० वैकल्पिक खाद में रुचि नहीं दिखा रहे किसान
० बाजार से महंगे दामों में उक्त खाद खरीदने मजबूर
राजनांदगांव (दावा)। रुस और यूक्रेन का युद्ध क्या छिड़ा भारत के किसानों के लिए डीएपी खाद का संकट उत्पन्न हो गया है। चूंकि खेती- किसानी का मौसम आ गया है जिले के अधिकांश सोसायटियों में यूरिया और डीएपी खाद नहीं मिलने से किसान चिंतित नजर आने लगे हैं।
हालांकि खरीफ सीजन देखते हुए किसानों के समय पर खाद-बीज की व्यवस्था सुनिश्चित कराने के लिए सोसायटियों में भंडारण तो कराया जा रहा है लेकिन वहां यूरिया व डीएपी की भारी कमी बनी हुई है। मांग के अनुसार जिले में डीएपी की सप्लाई नहीं होने से किसानों को समितियों का चक्कर लगाना पड़ रहा है। अंत में उन्हें बगैर डीएपी खाद के खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। हालांकि डीएपी यूरिया खाद के अभाव के चलते किसानों को वैकल्पिक खाद का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है लेकिन किसान इसमें रुचि नहीं दिखा रहे। आलम यह है कि मजबूरी में किसानों को यूरिया और डीएपी खाद बाहर से महंगे दामों मे खरीदनी पड़ रही है। भले ही सोसायटियों के बनिस्बत बाहर से खाद खरीदने में महंगा जा रहा है। लेकिन मजबूरी के चलते उन्हें खरीदनी पड़ रही है।
बता दें कि कृषि केन्द्रों में डीएपी का 1600 रुपए में बिक रहा ,जबकि सोसायटियों में इसके दाम 1350 रुपए है। यूरिया साढ़े 266 रुपए ,पोटाश 1535 रुपए, सुपर फास्फेट 510 रुपए व सुपर जिंक 495 रुपए प्रति बैग में मिल रही है। इधर कृषि केंद्रो में जिंक सल्फेट 650 रुपए में यूरिया 300 रुपए सुपर फास्फेट 600 रुपए में बिक रहा। किसानों को महंगी दामों में खाद व बीज खरीदने से किसानी के लागत में वृद्धि होना स्वाभाविक है।
मांग के अनुरुप डीएपी की सप्लाई नहीं
बताते चले कि लंबे इंतजार के बाद हाल ही में डीएपी खाद की एक खेप पहुंची थी। लेकिन डीएपी खाद की कमी के कारण किसानों को उनकी मांग के अनुसार खाद नहीं मिल रहा है।
सूत्रों की मानें तो समितियों में खाद का भंडारण लक्ष्य के मुकाबले 54 प्रतिशत तक हुआ है। इस साल 50 हजार मिट्रिक टन खाद के भंडारण का लक्ष्य है। इसमें से 27 हजार मिट्रिक टन खाद का भंडारण किया गया है। इधर किसानों ने अभी तक सोसायटियों से 21 हजार मिट्रिक टन खाद का उठाव किया है। सोसायटियों में अभी 6 हजार मिट्रिक टन खाद बचा हुआ है, उसी का उठाव किसान कर रहे हैं। डीएपी खाद भंडारण का लक्ष्य 11 हजार मिट्रिक टन का है, जिसमें से मात्र 1295, 3 मिट्रिक का उठाव कर चुके हैं। वहीं यूरिया खाद का भंडारण का लक्ष्य 20500 मिट्रिक टन का है जिसमें से कुल भंडारण 4598 मिट्रिक टन का बताया जा रहा है। जिले की सोसायटियों में धान सहित अन्य बीज का भी भंडारण किया जाना है लेकिन अपेक्षा के अनुसार भंडारण नहीं हो पाया है। इससे किसान परेशान हैं। जिले में खिल बीज समुचित रुप से नहीं मिल पाने से किसानों को अभी से चक्कर लगाने की नौबत आ रही है।



