आंवला पेड़ काटते देख रोका, उसके बाद हुई कार्यवाही
डोंगरगांव (दावा)। पूरे क्षेत्र कुकुरमुत्ते की तरफ फैले ईंट भट्टों में छायादार, फलदार और औषधि वाले हरे भरे पेड़ों को काट-काट के बेधडक़ उपयोग किया जा रहा है। ऐसा नहीं है कि, इसकी जानकारी संबंधित विभाग के लोगों को नहीं है। एक तरफ वृहद स्तर में पौधरोपण और बचाने के लिए कैम्पेनिंग की जाती लेकिन ये महज दिखावा साबित हो रहा है। विभागीय अधिकारी भी अब कार्यवाही न कर फोटो खिंचवाने ज्यादा दिलचस्पी रखते हैं।
बता दें कि क्षेत्र में संचालित ईंट भ_ों में सडक़ किनारे शासकीय भूमि पर लगे फलदार व देवतुल्य पेड़ों की कटाई कर उपयोग किया जा रहा है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण ग्राम बड़भूम ईंट भट्टे के समीप मिला, जिसमें भट्टा संचालक दिनेश चक्रधारी आ.पुसऊ व्दारा एक सहयोगी की मदद से आंवले के हरे पेड़ की बेखौफ तरीके से कटाई कर रहा था। सुबह-सुबह हो रहे सडक़ किनारे कुल्हाड़ी की मदद से हो रहे इस कटाई को यहाँ से गुजर रहे पत्रकार ने रोका और हरे पेड़ की कटाई नहीं करने की चेतावनी देकर आगे चले गए किन्तु वापसी के दौरान यह आंवले का पेड़ कट चुका था और कटे ठूंठ को बड़े ही शातिर तरीके से ढंक दिया गया था। इधर प्रकृति प्रेमी गोविन्द गुप्ता ने इस पूरे मामले को बड़भूम ग्राम में सरपंच सहित बुजुर्गों और वनविभाग को जानकारी दी।
हरे फलदार, छायादार और औषधीय पेड़ कटाई की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग की ओर से क्षेत्र के प्रभारी मुक्तेश्वर वर्मा अपनी टीम के साथ पहुंचे और कार्यवाही प्रारंभ की। इस दौरान आरोपी दिनेश अनेक बहाने कर बचने का प्रयास करते रहा था, लेकिन ग्रामीणों के दबाव और मौके पर काटे गए ठंूठ और पूरे पेड़ को और इस कार्य में प्रयुक्त कुल्हाड़ी को जब्त करने के बाद पंचनामा बनाकर विभागीय जांच के लिए भेजा गया है। इस कार्यवाही में छ: आंवले पेड़ के ठंूठ पाये गए हैं और एक को आधा काटकर छोड़ा गया है। अब देखना यह है कि इस मामले में संपूर्ण विडियो साक्ष्य मिलने के बाद विभाग और प्रशासन किस स्तर की कार्यवाही करती है।
अवैध ईंट भट्टों में मिट्टी, पानी, बिजली और लकड़ी का भरपूर दोहन
क्षेत्र के ग्रामों में संचालित सैकड़ों की संख्या में अवैध ईंट भट्टों संचालित हैं, जहाँ से महंगे दामों में ईंट बेचा जाता है। लगभग सभी ईंट भट्टों में अन्य प्रदेशों के रहवासी क्षेत्र की मिट्टी, पानी, बिजली का भरपूर दोहन करते हैं और इन ईंट भ_ों के आड़ में पेड़ों को भी काटा जा रहा है। इस विषय में राजस्व विभाग, वन विभाग, विद्युत विभाग, पीडब्ल्यूडी विभाग को संज्ञान लेना चाहिए और इन सभी ईंट भट्टों पर आवश्यक कार्यवाही करते हुए राजस्व की वसूली की जानी चाहिए। पिछले वर्ष भी कुछ भट्टों में किसानों के नाम पर अवैध तरीके से बिजली का उपयोग किया जा रहा था लेकिन विभागों में कार्यवाही के नाम पर केवल चेतावनी देकर छोड़ दिया जाता है इसलिए इनके हौसले बुलंद हैं।
बंजर जमीन पर पौधों को पेड़ बनाना चुनौती
ग्राम बड़भूम से करमरी मार्ग पर सडक़ किनारे कुछ वर्षों पूर्व वन विभाग और ग्रामीणों की मदद से पौध रोपण कर उन्हें काफी मेहनत से पाला गया था और ये पौधे अब वृक्ष का रूप ले चुके है। मुरूम और दीमक युक्त बंजर जमीन में पौधों को पालना और उन्हें बढ़ाना काफी चुनौती पूर्ण है किन्तु पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाने वाले इसे कभी नहीं समझ पाते और मौका पाकर वर्षों की मेहनत को एक झटके में खत्म कर देते हैं, इसके लिए राहगीरों, ग्रामीणों और सामान्यजनों को जागरूक होना पड़ेगा और प्रकृति के दुश्मनों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही के लिए पहल करना चाहिए।
कंवलराम टंडन ग्राम प्रमुख ने इस विषय को लेकर कहा कि जानकारी प्राप्त हुआ कि ईंट भ_े के पास पेड़ों की कटाई हो रही है। हरे फलदार पेड़ों को काटना काफी गलत है और इस तरह की कटाई को लेकर सचेत रहेंगें और पकड़े जाने पर ग्राम स्तर पर भी कार्यवाही की जायेगी।
सुबह ही आंवला पेड़ कटने की जानकारी मिलने पर ग्राम के सभी बड़े बुजुर्गों के साथ मौके पर पहुंचे हैं, दिनेश चक्रधारी अपने ईंट भट्टे के लिए इन पेड़ों को काट रहा है, जिसे मौके पर पकड़ा गया है और सभी के सामने लकड़ी भी जब्त की गई है।
– बिसनबाई अलेन्द्र सरपंच बड़भूम


