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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से लाल सागर तक धुआंधार हमले, बाब-अल-मंदेब भी हो जाएगा बंद? तेल के दाम में लगी आग

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पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. कहां ओमान-ईरान के बीच होर्मुज पर समझौते को लेकर बैठक होने वाली थी, कहां सऊदी अरब और खाड़ी क्षेत्र में जहाजों पर हुए नए हमलों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया. इससे पहले सऊदी अरब की एक महत्वपूर्ण तेल पाइपलाइन पर ड्रोन हमला हुआ था. इसके साथ ही यमन के हूती विद्रोहियों ने भी अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं. पहले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ही खतरे में था लेकिन इन घटनाओं से दुनिया भर में तेल की सप्लाई प्रभावित होने और कीमतें बढ़ने पर चिंता बढ़ गई है. आपको बता दें कि सऊदी अरब दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातकों में से एक है और उसकी तेल सप्लाई रुकने का मतलब है पूरी दुनिया में तेल के दाम बढ़ना.

शुक्रवार को ड्रोन हमले में सऊदी की करीब 1200 किलोमीटर लंबी पूर्व-पश्चिम तेल पाइपलाइन को नुकसान पहुंचा और उसने इसे तत्काल बंद कर दिया. सऊदी की यह पाइपलाइन बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके जरिए सऊदी अरब होर्मुज जलडमरूमध्य को बायपास करके तेल को दूसरे रास्ते से दुनिया तक पहुंचाता रहा है. अगर यह पाइपलाइन लंबे समय तक बंद रहती है तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है. सऊदी अरब के पास लाल सागर के किनारे स्थित यानबू बंदरगाह में इतना तेल भंडार है कि पाइपलाइन बंद रहने पर वह करीब 5 से 7 दिनों तक निर्यात जारी रख सकता है लेकिन इसके बाद दुनिया की लगभग 4 फीसदी तेल सप्लाई खतरे में पड़ सकती है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर हमले
तेल की सप्लाई के लिए महत्वपूर्ण जलमार्ग होर्मुज में भी तनाव बढ़ गया है. ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा एजेंसी UKMTO के मुताबिक रविवार को इस रास्ते से गुजर रहे एक जहाज पर हमला हुआ. जहाज में आग लग गई और चालक दल को सुरक्षित बाहर निकालना पड़ा.
ईरान ने भी बताया कि उसके तट के पास एक ईरानी व्यावसायिक जहाज पर हमला हुआ, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और 4 लोग जख्मी हुए. इसे लेकर डोनाल्ड ट्रंप से जब पूछा गया तो उन्होंने सीधे तौर पर इनकार नहीं किया, जिसके बाद जहाज पर हमले का मामला गंभीर हो गया.
इन घटनाओं के कारण तेल व्यापारियों को आशंका है कि सोमवार को बाजार खुलने पर कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी आ सकती है. पिछले सप्ताह तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई थी. अमेरिका में डीजल की कीमत भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचकर 6.20 डॉलर प्रति गैलन से अधिक हो गई.

बाब-अल मंदेब भी खतरे में
यमन के हूती विद्रोहियों ने भी सऊदी अरब पर हमले तेज कर दिए हैं. सऊदी सरकारी मीडिया ने दक्षिणी जाजान प्रांत में क्षतिग्रस्त घरों और एक मस्जिद के वीडियो जारी किए हैं. हूतियों ने पड़ोसी प्रांत में एक सऊदी सैन्य ठिकाने पर हमला करने का भी दावा किया है. इसी दौरान हूतियों ने पेरिम द्वीप पर कब्जा करने का दावा किया. यह द्वीप बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में स्थित है, जो लाल सागर में जहाजों के आने-जाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. अगर होर्मुज और बाब अल-मंदेब दोनों मार्ग प्रभावित होते हैं, तो वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है.

बाब-अल मंदेब भी खतरे में
यमन के हूती विद्रोहियों ने भी सऊदी अरब पर हमले तेज कर दिए हैं. सऊदी सरकारी मीडिया ने दक्षिणी जाजान प्रांत में क्षतिग्रस्त घरों और एक मस्जिद के वीडियो जारी किए हैं. हूतियों ने पड़ोसी प्रांत में एक सऊदी सैन्य ठिकाने पर हमला करने का भी दावा किया है. इसी दौरान हूतियों ने पेरिम द्वीप पर कब्जा करने का दावा किया. यह द्वीप बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में स्थित है, जो लाल सागर में जहाजों के आने-जाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. अगर होर्मुज और बाब अल-मंदेब दोनों मार्ग प्रभावित होते हैं, तो वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है.

इस बीच ईरान और खाड़ी देशों के बीच बातचीत की उम्मीदों को भी झटका लगा है. ईरान और कुछ खाड़ी देशों के बीच सोमवार को ओमान में बैठक होने वाली थी. इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही को लेकर चर्चा होनी थी लेकिन ओमान के विदेश मंत्री ने बताया कि बैठक को आपसी सहमति बनाने के लिए टाल दिया गया है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा है कि ओमान के साथ किसी समझौते के बावजूद ईरान तब तक होर्मुज नहीं खोलेगा, जब तक अमेरिका उसकी मांगें पूरी नहीं करता.
अमेरिका के लिए भी चुनौती

हूतियों के बढ़ते हमले अमेरिका के लिए भी नई चुनौती बन गए हैं. अमेरिका, सऊदी अरब जैसे अपने सहयोगियों की रक्षा करना चाहता है और समुद्री व्यापार को सुरक्षित रखना चाहता है, लेकिन वह यमन में एक और युद्ध में सीधे शामिल होने से बचना चाहता है. उधर सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सैन्य सहायता मांगी है. होर्मुज और बाब अल-मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर खतरा बढ़ने से पूरी दुनिया में तेल की कीमतें, परिवहन लागत और महंगाई प्रभावित हो सकती है.