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कटे मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए फॉर्म 6 का उपयोग अवैध, गलत जानकारी पर मतदाता और BLO को हो सकती है सजा: अशोक फड़नवीस..

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वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल; कहा— पहली बार बने मतदाताओं के फॉर्म का गलत इस्तेमाल कर जनता को किया जा रहा गुमराह

राजनांदगांव। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची पुनरीक्षण के तहत कटे हुए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए अपनाई जा रही प्रक्रिया पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता व पूर्व पार्षद अशोक फड़नवीस ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने निर्वाचन आयोग के इस कदम को नियमों के विपरीत बताते हुए दावा किया कि SIR प्रक्रिया के दौरान कटे मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़ने के लिए प्रारूप 6 (फॉर्म 6) का उपयोग करना पूरी तरह अनुचित व अवैध है।

फॉर्म 6 केवल नए मतदाताओं के लिए

श्री फड़नवीस ने नियमों का हवाला देते हुए बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के नियम 13(1) एवं 26 के अनुसार प्रारूप-6 विशेष रूप से केवल ‘नए मतदाताओं’ (First-time voters) के पंजीकरण हेतु निर्धारित है। इसका उपयोग वे युवा करते हैं जिन्होंने 18 वर्ष की आयु पूरी कर ली है अथवा जिन्होंने पूर्व में किसी भी निर्वाचन क्षेत्र में कभी मतदाता के रूप में आवेदन नहीं किया है। इसके विपरीत, आयोग वर्ष 2025-26 में SIR के चलते सूची से कटे मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) को घर-घर भेजकर इसी फॉर्म 6 को भरवा रहा है, जो वैधानिक रूप से गलत है।

गलत शपथ पत्र देने पर 1 वर्ष की सजा का प्रावधान

कांग्रेस नेता ने चेताया कि फॉर्म 6 के कॉलम (iii) में मतदाता को यह स्पष्ट घोषणा/शपथ पत्र देना होता है कि— ‘मैं निर्वाचक नामावली में सम्मिलित किए जाने के लिए पहली बार आवेदन कर रहा हूं और मेरा नाम किसी अन्य निर्वाचन क्षेत्र में सम्मिलित नहीं है।’

इसके साथ ही फॉर्म में स्पष्ट उल्लेख है कि गलत जानकारी या झूठा घोषणा पत्र प्रस्तुत करने पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 (1950 का 43) की धारा 31 के तहत 1 वर्ष तक का कारावास, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। ऐसे में जो लोग पहले से मतदाता रह चुके हैं, वे यह घोषणा कैसे कर सकते हैं? यदि राज्य या जिला निर्वाचन अधिकारी के निर्देश पर बीएलओ कटे हुए मतदाताओं से यह फॉर्म भरवाते हैं और मतदाता उस पर हस्ताक्षर करते हैं, तो भविष्य में कानूनी विसंगति पैदा होने पर मतदाता और बीएलओ दोनों पर वैधानिक कार्रवाई की तलवार लटक सकती है।

पुरानी सूची बहाल कर SSR के तहत हो डोर-टू-डोर सत्यापन

अशोक फड़नवीस ने आरोप लगाया कि आयोग की इस दोषपूर्ण कार्यप्रणाली के कारण देश भर में बड़ी संख्या में वैध मतदाता अपने मताधिकार से वंचित होने की कगार पर आ गए हैं। उन्होंने मांग की है कि आयोग भ्रम की स्थिति पैदा करने के बजाय नियमानुसार पूर्व की मतदाता सूची को आधार बनाए तथा SSR (विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण) के तहत बीएलओ के जरिए डोर-टू-डोर भौतिक सत्यापन कराकर छूटे हुए नामों को सही प्रक्रिया से दुरुस्त करे।

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