राजा-महाराजाओं के दौर की चौड़ी सडक़ें भी अब पड़ी छोटी, अतिक्रमण और ई-रिक्शा के कारण लग रहा जाम
राजनांदगांव(दावा)। राजनांदगांव की जनसंख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। जिस तरह से जनसंख्या बढ़ती जा रही है, उसी रफ्तार से शहर में गाडिय़ों की भी तादाद बढ़ती जा रही है। जिसके कारण शहर की यातायात व्यवस्था भी डगमगाने लग गयी है। राजनांदगांव शहर की बसावट के लिए राजा महाराजाओं ने चौड़ी सडक़ें बनाई है। जिसके वजह से शहर खुला खुला लगता था, लेकिन अब जिला बनने के बाद आधुनिकता के कारण शहर में गाडिय़ों की संख्या भी बढ़ गयी है। अब शहर में न तो बैलगाड़ी, रिक्शा नजर आते है, अब उनकी जगह पर दुपहिया, कारें, पिकअप सहित ई-रिक्शा नजर आने लग गयी है। जिस ढंग से शहर की रफ्तार बढ़ी, वहीं दूसरी ओर जिला मुख्यालय में अंग्रेजी माध्यम से हर कोने में स्कूल खुल गई है। जिसके कारण स्कूली बच्चों को लाने-ले-जाने बसों की संख्या भी बढ़ गयी है। शहर की सडक़ वहीं की वहीं है। उसमें कोई परिवर्तन नहीं हुआ है, बल्कि शहर के सडक़ों के दोनों ओर अतिक्रमण भी बहुत तेजी से हो गया है। अब बाजार एवं अन्य कार्यों से जिला मुख्यालय आने-जाने वालों को भी जाम में जुझना पड़ रहा है।
शहर की यातायात व्यवस्था को मजबूत करने एवं जाम से निजात दिलाने कई बार प्रशासनिक बैठक भी हुई। नियम कायदें बने, लेकिन सब ढाक के तीन पात हो गये। शहर में पुराने जमाने की ट्रेफिक लाईट भी लगी है, जो कभी चालू रहती है तो कभी बंद हो जाती है। ट्रेफिक लाईट में सडक़ सकरी है, जिससे यातायात जाम हो जाता है। इस जाम में लोग फंस जाते है। यातायात पुलिस के पास जिनते संसाधन होने चाहिए, वह उपलब्ध नहीं है। स्टाफ की भी कमी है। शहर में फिर भी ट्रेफिक सिग्नल होने के बाद पुलिस दिखती है और पुलिस कर्मचारियों की तैनाती रहती है। शहर के जिला मुख्यालय कलेक्टोरेट से लेकर राम दरबार तक दोनों ओर सडक़ सकरी है और पूरे शहर में बड़े-बड़े काम्पलेक्स बन गये है, लेकिन पार्किग व्यवस्था कहीं नजर नहीं आती। समय समय पर पुलिस का उडऩदस्ता वाहनों को व्यवस्थित करता है। शहर के चारों ओर आये दिन इन दिनों जाम नजर आने लग गया है।
गुरूद्वारा चौक से लेकर मानव मंदिर चौक के दोनों ओर ठेले खोमचे और फुटपात पर दुकान वालों की भीड़ नजर आ रही है। सडक़ सकरी हो गयी है। पुलिस द्वारा इन मार्गों में जाम की स्थिति नियंत्रित करने स्टापर लगा चुके है। जिसके कारण बड़ी वाहन नहीं जाती, लेकिन ई रिक्शा सहित छोटी वाहनों के कारण जाम हो जाता है। वहीं दूसरी ओर सिनेमा लाईन में तो एक सिनेमा घर जब कोई अच्छी फिल्म आ जाती है तो पूरा सडक़ जाम हो जाता है। जिससे लोगों को तकलीफ होती है। हलवाई लाईन में भी जाम की स्थिति आये दिन बनी रहती है। भारत माता चौक से गज लाईन तक जाम बनी रहती है। पुलिस कई बार कार्यवाही कर चुकी है, उसके बाद भी व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित किया जाना जरूरी है। त्यौहरों के समय तो मेट्रो की तर्ज पर जाम की स्थिति बन जाती है। लोगों के पैदल चलने फुटपात नहीं है। वहीं जीई रोड में गुरूद्वारा के सामने हाईसिंग बोर्ड के पुराने कार्यालय जहां पर चारों ओर दुकानदारों ने फुटपात को घेर लिया है, जिससे का पदयात्रियों के लिए जगह नहीं है। इस वजह से शहर की सडक़ों में प्रतिदिन बेवजह काम की स्थिति बनी रहती है। शहर में भीड़ तो बढ़ गयी है, लेकिन पार्किंग नहीं है। बढ़ती आबादी और वाहनों के चलते सडक़ें छोटी पड़ गयी है। शहर के अंदर बड़े-बड़े दुकानें बन गयी है, लेकिन पार्किंग स्थल नहीं बने है। नो एंट्री के बावजूद भी पुलिस से आंख बचाकर कुछ वाहन शहर में घुस जाती है।



