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डॉ. रमन सिंह के जन्मदिन पर आस्था का ऐतिहासिक संगम: 50 हजार लोगों ने किया सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ, ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में दर्ज हुई उपलब्धि…

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राजनांदगांव। संस्कारधानी राजनांदगांव के दिग्विजय स्टेडियम में छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का 74वां जन्मदिवस बेहद भव्य और ऐतिहासिक रूप से मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित ‘राग नांदगांव’ सांस्कृतिक कार्यक्रम में आस्था, संगीत और जनभागीदारी का अद्भुत संगम देखने को मिला।

कार्यक्रम के दौरान लगभग 50 हजार लोगों ने एक साथ सामूहिक हनुमान चालीसा का सस्वर पाठ कर एक नया इतिहास रचा। इस विशाल धार्मिक आयोजन और अनुशासन को ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में स्थान मिला है, जिससे पूरे प्रदेश का नाम गौरवान्वित हुआ है।

राज्यपाल और दिग्गजों की रही गरिमामयी उपस्थिति इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बनने के लिए छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा जिले के प्रभारी मंत्री गजेंद्र यादव, कैबिनेट मंत्री दयालदास बघेल, रामविचार नेताम, लक्ष्मी राजवाड़े, वरिष्ठ विधायक राजेश मूणत, धरमलाल कौशिक, भावना बोहरा, ईश्वर साहू, हिमांशु द्विवेदी, महापौर मधुसूदन यादव, पूर्व सांसद अभिषेक सिंह समेत बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और भाजपा पदाधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन की ओर से कलेक्टर जितेंद्र यादव और पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने मंच पर पहुंचकर डॉ. रमन सिंह को जन्मदिन की बधाई दी और स्मृति चिन्ह भेंट किया।

जुबिन नौटियाल के सुरों और भजनों ने बांधा समां कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण देश के सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक जुबिन नौटियाल की लाइव प्रस्तुति रही। उन्होंने मंच संभालते ही ‘मेरे घर राम आए हैं’, ‘श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी’ और ‘कौन कहते हैं भगवान आते नहीं’ जैसे भजनों से पूरे स्टेडियम को भक्तिमय कर दिया। इसके बाद अपने सुपरहिट बॉलीवुड गीत ‘हमनवा मेरे’, ‘रातां लंबियां’ और ‘किन्ना सोना’ की प्रस्तुतियां देकर युवाओं और संगीत प्रेमियों को झूमने पर मजबूर कर दिया।

जनता की सहभागिता से मिला ऐतिहासिक स्वरूप समारोह के सफल आयोजन पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने सभी सहभागी नागरिकों, आयोजकों, जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि राजनांदगांव की जनता की सामूहिक श्रद्धा और एकजुटता का परिणाम है। इस भव्य आयोजन ने संस्कारधानी की सांस्कृतिक चेतना को एक नई पहचान दी है।

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