० राखड़ व यूरिया के मिक्शप से काम चलाए
० जिले के किसानों में बंटा 6 हजार करोड़ का कर्ज, लक्ष्य 16 हजार करोड़ का
राजनांदगांव (दावा)। खेती- किसानी का समय आ चुका है। जिले के ज्यादातर किसानों ने खाद-बीज का संग्रहण करना शुरू कर दिए है। किसानों को सोसायटियों के माध्यम से राखड व यूरिया खाद की उपलब्धता तो हो रही है लेकिन डीएपी खाद नहीं मिल रहा है। इससे किसानों को इसकी राह तकनी पड़ रही है।
अब तो कहा जा रहा है कि किसान अब डीएपी का नाम भूल जाएं। क्योंकि इसका विदेश से सप्लाई नहीं हो रहा। किसान अब डीएपी के स्थान पर इसका विकल्प तलाशे। इसके लिए कृषि महकमे में पंपलेट वितरण कर किसानों को डीएपी की जगह अन्य उर्वरकों की जानकारी दी जा रही है। वहीं जानकार लोगों द्वारा डीएपी के स्थान पर यूरिया और राखड़ खाद के मिश्रण को बहुत उपयोगी बताया जा रहा है।
बता दें कि अपने जिले में किसानों को 47000 टन खाद वितरण का लक्ष्य रखा गया है जिसमें अभी तक 27000 टन सोसायटियों के माध्यम से वितरित करने का कार्य किया जा रहा है। इसमें राखड़ व यूरिया खाद तो मिल रहा है लेकिन डीएपी नहीं मिल रही है।इसकी वजह रुस और यूक्रेन में युद्ध का होना है। दरअसल डीएपी का आयात रुस,जार्डन, और इस्त्राइल से होता है और वहां हालात बिगड़े होने के चलते डीएपी खाद देश में नहीं पहुंच रहा।
किसानों में 6 करोड़ का बंटा ऋण
बताते चलें कि खरीफ फसल की तैयारी में जुटे किसानों को सोसायटियों में खाद-बीज के साथ-साथ ऋण की व्यवस्था भी सुनिश्चित कराई जा रही है। बैक सूत्रों की मानें तो राजनांदगांव जिले से लेकर एमएमसी व केसीजी जिले सहित कवर्धा जिले में 1600 करोड़ रुपए का ऋण वितरण का लक्ष्य रखा गया है। जिसमें से अब तक राजनांदगांव जिले में 600 करोड़ का ऋण वितरण किया जा चुका है। जिले के अधिकांश पंजीकृत किसान बैंक द्वारा वितरित किए जा रहे ऋण का लाभ उठा रहे हैं। वहीं डीएपी खाद के मामले में देखा जाए तो जब तक रुस व यूक्रेन का युद्ध चल रहा है , उक्त खाद का आयात किया जाना संभव नहीं जान पड़ रहा।



