दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पीजी की इमारत गिरने के बाद नई-नई जानकारियां सामने आ रही हैं. बिल्डिंग के मलबे में दबी चीखें मुस्कुराते चेहरों में बदल सकती थीं, बशर्ते इस एक शख्स की चेतावनी को अनसुना न किया गया होता. बताया जा रहा है कि इस बिल्डिंग के गिरने के कुछ घंटे पहले ही एक प्लंबर ने चेतावनी दी थी कि लोड बेयरिंग दीवार तोड़ने से पूरी इमारत गिर सकती है.
पुलिस के मुताबिक एक प्लंबर ने आरोपी को बताया था कि इसकी लोड बेयरिंग दीवार को मत तोड़ो, नहीं तो ये पूरी बिल्डिंग गिर सकती है. हालांकि उसकी चेतावनी के अनसुना करते ही इमारत भरभराकर गिर गई और उसमें अपने सपनों को लेकर दिल्ली में पढ़ने आए छात्र जमींदोज हो गए.
मुताबिक पुलिस सूत्रों ने बताया, प्लंबर ने निर्माण कार्य देखते हुए आरोपी को साफ चेतावनी दी थी कि दीवार मत तोड़ो, वरना इमारत ढह सकती है. लेकिन चेतावनी पर ध्यान नहीं दिया गया. अब पुलिस इस बयान और घटना की पूरी श्रृंखला की पुष्टि कर रही है.
सूत्रों के मुताबिक, निर्माण के दौरान लोड-बेयरिंग दीवार हटाई गई थी. इससे इमारत कमजोर हो गई और बाद में ढह गई. पीजी ऑपरेटर सुधांशु लवनीश (31) ने पूछताछ में बताया कि उसने इमारत मालिक के बेटे महेश से निर्माण के बारे में पूछा था और वजह जाननी चाही थी. लेकिन पुलिस को अभी तक इस दावे की कोई पुष्टि नहीं मिली है.
फिलहाल जांच टीम पड़ोसियों और इलाके के अन्य लोगों से पूछताछ कर रही है. वह जानना चाहती है कि क्या किसी ने निर्माण गतिविधि देखी थी या पहले कोई चिंता जताई थी. पुलिस घटना से पहले किए गए कामों का क्रम भी बना रही है और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है.
इतना ही नहीं सत्य निकेतन के इस पीजी में अग्नि सुरक्षा की कमी को लेकर कुछ महीने पहले पुलिस द्वारा सरकार को भेजे गए कथित पत्र के बारे में भी जानकारी की जा रही है. पुलिस पीजी ऑपरेटर के सहयोगी का पता लगाने के लिए छापेमारी भी कर रही है.
इस तरह अवैध तरीके से बनाई गई पीजी बिल्डिंग के गिरने के बाद लोगों में डर पैदा हो गया है. आसपास के किराएदार और छात्र काफी डरे हुए हैं और वे लगातार यही सवाल पूछ रहे हैं कि बिना अनुमति के इस तरह के निर्माण कैसे हो रहे थे और सुरक्षा नियमों की अनदेखी क्यों की गई. क्या इन लोगों को पुलिस और प्रशासन का खौपु नहीं था. पुलिस पूरी तरह से जांच कर रही है ताकि जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो सके और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें.



