क्षेत्र की जनसुनवाई को निरस्त किया गया और इसके बाद हनईबन चूना पत्थर ब्लॉक की नीलामी प्रक्रिया पर भी रोक लगानी पड़ी।

लोकतांत्रिक संघर्ष की जीत बताया निर्णय
किसानों ने साफ कहा है कि यह निर्णय किसी तकनीकी खामी या प्रशासनिक औपचारिकता का परिणाम नहीं है, बल्कि यह जनता की ताकत और लोकतांत्रिक संघर्ष का सीधा नतीजा है। किसान नेताओं का कहना है कि यदि जनता एकजुट होकर शांतिपूर्ण लेकिन मजबूत आंदोलन करे, तो शासन को भी जनभावनाओं के आगे झुकना पड़ता है।

आज हनईबन में होगी विशाल किसान महापंचायत
आंदोलन को और मजबूत करने तथा भविष्य की रणनीति तय करने के उद्देश्य से किसानों ने आज शनिवार को हनईबन में विशाल किसान महापंचायत का आयोजन किया है। इस महापंचायत में क्षेत्रभर से किसानों और ग्रामीणों के शामिल होने की संभावना है।
किसान आंदोलन के संयोजक सुधीर गोलछा जनपद सभापति ने बताया कि महापंचायत में तीन प्रमुख मांगें रखी जाएंगी—

संडी क्षेत्र में किसी भी प्रकार की खनन प्रक्रिया आगे न बढ़ाई जाए।

हनईबन चूना पत्थर ब्लॉक की नीलामी दोबारा न की जाए।

दनिया–अतरिया–उदयपुर–हनईबन पूरे परिक्षेत्र में प्रस्तावित खनन एवं सीमेंट फैक्टरी परियोजना को हमेशा के लिए निरस्त किया जाए।

किसान नेताओं के अनुसार इस महापंचायत में लगभग 5 से 7 हजार किसानों और ग्रामीणों के जुटने की संभावना है, जिससे यह आयोजन एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।

प्रशासन और किसान संघर्ष समिति के बीच 4 घंटे की मैराथन बैठक
किसान आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए शुक्रवार को प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों और किसान अधिकार संघर्ष समिति के संरक्षक गिरवर जंघेल, मोती लाल जंघेल, संयोजक सुधीर गोलछा, अध्यक्ष लुकेश्वरी जंघेल, उपाध्यक्ष कामदेव जंघेल, सह सचिव मुकेश पटेल सहित अन्य पदाधिकारियों के बीच करीब चार घंटे तक मैराथन बैठक चली। बैठक में कलेक्टर, अतिरिक्त कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार, पुलिस अधीक्षक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक के दौरान किसान अधिकार संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने अपनी मांगें मजबूती से रखीं और स्पष्ट किया कि जब तक पूरी खनन एवं सीमेंट फैक्टरी परियोजना को स्थायी रूप से निरस्त नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

पहली बड़ी जीत, लेकिन संघर्ष जारी
फिलहाल हनईबन चूना पत्थर ब्लॉक की नीलामी और संडी क्षेत्र की जनसुनवाई का निरस्त होना किसानों के संघर्ष की पहली बड़ी और सकारात्मक जीत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि किसान नेताओं का कहना है कि यह केवल शुरुआत है और अंतिम लक्ष्य पूरी परियोजना को स्थायी रूप से रद्द कराना है।
किसानों ने साफ संदेश दिया है कि वे अपनी जमीन, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से कोई समझौता नहीं करेंगे और जरूरत पड़ी तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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