डोंगरगढ़ (दावा)। शहर के केदारबाड़ी सीमा पर स्थित क्रास पहाड़ी में भालुओं की हलचल से सीमावर्ती क्षेत्रों में निवासरत लोगों में दहशत व्याप्त हो गई। प्रत्यक्ष दर्शी बताते है कि,सीमा पर स्थित मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार चल रहा था। लोग चिता के पास खड़े थे, तभी पहाड़ी की तरफ से रोने, कराहने और सिसकने जैसी अजीब आवाजें गूंजने लगीं. आवाज इतनी तेज और भयावह थी कि वहां मौजूद लोगों के दिल दहल गए। कुछ देर तक किसी को समझ ही नहीं आया कि आखिर ये आवाज किसकी है और कहां से आ रही है। मुक्तिधाम में मौजूद लोगों को लगा कि शायद पहाड़ी पर कोई घायल है या कोई अनहोनी हो गई है। जैसे-जैसे आवाजें तेज होती गईं, वहां मौजूद लोगों के बीच डर और बेचैनी बढऩे लगी. कई लोग पहाड़ी की तरफ देखने लगे, लेकिन कोई ऊपर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था।
इसी दौरान केदारबाड़ी निवासी रवि पांडेय और आशीष सुमित साहू मौके पर पहुंचे. दोनों ने मोबाइल कैमरा ऑन कर आवाज़ की दिशा में रिकॉर्डिंग शुरू की. जैसे ही कैमरा क्रॉस पहाड़ी की झाडिय़ों और चट्टानों की तरफ घूमा, पूरा रहस्य सामने आ गया। पहाड़ी पर कई स्लॉथ बीयर स्लॉथ बीयर घूमते दिखाई दिए, जो लगातार रोने और कराहने जैसी आवाजें निकाल रहे थे। वीडियो सामने आते ही इलाके में सनसनी फैल गई। देखते ही देखते क्रॉस पहाड़ी के नीचे लोगों की भीड़ जमा हो गई। कई लोग पहली बार इतनी करीब से स्लॉथ बीयर को देखकर हैरान रह गए और मोबाइल से वीडियो बनाने लगे। देर शाम तक शहर में ‘क्रॉस पहाड़ी की रहस्यमयी आवाज़’ चर्चा का विषय बनी रही। वन्यजीव जानकारों के मुताबिक स्लॉथ बीयर ऐसी आवाज़ें आमतौर पर तब निकालते हैं, जब मां और बच्चे एक-दूसरे से बिछड़ जाते हैं या संपर्क बनाने की कोशिश कर रहे होते हैं. इस दौरान भालू बेहद बेचैन और आक्रामक भी हो सकते हैं।
स्लॉथ बीयर भारत के सबसे खतरनाक जंगली जानवर
विशेषज्ञों के अनुसार स्लॉथ बीयर को भारत के सबसे खतरनाक जंगली जानवरों में गिना जाता है और अचानक सामने आने पर यह हमला भी कर सकता है। शहर से लगे इलाके, मुक्तिधाम और लोगों की भीड़ के बीच जंगली भालू खुलेआम घूमते रहे, लेकिन वन विभाग का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। ना लोगों को सतर्क किया गया और ना ही सुरक्षा को लेकर कोई व्यवस्था दिखाई दी।स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर भालू आबादी की तरफ उतर आते, तो बड़ी घटना हो सकती थी।



