० शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय राजनांदगांव में करीब 250 डॉक्टरों ने किया शांतिपूर्ण प्रदर्शन
० मजदूर से भी कम है दैनिक मानदेय, सोमवार तक मांग पूरी न होने पर ओपीडी सेवाओं का करेंगे बहिष्कार
राजनांदगांव (दावा)। छत्तीसगढ़ के सभी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों (जीएमसी) के एमबीबीएस 2021 बैच के इंटर्न डॉक्टरों द्वारा 31 जुलाई को पूरे प्रदेश में एक साथ शांतिपूर्ण सांकेतिक प्रदर्शन आयोजित किया गया। यह राज्यव्यापी आंदोलन लंबे समय से लंबित इंटर्न स्टाइपेंड संशोधन की ओर राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। इसी क्रम में शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय राजनांदगांव के अस्पताल परिसर में शाम 5 बजे जोरदार प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन में लगभग 200 से 250 इंटर्न डॉक्टरों, मेडिकल विद्यार्थियों, पोस्टग्रेजुएट रेजिडेंट डॉक्टरों एवं यूजी बॉन्डेड डॉक्टरों ने एकजुट होकर अपनी आवाज उठाई।
स्वास्थ्य मंत्री से 5 बार हो चुकी है चर्चा : आईएमए/एमएसएन
इस अवसर पर आईएमए/एमएसएन छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष शाहदिल खुसरू ने कहा कि इंटर्न स्टाइपेंड वृद्धि का विषय पूर्व में पांच बार माननीय स्वास्थ्य मंत्री के समक्ष उठाया जा चुका है। उन्होंने राज्य सरकार से शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेते हुए स्टाइपेंड को 15,900 से बढ़ाकर 30,000 प्रतिमाह करने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि आईएमए/एमएसएन, आईएमए/जेडीएन, जेडीए एवं जेयूडीए सहित चिकित्सा क्षेत्र के सभी प्रमुख संगठन इंटर्न डॉक्टरों की इस न्यायोचित मांग के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।
प्रमुख मांगें एवं नाराजगी के कारण
वर्तमान 15,900 प्रतिमाह के स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30,000 प्रतिमाह किया जाए। क्योंकि पिछले 3 वर्षों से इसमें कोई वृद्धि नहीं हुई है। इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि वे 24 घंटे मरीजों की देखभाल, इमरजेंसी सेवाओं और वार्ड प्रबंधन में अस्पताल की रीढ़ की हड्डी की तरह काम करते हैं। इसके बावजूद उनका दैनिक मानदेय एक सामान्य मजदूर से भी कम बैठता है।
सोमवार के बाद ओपीडी बहिष्कार की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने सरकार को अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि सोमवार तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तो वे आंदोलन को उग्र करने पर बाध्य होंगे। ओपीडी एवं अन्य नियमित गैर-आपातकालीन सेवाओं का बहिष्कार किया जाएगा। हालांकि मरीजों के हित को ध्यान में रखते हुए आपातकालीन सेवाएं पूर्ववत जारी रहेंगी। यह आंदोलन किसी सरकार या प्रशासन से टकराव का नहीं, बल्कि सम्मानजनक स्टाइपेंड, युवा डॉक्टरों के आत्मसम्मान और उनके न्यायोचित अधिकार की मांग का शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रयास है।



