यतेन्द्र जीत सिंह छोटू खैरागढ़ : छुईखदान थाने में पदस्थ रहे प्रधान आरक्षक शीतल यादव की शनिवार 6 जून को हुई संदिग्ध आत्महत्या का मामला अब प्रशासनिक और कानूनी हलकों में गरमा गया है। मृतक के बुजुर्ग माता-पिता पुनीत राम यादव व चंपा यादव तथा भाई भानुप्रताप यादव ने कलेक्टर खैरागढ़ को ज्ञापन सौंपकर घटना की निष्पक्ष एवं गहन जांच कराने तथा मृतक की पत्नी के बजाय उनके पोते को अनुकंपा नियुक्ति देने की गुहार लगाई है।

पुलिस अधीक्षक कार्यालय पर आवेदन न लेने का आरोप
मृतक के भाई भानुप्रताप यादव का आरोप है कि घटना के बाद से परिवार लगातार पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा था। पुलिस अधीक्षक कार्यालय में लिखित आवेदन देने का प्रयास किया गया, लेकिन वहां आवेदन स्वीकार नहीं किया गया। अंततः निराश होकर परिजनों को कलेक्टर कार्यालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा। ज्ञापन सौंपे जाने के 10 दिन बीत जाने के बाद भी अब तक कोई ठोस प्रशासनिक कार्रवाई न होने से परिवार में असंतोष है।
सीसीटीवी फुटेज और बयानों में विरोधाभास का दावा
परिजनों ने आवेदन में घटना से जुड़ी कई संदिग्ध परिस्थितियों को रेखांकित किया है:
समय का अंतर: मृतक की पत्नी सती यादव के अनुसार शीतल यादव रात 12 बजे घर लौटे थे, जबकि परिजनों का दावा है कि वे रात 9 से 10 बजे के बीच ही घर पहुंच चुके थे।
रात की गतिविधियां: पत्नी द्वारा सुबह 4 बजे घटना की जानकारी मिलने की बात कही जा रही है, जबकि परिजनों के अनुसार आसपास के सीसीटीवी फुटेज में पत्नी रात के समय घर के बाहर आती-जाती दिखाई दे रही हैं। परिजनों ने इस फुटेज को जांच में शामिल करने का आग्रह किया है।
मायके प्रवास व मनमुटाव: घटना से पूर्व 27 अप्रैल से 20 मई के बीच पत्नी के मायके प्रवास और दोनों के बीच चल रहे कथित मनमुटाव के बिंदुओं की भी जांच की मांग की गई है।
बेटे लक्षित यादव के लिए अनुकंपा नियुक्ति की मांग
मामले में दूसरा बड़ा विवाद अनुकंपा नियुक्ति को लेकर है। वृद्ध माता-पिता का कहना है कि शीतल यादव ही उनके बुढ़ापे का एकमात्र सहारा थे। परिजनों ने मांग की है कि अनुकंपा नियुक्ति पत्नी सती यादव को न देकर मृतक के पुत्र लक्षित यादव के नाम आरक्षित की जाए, ताकि उसका भविष्य सुरक्षित हो सके। पेंशन का लाभ भले ही पत्नी को दे दिया जाए, लेकिन नौकरी पर पहला हक बेटे का होना चाहिए।
जांच के बाद ही साफ होगी स्थिति
परिजनों का स्पष्ट कहना है कि उनका मकसद किसी पर बेबुनियाद आरोप लगाना नहीं, बल्कि अपने बेटे की मौत से जुड़े सवालों का सच जानना है। उन्होंने निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर वैधानिक कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों और आत्महत्या के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि पुलिस एवं प्रशासनिक जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।



