बांधाबाजार :— वनांचल में कार्यरत स्थानीय समग्र सृष्टि समाज सेवी संस्था ग्राम दककोटोला जिला राजनांदगांव के द्वारा विकास खंड के ग्राम भूरभूसी ,सोनोली, दुर्रेटोला, कुंडेराटोला ,चोरपानी में सामुदायिक रूप से गांव के रुडीजन्य सिमा के अंतर्गत स्थित वन क्षेत्र एवं निजी खेतो के सीता फल संकलन कर गांव की सामुदायिक वन प्रबंधन समिति के माध्यम से दुर्ग भिलाई शहर के बड़े बाजार में ऊंचे कीमत पर बेचने का तरीका सिखाया गया है। दिनाक 5 से 9 अकटुबर के तारतम्य इन गांवों ने अपने गांव के सीताफल को 300 रूपये प्रति कैरेट के हिसाब से तीन पिकअप 335 कैरेट सीताफल बेचा गया है ।
जबकि यही सीताफल स्थानीय गांव में कोचिया द्वारा आश्रित अन्य गांवों में 120 रूपये प्रति कैरेट ख़रीदा जा रहा है । यह बताना लाजमी है कि सीताफल को तीन श्रेणी में छटनी की जाती है और मूल्य में भी अंतर होता है ।लेकिन ग्रामीण अपने ग्राम सभा के नियमावली के अनुरूप प्रथम श्रेणी के सीताफल को मार्केट में थोक भाव में बेचते है ।दूसरे श्रेणी के सीताफल को घर में खाने और रिश्तेदार और दोस्तों के घर परिवार को दिया जाता है ।
तीसरे क्रम के सीताफल को वृक्ष में ही बीज के लिए रहने देते है जिससे वन्य प्राणी पशु पक्षी को खाने हेतु रखते है ।जिससे उनके खाने से उनके बिट के माध्यम से बीजो का जंगल, खेत, खलिहान में फैलाव होकर पौधों के संख्या में बढ़ोत्तरी होती है ।इस प्रक्रिया से वन्यप्राणियो को भोजन , पर्यावरण का संतुलन बना रहता है,और आजीविका के संसाधनों में वृद्धि होती है । इन गांवों में घर में सीताफल खाने के बाद बीज संकलन कर रखते है और बरसात के पूर्व सीड बाल बनाकर जंगल में छिड़काव करते है । गांव वाले इस सीताफल के वृक्ष रामायण की सीता माता से जोड़कर देखते है ।
गांव वालों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सीता फल को बंदर नही खाते है और वृक्ष पर नही चढ़ते है । यह उनकी अपनी धार्मिक मान्यता है । इन गांवों में सीताफल के वृक्षो के विदोहन कार्य प्रतिबन्ध लगाया गया है । वह संसाधनों के प्रबंधन में अंचल में अग्रणीय व् ख्याति प्राप्त गांव है । यह उल्लेखनीय कार्य को संस्था के जयदेव मोहुरले के मार्गदर्शन और कुशल संचालन में किया जाता है ।



